अपराधिक प्रवृत्ति का निकला ये डाॅक्टर केतन आनंद?
तभी तो कर रहा है अवैध वसूली गयी रकम की वापसी में आनाकानी!
भागलपुर बिहार में एक मेडिकल छात्रा के अपहरण व 70लाख की फिरौती के मामले में साजिश व अपहरणकर्ता के रूप में इस डाक्टर के विरुद्ध दर्ज हुई थी 2016 में एफआईआर?
कानपुर किडनी 2020 कांड में भी है संदिग्ध है ये दिल्ली निवासी डाक्टर आनंद, जुडे़ हो सकते हैं तार?
राजधानी दून के अनेकों ट्रामा सेन्टरों व अस्पतालों एवं मेडिकल स्टोरों को भी बना चुका है अपना शिकार!
इसकी मेडिकल डिग्री व उत्तराखंड मेडिकल काउन्सिल का रजिस्ट्रेशन भी संदेह के घेरे में!
गैर कानूनी मार्क हेल्थ केयर अस्पताल दबंगई के साथ कोरोना मरीजों के साथ लाखों की लूटखसोट!
मार्क फार्मेसी और पैथालोजी भी बताई जा रही अवैध, तो फिर जीएसटी के नाम पर भी डकारी जा रही है रकम क्या?
6हजार की जगह बसूल रहा है 35 से 40 हजार प्रतिदिन की रकम!
स्वास्थ विभाग व जिला प्रशासन निरन्तर टाल मटोल कर इन लाशों के सौदागरों के साथ कर रहा हमदर्दी भरा सौदा और टेक रहा घुटने!
अवैध कोविड अस्पताल के दोषी सावित होने के उपरान्त भी निरंतर उल्लंघन करने वाले डाक्टर व अस्पतालों पर सीलिंग और एफआईआर में देरी क्यों!
नेगलीजेन्सी और लूट खसोट से मौत के मुँह में भेजे गये मरीजों के परिजनों को कुछ रकम वापसी का झाँसा देकर सीएमओ के सहायक स्वार्थवश दिलवा रहे क्लीनचिट और झाड़ रहे पल्ला!
इधर जारी मरीजों की जान से खिलवाड़, उधर अधिकारियों की ढींगामस्ती दिखा रही सीएम राबत व सचिव स्वास्थय को ठेंगा!
कैलाश हास्पिटल भी 12 हजार की जगह वसूल रहा 60 से 70 हजार प्रतिदिन, फिर वेवस क्यों हैं स्वास्थ विभाग! लोंगो में इस अस्पताल के नाम से दहशत क्यों?
क्लीनिकल स्टेवलिशमेंट एक्ट की अनदेखी कर नाजायज व गैरकानूनी कृत्य करने वाले अस्पतालों को गुपचुप पँजीकृत करने की फिराक में सीएमओ, ताकि शहर में खुले आम परोसी जा सके मौत!
कोविड के एक मरीज सन्तोष भट्ट से अधिक वसूले गये 20 हजार की गरीब को वापसी करा शेखी वघार लाखों लाखों की लूटी गयी रकम पर वेवस ये!
क्या ऐसे डाक्टरों व अस्पतालों पर नकेल नहीं कसी जानी चाहिए?
