नोएडा और ग्रेटर नोएडा में आम्रपाली समूह की बिना बिकी संपत्तियां जब्त कर ली गई हैं। इनमें 5,000 फ्लैट, जमीन और एफएआर शामिल हैं। दोनों विकास प्राधिकरणों ने सुप्रीम कोर्ट और एनबीसीसी को यह जानकारी दे दी है। नोएडा के विशेष कार्याधिकारी (ग्रुप हाउसिंग) संतोष सिंह ने बताया कि शहर के सेक्टर-76 में आम्रपाली सिलिकॉन सिटी प्रोजेक्ट में 10 एकड़ जमीन पर कंपनी द्वारा न तो निर्माण किया गया है और न ही किसी को बेची है। इस परियोजना में 2.75 के आधार पर एफएआर अनुमन्य है। एफएआर का भी 30% हिस्सा अभी बाकी है। प्राधिकरण ने यह जमीन जब्त कर लिया है। वहीं, दूसरी ओर ग्रेनो विकास प्राधिकरण के अपर मुख्य कार्यपालक अधिकारी केके गुप्त ने बताया कि ग्रेनो वेस्ट की विभिन्न परियोजनाओं में करीब 2.5 लाख वर्ग मीटर एफएआर अब तक कंपनियों ने नहीं बेचा था, जिसे जब्त कर लिया गया। इसमें आवासीय के साथ वाणिज्यिक श्रेणी की जमीन भी शामिल है।
डीआरटी करेगा नीलामी
अधूरी पड़ी आवासीय योजनाओं को पूरा करने और बैंकों के कर्ज को वसूल करने के लिए ऋण वसूली न्यायाधिकरण (डीआरटी) में सुनवाई चल रही है। इन संपत्तियों की जानकारी अब डीआरटी को दी जाएगी। डीआरटी इनकी नीलामी करके कर्जों की वसूली करेगा। इसी से एनबीसीसी को पैसा मिलेगा।
आम्रपाली के खिलाफ बड़ी कार्रवाई
वहीं आम्रपाली समूह की कंपनियों पर अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई हुई है। नोएडा और ग्रेटर नोएडा विकास प्राधिकरणों ने सारी बिना बिकी संपत्तियां जब्त करके सुप्रीम कोर्ट को सूचना दी है। इस कार्रवाई पर फ्लैट खरीदारों ने खुशी जाहिर की है।

आम्रपाली समूह के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में खरीदारों के मुकदमों की पैरवी कर रहे अमित गुप्ता ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर यह कार्रवाई हुई है। अब तक बिल्डर लगातार बचने का प्रयास कर रहा था। सुप्रीम कोर्ट को भी गुमराह करने के लिए बार-बार सूचनाएं बदली गईं। यह बिल्डर के खिलाफ अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई है। यह संपत्ति नीलाम करके एनबीसीसी को पैसा दिया जाएगा। जिससे अधूरे पड़ी आवासीय परियोजनाओं को पूरा किया जाएगा। फ्लैट खरीदारों की संस्था नेफोवा के अध्यक्ष अभिषेक कुमार का कहना है कि अब एनबीसीसी को प्रक्रिया में तेजी लाने की जरूरत है। निगम को सुप्रीम कोर्ट ने टेंडर निकालने की अनुमति दे दी है। जिससे खरीदारों को जल्दी राहत दी जा सके।
2.75 एफएआर पर आंकलन किया गया
आम्रपाली के निदेशकों ने संपत्तियों का आंकलन 3.50 एफएआर को आधार बनाकर किया था और सुप्रीम कोर्ट को जानकारी दी थी। इस पर खरीदारों ने न्यायालय के सामने आपत्ति जताई थी और तर्क दिया था कि अभी संपत्तियां 2.75 एफएआर पर हैं। बिल्डर ने एफएआर बढ़ाने की अर्जी प्राधिकरणों में दी है। दोनों ही प्राधिकरण ने अब तक एफएआर नहीं बढ़ाया है। अब सुप्रीम कोर्ट को संपत्तियों का ब्यौरा देते वक्त प्राधिकरण ने भी एफएआर 2.75 ही बताया है।
एनबीसीसी बेचेगा जब्त फ्लैट
जब्त 5,000 फ्लैटों को एनबीसीसी बेचकर परियोजनाओं को पूरा करने के लिए पैसा जुटाएगा। बिना बेची गई जमीन और एफएआर का प्रयोग भी एनबीसीसी करेगा।