शिमला। जिला शिमला में वर्ष 2021-22 में एकीकृत बागवानी विकास मिशन के तहत 18 करोड़ 85 लाख 86 हजार रुपए की वार्षिक योजना तैयार की गई है, जिसके तहत लगभग 6066 लाभार्थियों को लाभान्वित किया जाएगा। यह जानकारी उपायुक्त शिमला आदित्य नेगी ने आज जिला शिमला में एकीकृत बागवानी विकास मिशन के तहत वर्ष 2021-22 के लिए वार्षिक कार्य योजना की बैठक की अध्यक्षता करते हुए दी।
उन्होंने बताया कि इस कार्य योजना को स्वीकृत कर उचित कार्रवाई के लिए प्रदेश सरकार को प्रेषित किया गया है प्रदेश सरकार से स्वीकृति मिलने से जिला शिमला के हजारों बागवानों को विभिन्न योजनाओं के माध्यम से लाभान्वित किया जाएगा।
उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के तहत सूक्ष्म सिंचाई योजना के लिए वार्षिक कार्य योजना तैयार की गई है जिस पर एक करोड 2 लाख रुपए खर्च किए जाएंगे, तथा योजना के तहत लगभग 250 लाभार्थियों को लाभान्वित किया जाएगा। उन्होंने बताया कि जिला में प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के अंतर्गत इस वित्तीय वर्ष 125 हेक्टेयर भूमि को लाने का लक्ष्य रखा गया है।
उन्होंने बताया कि जिले के अंदर योजना के तहत छोटी पौधशाला, नए बागानों की स्थापना, जल स्रोतों का सृजन, संरक्षित खेती, जैविक खेती, समेतिक पोषण प्रबंधन, बागवानी यंत्रीकरण, मानव संसाधन विकास, फसलोंप्रांत समेतिक प्रबंधन आदि विभिन्न कार्यों पर जिला के बागवानों को लाभान्वित किया जाएगा।
उन्होंने बताया कि जिले के दूरदराज क्षेत्रों को भी इन योजनाओं के माध्यम से लाभान्वित किया जाए ताकि लाभान्वित न हुए क्षेत्रों में इन योजनाओं का लाभ प्राप्त हो सके। उन्होंने बताया कि जिला शिमला सघन बागवानी के चलते विभाग की भूमिका महत्वपूर्ण है सभी विभागीय अधिकारी आपस में समन्वय स्थापित कर कार्य करें ताकि अधिक से अधिक लोगों को लाभान्वित किया जा सके।
बैठक में भारतीय प्रशासनिक अधिकारी स्मिथ संतोष लोधा, उप निदेशक बागवानी डॉक्टर देशराज शर्मा, जिला कृषि अधिकारी महेंद्र सिंह भवानी, बागवानी विकास अधिकारी देवराज कैथ, साइंटिस्ट आरएचआर मशोबरा डॉक्टर जसवीर सिंह वजीर, एसएमएस अंजना जस्ता एवं अन्य अधिकारीगण उपस्थित थे।
भूखमरी से उभरे जज्बातों ने गढ़ा मेंरे अभिनय कौशल को-रघुवीर यादव

शिमला। भूखमरी से उभरे जज्बातों ने गढ़ा मेंरे अभिनय कौशल को-रघुवीर यादव चाह की राह को अपनाकर रघुवीर यादव ने अपने अभिनय जीवन के कारवां को आगे बढ़ाया। कला संस्कृति भाषा अकादमी हिमाचल प्रदेश के साहित्य कला संवाद में रंगमंच, फिल्म और अभिनय के कुशल चितेरे चर्चित कलाकार रघुवीर यादव ने मण्डी से दक्षा शर्मा के साथ उन्मुक्त कण्ठ से अपनी अभिनय यात्रा के संस्मरण सांझा किए।
उन्होंने कहा कि संगीत से ही मेरी शुरूआत हुई और यह मेरे शरीर में रचा बसा है। किसी उस्ताद से मैंने इसकी विधिवत शिक्षा नहीं ली, जहां जो मिला उससे सीखता रहा। पापड़ वाले का सुर में गाकर पापड़ बेचना या फिर भीख मांगने वाले की सुरीली लय में भीख मांगना का ज्ञान देकर संगीत के प्रति का प्रभावित किया।
उन्होंने कहा कि मैं अपनी कमियों से सीखता रहा। जीवन की भूखमरी ने मुझे कला के प्रति सीखने के जज्बातों से जोड़ा, जिसकी बारीकियों ने मुझे गढ़ा है। रघुवीर यादव कहते है कि रंगमंच वास्तव में जिन्दगी जीने का सही सलीखा सिखाता है। वो कहते है रंगकर्म से जुड़े व्यक्ति को अपने आंख-कान खुले रखने की आवश्यकता है, जिससे जो सीखने को मिले सीख लेना चाहिए। यही सच्चे कलाकार की मिसाल है। उन्होंने कहा कि मैं भी सीखने की जिम्मेदारी और सोच को अपनाते हुए आगे बढ़ा हूं। मेरे लिए जीवन में रंगमंच से बढ़कर और कुछ भी नहीं है।