(ब्यूरो की पड़ताल में उजागर हुये और कुछ खास तथ्य)
देहरादून। प्रदेश के मुखिया व शासन में बैठे सचिव और डीजीपी पुलिस कहते हैं तो कहते रहें उनका तो काम है कहना।
ये मानना है राजधानी दून के सीएमओ व जिला प्रशासन का। इनकी इस सोच और लचर कार्यप्रणाली में कोरोना संक्रमण से जूझ रहे लोंगो की जान की परवाह कम और गैर कानूनी अस्पतालों व अपराधिक प्रवृत्ति के डाक्टरों की चिन्ता अधिक झलक रही है। उनसे सहानुभूति और हमदर्दी भरा रवैया स्वतः ही साबित कर रहा है कि दाल में कुछ नहीं वरन काला ही काला है और नीचे से ऊपर तक नाटकीय ढंग से साँठगाँठ जोरों से चल रही है परिणाम स्वरूप इस प्रकार का चिकित्सा माफिया सक्रिय है।
ज्ञात हो कि विगत 12 मई को इन अवैध अस्पतालोंऔर डाक्टरों के विरुद्ध नैशविला रोड स्थित मार्क हास्पिटल के डाक्टर आनंद जो अपने आपको प्रख्यात मैक्स हास्पिटल में सीनियर डाक्टर होने का मनगढ़न्त प्रभाव दिखा आकर्षित कर नाजायज धन की लूट मचाये हुये है और जानबूझ कर अनावश्यक रूप से मरीज की हालत यातो बद से बदतर कर डिस्चार्ज करने या फिर जान से खिलवाड़ करने में भी नहीं चूक रहा है, के बारे में उजागर किया था परन्तु इस देवभूमि में भगवान के रूप में छिपे जल्लाद और अस्पताल के नाम पर इन कसाईखानों के विरुद्ध शासन और प्रशासन का ढुलमुल रवैया ही अभी तक सामने आया है। यही नहीं उक्त डाक्टर व अस्पताल अवैध रूप से मरीजों के ईलाज में वसूली गई भारी भरकम रकम की वापसी में भी आनाकानी कर रहा है और साहब हैं कि उसके समक्ष ऐसे गिड़गिडा रहें हैं जैसे अपराध उन्होंने किया हो!
मजे की बात तो यह भी है कि कोविड व क्लीनिकल स्टेवलिशमेंट एक्ट व आपदा कमेटी के डीएम सर्वे सर्वा हैं परन्तु उनको फुर्सत ही कहाँ है कि अपने आदेशों और निर्देशों का पालन भी गम्भीरता से परख व देख सकें। इसी परम्परा का लाभ इनके आधीनस्थ और कुछ भ्रष्ट सहायक अधिकारी और मजिस्ट्रेट व डिप्टी सीएमओ उठा रहे हैं और डिप्टी सीएमओ जानकर। मामलों पर त्वरित प्रभावी कार्यवाही न करके ऐनकेन प्रकरेण लटका रहे हैं ताकि पीडि़त चक्कर काटते काटते परेशान हो चुप होकर बैठ जाए। शायद यही कारण होगा कि डीएम साहब भी कतराते और असहाय से नजर आ रहे हैं।

यहीं नहीं पुलिस कार्यवाही भी इन्हीं की रिपोर्ट पर निर्भर करती है क्योंकि सीधे एफआईआर न दर्ज हो पाने की व्यवस्था कानून में होने के कारण असहाय सी नजर आ रही है अथवा फिर यूँ कहा जाये कि सबके सब एक दूसरे पर टालमटोल कर कतरा रहें हैं।
उल्लेखनीय है कि जिलाधिकारी द्वारा छापामार टास्कफोर्स कमेटियाँ भी सही जाँच व कार्यवाही न करके दिखावटी और मेहरबानी भरी कार्यवाही करती नजर आ रही है और सत्यता से परे आँकडे़ छिपा रही हैं।
सूत्रों की अगर यहाँ माने तो उक्त तथाकथित अपराधिक प्रवृत्ती के डा. केतन आनंद के द्वारा जो उत्तराखंड मेडिकल काउन्सिल का जो सार्टीफिकेट प्रस्तुत किया गया उस रजिस्ट्रेशन नम्बर 10493 पर कोई पंजीकरण इसका यूएमसी की बेबसाईट पर प्रदर्शित ही नहीं है। यही नहीं तहकीकात में पता चला कि आईएमए का मेम्बर भी नहीं है और भागलपुर (विहार) पुलिस में 2016 में एक मेडिकल छात्रा के अपहरण के मामले में एफआईआर में मुख्य आरोपी भी था तथा पुलिस के पास इसकी गिरफ्तारी के पर्याप्त सबूत भी थे!
