नैनीताल। 26 जुलाई का दिन इतिहास के पन्नो में सुनहरे अक्षरों से दर्ज है इस दिन का सूरज जीत की किरण लेकर उदय हुआ था। 1999 में भारत व पाकिस्तान के बीच हुए इस युद्ध में देश के पांच सौ से अधिक जवान शहीद हुए थे।
1999 के इस युद्ध में 17 ब्रिगेड ऑफ द गार्ड्स रेजिमेंट के जबाज़ बेटे मूल रूप से अल्मोड़ा निवासी व वर्तमान निवासी नैनीताल रिडायर्ड सूबेदार भोलादत्त तिवारी भी हिस्सा रहें। भोलादत्त तिवारी बताते है कि 1999 में जब पाकिस्तानी सेना व हिंदुस्तानी सेना के बीच युद्ध लड़ा जा रहा था तो इस दौरान हालात बिगड़ने पर वह अपनी एक यूनिट के साथ कारगिल को रवाना हुए। जहां बजरंग पोस्ट पर चारों ओर फैली बर्फ के चादर औऱ दुश्मनों की गोलाबारी के बीच अदम्य साहस के परिचय देते हुए भारतीय सेना ने युद्ध लड़ा और जीत हासिल की।

भोलादत्त तिवारी ने युद्ध के दौरान अपनी यादें बताते हुए कहा कि उन्होंने कई दिनों तक भूखे प्यासे रहकर सिर्फ़ बर्फ को पिघलाकर पानी पिया लेकिन अपने हौसले को नहीं डगमगाने दिया, उनके इसी साहस व जज़्बे के चलते उन्हें इस युद्ध में जीत हासिल हुई। साथ ही बताते हैं कि करीब दो माह तक उनका अपने परिजनों से कोई संपर्क नहीं हुआ इसके बावजूद भी दिल में देशभक्ति का जज़्बा लिए युद्ध लड़ते रहें।
एक ओर जहां युद्ध में उनके कई साथी शहीद हो गए इसके बावजूद भी उन्होंने हार नहीं मानी औऱ लंबे संघर्ष के बाद युद्ध भूमि पर दुश्मनों को धूल चटाकर कारगिल युद्ध पर विजय हासिल कर ली।