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नहीं हो पाये आज घोषित ऊर्जा विभाग के हुये साक्षात्कारों के परिणाम : अटकलों और कयासों का दौर जारी 

नहीं हो पाये आज घोषित ऊर्जा विभाग के हुये साक्षात्कारों के परिणाम : अटकलों और कयासों का दौर जारी!

…ये कैसी पारदर्शिता है?

देहरादून। उत्तराखंड ऊर्जा विभाग के यूपीसीएल के एमडी और निदेशक परिचालन सहित पिटकुल के निदेशक वित्त पद पर वीडियो कान्फ्रेंसिंग व व्यक्तिगत (संयुक्त) रूप से हुये बहुप्रतीक्षित साक्षात्कार के परिणामों को लेकर तरह तरह की अटकलों और कयासों का दौर जारी है। इस अप्रत्याशित  एवं असम्भावी प्रक्रिया के तहत चर्चा यह भी है कि परिणाम फिलहाल होल्ड कर दिये गये हैं तथा इस होल्ड किये जाने के पीछे साक्षात्कार कमेटी के दो एक्सटर्नल मेम्बरों की ओपीनियन तथा निर्णय का न मिलना , बताया जाना भी चर्चा में है। हालाँकि यह कारण गले नहीं उतर रहा है क्योंकि जब सारा काम आनलाईन मय साक्षात्कार में सबाल-जबाव के माध्यम से हुआ तो परिणाम व राय अथवा मार्किंग भी गोपनीय आनलाईन से आ सकती ….? पर ये तो वही जाने, फिर कारण क्या? कोई भी जिम्मेदार अधिकारी मीडिया से बात करने और वास्तविकता बताने को तैयार नहीं दीखा जबकि सीएस महोदय का इतना कहना भी काफी पर्याप्त नहीं लगा कि जब परिणाम घोषित हो जायेगा तो आपको भी पता चल जायेगा! यहाँ पारदर्शिता पर भी विराम सा ही दिखाई दिया! क्योंकि अभी तक के अनेकों बार के साक्षात्कारों के परिणाम इंटरव्यू के पश्चात ही उसी दिन घोषित किये जाते रहे हैं!

यहाँ अगर सूत्रों की माने तो आज होने वाले इन साक्षात्कारों में यूपीसीएल के निदेशक परिचालन के पद पर सात अभ्यर्थियों के नाम बताये जा रहे है, जिनमें एम.एल. प्रसाद, एस के टम्टा, रजनीश अग्रवाल, ए के सिंह, पंकज कुलश्रेष्ठ एवं उत्तर प्रदेश के मेरट से वैराग बंसल सहित एक अन्य झारखंड का नाम है। वहीं पिटकुल के निदेशक वित्त के पद पर दो लोंगो के ही साक्षात्कार कराये गये हैं तथा एक अभ्यर्थी एस के तोमर को विजीलेंस क्लीयरेंस के वावजूद भी काल लेटर जारी नहीं किया गया? तथा ये दोनों भी उत्तराखंड से बाहर के बताये जा रहें है। इसी प्रकार सबसे बाद में एमडी यूपीसीएल के पद पर भी तीन दावेदार साक्षात्कार में उपस्थित हुये बताया जा रहा है?

सूत्रों के अनुसार एक्सटर्नल एक्सपर्ट सदस्यों में पावर ग्रिड कारपोरेशन एवं पावर फाईनेंस कारपोरेशन के सीएमडी/एमडी के द्वारा ही तकनीकि सबाल आदि पूछे गये थे!

कयासों और अटकलों में किसी रणनीति पर विचार विमर्श का चलना भी है! और यह भी सम्भावना व्यक्त की जा रही है कि राजनैतिक दबाव व जोड़तोड़ का फार्मूला भी आडे़ आ रहा है?

खैर वास्तविकता जो भी हो परिणाम जो भी हों फिलहाल दो दिन ऐसी ही कयासबाजियाँ और अटकलें सुनाई। पड़ती रहेंगी! गौरतलब तो इस साक्षात्कार के परिणाम ही होंगे जिन पर TSR का ठप्पा भी तब तक लग चुका होगा! दूसरी ओर हमारी दिन में प्रकाशित खबर में पाठकों के समक्ष उठाये गये बिन्दु भी काफी महत्व पूर्ण भूमिका में दिखाई पड़ रहे है!