इसी प्रकार डिजीटल युग के आधार पर 2020 के कानपुर किडनी काण्ड में भी डा. केतन और डा. आनंद के नाम से भी संदिग्ध बताया गया है तो पूना महाराष्ट्र मे डेन्टल (बीडीएस) के नाम से है तो दिल्ली में रेडक्रास हस्पताल और डीडी अस्पताल से सम्बद्ध रहा बताया जा रहा है किन्तु इतने कम समय के कार्यकाल में अनेकों शहर व जगह बदलना भी अनेकों शंकाओं को जन्म देता है।
बताया तो यह भी जा रहा है कि विगत आठ-दस माह में जगदम्बा व वोहरा ट्रामा सेन्टर सहित दून अस्पताल के निकट एक अन्य अस्पताल व एक मेडिकल स्टोर पर भी गुल खिलाये जाने की चर्चा को भी नकारा जाना उचित न होगा! फिलहाल कुछ तथ्य जो अभी तक प्रकाश में आये हैं, वे पाठकों के समक्ष प्रस्तुत हैं ….
सूत्रों से यह भी पता चला है कि उक्त मार्क हास्पिटल समाचार लिखे जाने तक विधिवत पंजीकृत नहीं है फिर भी हास्पिटल स्वामी सीएमओ कार्यालय में त्रुप भिडाने की जुगत में ही नही है बल्कि उक्त हास्पिटल में बिद्यमान फार्मेसी व उचित पैथालोजी एवं उपकरण आदि नियमानुसार सुविधाएँ भी प्रतीत नहीं होती हैं जबकि फार्मेसी के बडे़ बडे़ बिलों के साथ साथ जीएसटी की भी वसूली की जा रही है जो भी प्रथम दृष्टया संदिग्ध ही दिखाई पड़ रही है। आश्चर्यजनक तो यह भी तथ्य है कि उक्त अस्पताल व डाक्टर के द्वारा मरीजों का रिकार्ड और अवैध वसूली के बिल भी सीएमओ के यहाँ प्रस्तुत करने में आनाकानी की जा रही है। क्योंकि सबका सब घालमेल प्रतीत हो रहा है।
पुलिस व सतर्कता विभाग के लिए भी एक महत्वपूर्ण मामला अप्रैल माह के तीसरे सप्ताह में बैक डोर से रात के अन्धेरे में अनेकों शव दो दिन तक चुपचाप से एम्बूलेंस पर लोड कर इधर उधर किये जाने की सच्चाई क्या है?
ज्ञात हो कि सीएमओ कार्यालय इसी प्रकार स्थानीय कैलाश हास्पिटल पर नियमों की अनदेखी और मरीजों की जान से खिलवाड़ एवं अवैध भारी भरकम बिलों की वसूली एवं हेल्थ इंश्योरेंश कम्पनियों को चूना लगाये पर चुप्पी भी गम्भीर कार्यवाही के बिषय नजर आ रहे हैं!
ज्ञात हो कि जैसे जैसे हमारी तहकीकात आगे बढ़ रही है बैसे बैसे ही इस तरह की लापरवाही और लूटखसोट के मामले प्रकाश में आते जा रहे हैं! ज्ञात हो कि कोरोना संक्रमित 72 वर्षीय राजपुर रोड निवासी सुलेखा सोंढी की मृत्यु का पूरा मामला भी इसी डाक्टर की भारी नेगलीजेंसी और अवैध बिल की वसूली का है। जिसकी शिकायत भी डीजीपी और डीएम को भेजी जा चुकी है। इन्हीं डाक्टर महाशय द्वारा वेंटीलेटर का भी शुल्क वसूला गया जबकि इस हास्पिटल में आईसीयू तक नहीं है। तथा एक अन्य मरीज से मात्र आठ दिनों में ही लगभग चार लाख रुपये की अनुचित कमाई भी की गयी।
क्या भाजपा की बिगडी़ छवि को सुधारने के उद्देश्य से हाल ही परिवर्तन कर बनाये गये साफ सुथरी छवि बाले कड़क उत्तराखंड के सीएम टीएसआर-2 जनता और जनजीवन से खिलवाड़ करने वाले ऐसे अस्पतालों और डाक्टरों व उन्हें संरक्षण देने वाले अधिकारियों पर कोई प्रभावी ठोस कार्यवाही करेंगे ताकि महामारी के दौर में लूटखसोट और जान से खिलवाड़ करने वालों को कडा़ सबक मिले!