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उत्तराखंड में पत्रकारिता पर अघोषित सेंशरशिप के विरोध में राष्ट्रपति व राज्यपाल को ज्ञापन

उत्तराखंड में पत्रकारिता पर अघोषित सेंशरशिप के विरोध में राष्ट्रपति व राज्यपाल को ज्ञापन

भ्रष्टाचार व काले कारनामों को उजागर करने वाले पत्रकारों पर राजद्रोह की कार्यवाही का विरोध

राजभवन जाने से रोकने का किया पुलिस ने प्रयास

देहरादून। प्रदेश के लगभग दो दर्जन पत्रकार संगठनों की ओर से बनी उत्तराखंड पत्रकार संयुक्त संघर्ष समिति के नेतृत्व में आज राजधानी दून के पत्रकारों ने विगत काफी दिनों से उत्तराखंड सरकार द्वारा भ्रष्टाचार व काले कारनामों को निर्भीकता से उजागर करने वाले पत्रकारों पर राजद्रोह जैसे गम्भीर आरोप लगवा कर लोकतंत्र के चौथे स्तम्भ पत्रकार और मीडिया को कुचलने को जो क्रम चलाया हुआ है और कहर वरपाया जाने का क्रम जारी रखा है उसके विरोध में पत्रकार लामबंद हो गये हैं।


पत्रकारों व मीडिया कर्मिंयों पर पुलिस के द्वारा की जा रही उत्पीड़न, दमन की कार्यवाही एवं झूटे मुकदमें दर्ज कराकर उन्हें अकारण जेल भेजने की अशोभनीय व अपमान जनक कार्यवाही एवं तीन तीन वर्ष पुराने प्रकरणों पर निजी दुर्भावना से ग्रसित होकर अमानवीय एवं असंवैधानिक तरीकों से की गयी कार्यवाही के विरोध में आज प्रदेश की राज्यपाल श्रीमती बेबीरानी मौर्य को राज भवन जाकर ज्ञापन सौंपा तथा एक ज्ञापन देश के माननीय राष्ट्रपति को भी हस्तक्षेप व चरमराती कानून व्यवस्था के विरोध में मैडम के द्वारा प्रेषित करवाया।

ज्ञापन में प्रदेश सरकार द्वारा अघोषित सेंशरशिप लगाकर पत्रकारों पर की जा रही दमनात्मक व उत्पीड़न की कार्वाही और झूठे मुकदमें दर्ज कराकर जिस तरह खुद पुलिस द्वारा असंवैधानिक व अमानवीय कृत्य किये जा रहे हैं के भी विरोध में दखल देने और पत्रकारों के साथ दुर्दांत शातिर अपराधियों की तरह लाकॅअप में बंद करने और अवैध रुप से यातनाओं के साथ पिटाई किये जाने का मामला भी उठाया गया।

हाल ही में कोटद्वार व हरिद्वार सहित अन्य पत्रकारों के साथ भी की गयी पुलिसिया कार्यवाही के मामलों को भी समम्लित किया गया।

ज्ञापन देने से पूर्व पत्रकार व मीडिया बंधु डूँगा हाऊस के पास सोशल डिस्टेंसिंग के अनुपालन के साथ इकठ्ठा हुये और अपनी अपनी बाजू में काला रिवन बाँध कर सांकेतिक रूप से अपना रोष भी जाहिर किया तथा यह निर्णय लिया कि पत्रकार जब तक काला रिवन नहीं हटायेंगे जब तक कि सरकार इस अघोषित सेंशरशिप को नहीं हटाती तथा पत्रकार राजेश शर्मा से राजद्रोह जैसे आपत्तिजनक मामले वापस नहीं लिये जातेऔर फर्जी मुकदमों को वापस नहीं लेती।

ज्ञापन देने जा रहे पत्रकारों को हाथीबड़कला पुलिस चौकी के पास पुलिस ने बैरिकेड्स लगाकर रोक लिया जबकि पत्रकार अनुशासनबद्ध रहकर अपने अपने वाहनों से राजभवन के संज्ञान के साथ ज्ञापन देने पूर्व निर्धारित समय के अनुसार जा रहे थे।

ज्ञापन देने के लिए इकठ्ठे होने वाले पत्रकारों में डा. वी डी शर्मा, संयोजक उत्तराखंड पत्रकार संयुक्त संघर्ष समिति, आलोक शर्मा, प्रदेश महामंत्री वेब मीडिया एशोसियशन, वर्किंग जर्नलिस्ट्स यूनियन आफ इण्डिया के प्रदेश महामंत्री सुनील गुप्ता, संगठन मंत्री रजनीश ध्यानी, देवभूमि पत्रकार यूनियन के प्रदेश अध्यक्ष विजय जायसवाल, दीपक गुलानी, अनिल वर्मा, डा.गुल वहार अहमद, पर्वतजन से राजेश बहुगुणा एवं वीडियो जर्निलिस् पुण्डीर एवं पत्रकार असद खान, अशरफ अन्सारी, बाबी गुप्ता, गौरव तिवाडी, अर्पित गुप्ता, वीर सिंह चौहान, अखिलेश व्यास, सूर्य प्रकाश शर्मा, नवीन वरमोला, संजीव पंत, तिलक राज, मीनाक्षी, वरुण राठी, अहमद, दीपक छावडा, विजय रावत, सोमपाल सिंह, राजकुमार छावडा एवं श्रमजीवी पत्रकार यूनियन से विश्वजीत सिंह नेगी, गायत्री जी, बावी शर्मा, गोपाल सिंघल, ज्योत्सना सहित अनेकों संगठनों से जुडे़ पत्रकार सम्मिलित हुये।

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