देहरादून के स्वतंत्रता संग्राम का इतिहास” ग्रंथ का हुआ विमोचन

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देहरादून के स्वतंत्रता संग्राम का इतिहास” ग्रंथ का हुआ विमोचन

Dr RK Verna ki pustak ka vimochan

पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने रचियता डॉ. आर. के. वर्मा की लेखनी को बताया अमूल्य

1920 से आजादी मिलने तक के कालान्तर के 600 सैनानियों को संजोया गया है इसमें

20 वर्ष की कठिन तपस्या और मेहनत   में लिखा गया ये 700 पृष्ठीय ग्रंथ बनेगा, प्रेरणा

देहरादून। कोविड-19 के मद्देनजर आज एक प्रख्यात होटल के सभागार में विभिन्न प्रतिभाओं के धनी डॉ. आर के वर्मा द्वारा रचित ऐतिहासिक ग्रंथ “देहरादून के स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास” का विमोचन करते हुए प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री एवं एआईसीसी के महामंत्री व प्रभारी (पंजाब) हरीश रावत ने डॉ वर्मा की सराहना करते हुए कहा कि यह एक ऐसा ग्रंथ है जो आने बाली पीढ़ी के लिए एक शोध का ग्रंथ साबित होगा क्योंकि इसमें जितनी लगन और परिश्रम से हमें आजादी दिलाने बाले देहरादून जनपद के स्वतन्त्रता संग्राम सेनानियों के बारे में, उनके परिवार के बारे में सचित्र जो जानकारियाँ दी गयी हैं वे आने बाले समय मे पथप्रदर्शक के रूप में साबित होगी। श्री रावत ने उनके द्वारा रचित “देहरादून में आज़ाद हिन्द फौज” पुस्तक का भी स्मरण करते हुए कहा वे ईश्वर से प्रार्थना करते हैं कि उनकी लेखनी ऐसे खोज पूर्ण व मार्गदर्शक ग्रंथ लिखती रहे।

मुख्य अतिथि हरीश रावत ने अंत में सभी को दीपावली की शुभकामनाएं देते हुए डॉ वर्मा के परिजनों का भी आभार व्यक्त किया जो डॉ वर्मा की लेखनी में सहयोग करते रहते हैं।

समारोह में स्वर्गीय डॉ महावीर त्यागी की 90 वर्षीय सुपुत्री श्रीमती उमा त्यागी की भी गरिमामयी उपष्तिथि रही। समारोह की अध्यक्षता कर रहे जन्म से ही स्वतन्त्रता सैनानी व वरिष्ठ पत्रकार राम प्रताप बहुगुणा ने अपने बारे में बताया कि उनका तो जन्म ही स्वतन्त्रता सैनानी माता जी जब चुनार जेल में थी तभी वहीं हुआ और उन्होंने अपना मासूम बचपन जेल की सलाखों में ही बिताया। श्री बहुगुणा ने डॉ वर्मा की इस ग्रंथ की तपस्या का जिक्र करते हुए कहा कि ऐसे कर्मवीर योद्धा के रूप में मेहनत से लिखी गयी ये अमूल्यवान पुस्तक जो सरकार तो कोई बिरला ही लिख पाता।

मंचासीन पूर्व अध्यक्ष पिछड़ा वर्ग आयोग अशोक वर्मा ने भी अपने अग्रज डॉ वर्मा की निष्ठा और जी तोड़ मेहनत को सराहते हुए कहा कि ऐसी शिक्षाप्रद पुस्तकें प्रत्येक विद्यालय व पुस्तकालयों में सरकार को भिजवानी चाहिए। ये पुस्तक लगभग सात सौ पृष्ठों की है।
समाजसेवी एवं वरिष्ठ कांग्रेसी सुरेंद्र अग्रवाल जी सहित लेखक, समीक्षक सुभाष जौली, अभिलेखागार एवम पुरातत्व संग्राहलय के पूर्व निदेशक ललिता प्रसाद, मुरलीधर सकलानी, सुनील गुप्ता सहित अन्य वक्ताओं ने भी अपने विचार रखे।

इससे पूर्व डॉ वर्मा विभूतियाँ द्रोण की और जर्नलिस्ट डाइरेक्टरी जैसे महत्वपूर्ण पुस्तकें भी प्रकाशित कर चुके हैं और अभी एक महत्वपूर्ण पुस्तक शीघ्र ही और प्रकाशित करने बाले हैं। डॉ वर्मा नागरिक परिषद के संस्थापक और 1970 समाचार पत्र के संपादक भी हैं।

समारोह का सुन्दर संचालन समाजसेविका आशा मनोरमा शर्मा ने किया और शहर के तमाम पत्रकारों गणमान्य लोंगों ने सहभागिता की।

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