पिटकुल के पूर्व जीएम (विधि)प्रवीन टंडन हुए बहाल, ऊर्जा सेल से किये गये सम्बद्ध!

नये मुख्य सचिव व चेयरमैन ऊर्जा के आते ही ये कैसी बहाली?

अगर गलत की गयी थी बरखास्तगी तो खामियाजा जनधन पर क्यों?

यह विद्युत निगम हैं या गुटबाजी और खेल के मैदान?

पिटकुल एमडी ने किया था बरखास्त और निवर्तमान अध्यक्ष/ मुख्य सचिव ने माडीफाई कर, कर गयीं बहाल!

क्या पिटकुल चेयरमैन से छिपाकर होती थी मनमानी?

बरखास्तगी का आदेश अभी भी पारदर्शिता की बेबसाईट से नदारद : ऊर्जा विभाग के पदचिन्हों पर पिटकुल

देहरादून। “नाक क्या कटी मुँह बन गया” उक्त चर्चित कहावत पिटकुल के महा प्रबंधक एवं कम्पनी सचिव प्रवीन टंडन पर लाटरी के साथ चरितार्थ होती तब नजर आयी जब उनकी बहाली का आदेश आज आया।
जनाब, यह देवभूमि है और यहाँ अगर धरती के भगवान ढूंढ़ने हैं तो कहीं और जाने की आवश्यकता नहीं बल्कि यहाँ यह कहना कोई अतिश्योक्ति न होगी कि ये देवतारूपी शासन में बैठे आला अफसर बडे ही दयालू और सहनशील हैं तभी तो पहले तो चुप बैठे तमाशा देखते रहे और नियुक्ति अधिकारी एमडी पिटकुल के द्वारा बरखास्त किए गये ग्यारह-ग्यारह तथाकथित चार्जशीट वाले पिटकुल के पूर्व महाप्रबंधक (विधि ) एवं कम्पनी सचिव रहे टंडन साहब की सेवा बहाली का 20 मार्च का आदेश 12 दिनों के अज्ञातवास से तब एकाएक प्रकट हुआ ज़ब मैडम 31मार्च को सेवानिवृत्त हो गयीं और नये मुख्य सचिव व अध्यक्ष, पिटकुल ने पदभार ग्रहण किया। उक्त आदेश महाशय जी की सवेतन सेवा बहाली का है, जो बर्माखास्तगी के आदेश को माडीफाई (उपांतरित) करते हुए प्रकट हुआ। देखिए बहाली आदेश…

सूत्रों की अगर यहाँ माने तो अब टंडन साहब को उस कार्यकाल की भी पूरा वेतन, भत्ता और लाभ मिलेंगे जिस दौरान वे या तो निलम्बित रहे या फिर ऐन-केन-प्रकरेण घर बैठे रहे हों भले ही विद्युत निगमों के दो मठाधीशों की गुटबाजी व राजनीति में चलते इनके द्वन्द युद्ध से लाखों और करोडों के जनधन की बर्वादी हुई हो, आखिर उस खामियाजे का जिम्मेदार कौन? वे जो आला अफसर चुपचाप सब मूकदर्शक बने देखते रहे और एक नायाब फरमान जारी करके चले गये?
इस सेवा बहाली के आदेश में साफ साफ कहा गया है कि सभी देयकों का भुगतान जोकि लगभग दो वर्षों का पूरा वेतन बनेता होगा अब पन्द्रह दिनों के अन्दर पिटकुल को करना होगा और महाशय अब ऊर्जा सेल में बैठ कर शासन के कार्यों का सम्पादन करेंगे।
सूत्र तो यह भी बता रहे हैं पिटकुल प्रबंधन के द्वारा टंडन को ग्यारह चार्जशीट दी गयीं थी जिनकी नोंक झोंक में शासन के द्वारा यूईआरसी के सदस्य विधि व प्रभारी चेयरमैन रहे पूर्व न्यायधीश गैरोला के द्वारा जांच कराई गयीं थी जिनमें से छः चार्जशीट का प्रूब होना बताया जा रहा है तथा पाँच चार्जशीट में संदेह का लाभ दिया गया था…! वहीँ दूसरी ओर 20 मार्च का कार्यालय आदेश सं. 1014 कुछ और ही कह रहा है!
गौर तलव बात यहाँ यह भी है कि यदि एमडी पिटकुल के द्बारा जारी वर्खास्तगी आदेश यदि गलत था तो इस खामियाजे की भरपाई पिटकुल के जनधन से क्यों? और अगर चार्जशीटों में लगे आरोप बर्खास्तगी के लिए पर्याप्त आधार थे तब चेयरमैन महोदया मूकदर्शक बनीं तमाशा किन कारणों और विवशताओं से देखती रहीं? जबकि स्व संज्ञान लेकर पिटकुल में चल रहे द्वन्द युद्ध में हस्तक्षेप किया जा सकता था, परंतु…?

हाँलाकि इस सम्बंध में पिटकुल प्रबधन व अधिकारियो से सम्पर्क कर जानकारी करने का प्रयास किया गया परंतु सभी अधिकारी कतराते ही नजर आये।
ज्ञात हो कि पारदर्शिता के नाम पर ऊर्जा विभाग के इन निगमों की बेवसाईडों को भी दूरुस्त नहीं रखा जाता है तभी तो टंडन की बर्खास्तगी का आदेश लगभग ढाई माह बाद भी प्रदर्शित नहीं हो रहा है।
देखना यहाँ गौरतलव होगा कि कडक व ईमानदार छवि वाले मुख्य सचिव व चेयरमैन पिटकुल ऐसे जनधन विरोधी प्रकरण पर अब क्या रुख अपनाते हैं?

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