उन्होंने बताया कि थियेटर की शुरूआत पारसी रंगमंच से हुई लेकिन अब्राहम अल्काजी साहब से रंगकर्म की बारीकियां, अनुशासन तथा पहले शो से बेहतर दूसरा शो करने की प्रेरणा मिली। चरित्र की रूह में डूबना अल्काजी साहब की देन है। पारसी थियेटर ने जीवन को सुखद बनाने के लिए शरीर को खपाने का जज्बा कायम किया। तकलीफों और दिक्कतों से मिले तुजुर्बों ने जीवन को खुशनुमा बनाने के लिए मेहनत का जज्बा कायम किया।
रघुवीर यादव कहते है कि फिल्में करते हुए थियेटर का अनुभव बहुत काम आया। कैमरे के सामने कभी झूठ नहीं बोला जा सकता। उसमें कैमरा भी बराबर की मेहनत मांगता है। उन्होंने कहा कि हिमाचल से मेरा बहुत लगाव रहा है। राष्ट्रीय नाटय विद्यालय नई दिल्ली में प्रवेश लेने से पहले अपने साक्षात्कार में मैंने हिमाचल लोक गीत भी गाया था।
उन्होंने बताया कि टुटू फिल्म की शूटिंग पालमपुर में की थी। इसके अतिरिक्त एक ओर फिल्म की शूटिंग के लिए धर्मशाला आया था। वो चाहते हैं कि शिमला आकर थियेटर करेंगे। रंगमंच में नवोदित कलाकारों के लिए संदेश देते हुए कहते है कि सबसे पहले हमें अपने आप को पहचानना है। अपनी खुबियों और खामियों को पहचानेे, खुबियों को और तराशे तथा खामियों को शिदत से दूर करें।
उन्होंने कहा कि रंगमंच अथवा फिल्मों में संघर्ष करने का अर्थ निरंतर सीखते रहना है। रास्ते अपने आप खुलते जाएंगे और अभिनेता कई जिन्दगियां जीता है। अपने साक्षात्कार में उन्होंने विभिन्न लोकगीतों को भी सांझा किया। पीपली लाइव फिल्म का गाना सखी संईया खूब ही कमात है, महंगाई डायन खाय जात है तथा अन्य गीत उन्होनें अपनी सूरीली आवाज में सुनाए। बांसुरी बजाने के शौक और पीवीसी पाईप पर स्व निर्मित बांसुरी की मधुर धुन सुना कर सबको मंत्रमुक्त कर दिया।
उल्लेखनीय है कि मैसी साहब मूंगेरी लाल के हसीन सपने, जामुन तथा कई फिल्मों में इनके द्वारा यादगार भूमिकाएं निभाई गई।
शिमला नगर के विभिन्न बैंकों का औचक निरीक्षण
शिमला। अतिरिक्त जिला दण्डाधिकारी कानून एवं व्यवस्था प्रभा राजीव एवं उपमण्डलाधिकारी शिमला शहरी मंजीत शर्मा ने आज शिमला नगर के विभिन्न बैंकों का औचक निरीक्षण कर कोविड-19 महामारी से बचाव के लिए जारी किए गए मानकों एवं सलाहों की अनुपालना सुनिश्चित करने की जांच की। उन्होंने पाया कि कई बैंकों में इस संबंध में दिए गए दिशा-निर्देशों की पालना सही रूप में नहीं हो पा रही। इस संबंध में उन्होंने बैंक के अधिकारियों एवं कर्मचारियों को आदेशों की अनुपालना कठोरता से करवाने के निर्देश दिए।
उन्होंने सभी बैंकों के अधिकारियों एवं कर्मचारियों को इन मानकों की अनुपालना सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि बैंकों में आने वाले ग्राहक यदि इन आदेशों की अवहेलना करते है तो उनका लेन-देन न किया जाए। उन्होंने अधिकारियों, कर्मचारियों तथा ग्राहकों को मानकों की अवमानना करने या अवहेलना करने के प्रति कठोर कार्यवाही अमल में लाने के निर्देश दिए।
उन्होंने कहा कि यदि इसमें कोई कमी पाई गई तो बैंक के अधिकारी तथा कर्मचारी उसके जिम्मेदार होंगे। पर्याप्त रूप से मास्क पहनना, निरंतर हाथों को सैनेटाइज करना, उचित दूरी बनाए रखने की व्यवस्था, बैंकों के आगमन गेट पर सैनेटाइजर और थर्मल स्कैनिंक की व्यवस्था अवश्य करें। इसके अतिरिक्त एटीएम पर भी निरंतर सैनेटाइजर की उपलब्धतता तथा साफ-सफाई सुनिश्चित करना बैंकों का कर्तव्य है। कोरोना महामारी को रोकने के लिए सभी का सहयोग आपेक्षित है। किसी प्रकार की कोताही इसके लिए बर्दाशत नहीं की जाएगी।