सीएम व डीएम साहब, राष्ट्रीय आपदा में क्यों इस झूटे सैनेटाईजेशन से पाप के भागीदार बन रहे हो !

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सीएम व डीएम साहब, राष्ट्रीय आपदा में क्यों इस झूटे सैनेटाईजेशन का छिड़काव कराकर पाप के भागीदार बन रहे हो?

राष्ट्रीय आपदा की इस घडी़ में भी नहीं चूक रहे मेयर व उनके भ्रष्ट अधिकारी? पार्षदों की चुप्पी भी संदिग्ध!

शहर में भी खुलेआम बिक रहा घटिया और नकली सैनेटाईजर महँगे दामों पर! अधिकारी कहाँ और सोये क्यों?

सरकारी विभागों, निगमों व प्राधिकरणों में भी जम कर खेला जा रहा है खेल, मची है लूट?

नगर निगम द्वारा सैनेटाजेशन में प्रयोग किया जा रहा सैनेटाईजर या जनता के साथ छलावा?

सप्ताह में दो दिन जिसके लिये सीएम व डीएम ने थोपी जनता पर, उसका मकसद यही है क्या?

क्या सीएम और डीएम का भी हिस्सा है लूट खसोट में?

क्या कभी जाँचने और परखने की, की गई कोशिश?

क्या होगी राष्ट्र विरोधी अपराध की कार्यवाही मेयर व नगर निगम अधिकारियों पर?

क्यों नगर में इस जाली सैनेटाईजर से फैलवा रहे हो चर्म रोग और बीमारियाँ?

अपनी नहीं जनता की करो चिन्ता, तब कहलाओगे वफादार!

क्यों नाश कर रहे हो, बिल्डिंगों की दीवारों से?

क्या दिखावा और छल जनता से जरूरी है?

ऐसे तो, थमने से रहा कोरोना कहर!

(पोलखोल की बिशेष पड़ताल)

देहरादून। पिछले सप्ताह से प्रदेश की जनता के खैर ख्वाहा मुखिया TSR द्वारा दून में बढ़ते कोरोना संक्रमण को दृष्टिगत शनिवार और रविवार को दून बंदी और सैनेटाईजेशन की घोषणा की गई थी और उसे इस नगर की भोली भाली जनता पर डीएम के आदेश से जबरन थोप भी दिया गया। ज्ञात हो कि आज बंदी के दूसरे सप्ताह का पहला दिन है और नगर निगय के वही ढाक के तीन पात।

दूनवासियों ने इस घोषणा और आदेश का अनुपालन भी किया और आज भी अपने दून को कोरोना मुक्त कराने की ललक में है। परन्तु उसे क्या पता कि जिस उच्च क्वालिटी के सैनेटाईजर का छिड़काव शहर में नगर निगम द्वारा कराया जाना चाहिए वह तो लाखों का सैनेटाईजर पहले ही कागजों में और छिड़काव के नाम पर गुल खिला चुका है, भ्रष्टाचार उसे पहले ही गटक चुका है!

यहाँ अगर सूत्रों की यह भी माने की इस सैनेटाईजर में एक और कमाल झूठ को सच बनाने का कर दिखाया जा रहा है जिसमें वीवीआईपी, राजनेता, चटक नेता और आला अधिकारियों व सरकारी आवासों पर जो सैनेटाईजर छिड़का जा रहा है वह कुछ, और जो जनता के लिए नगर की मात्र कुछ गलियों व सड़कों पर मात्र दिखावा स्वरूप छिड़का जा रहा है वह केवल पानी और उसमें मिला घटिया ब्लीच पाउडर मात्र ही छिड़कवाया जा रहा है।
ज्ञात हो कि पिछले सप्ताह भी नगर के सभी बार्डों और गलियों व सड़कों में सैनेटाईजेशन न कराये जाने का दर्द जनता में हैं, अब इस सप्ताह का भी भगवान ही मालिक होगा क्योंकि पार्षद भी तो इसी घोटाले में सम्मिलित दखाई पड़ रहें हैं, अगर वे सजग और निष्कपट होते तो नकली सैनेटाईजर की जगह उच्चकोटि का सैनेटाईजर का छिड़काव करा, कोरोना महामारी से जनता को बचाने में सार्थक भूमिका निभाते!

यही नहीं अगर घरों में बैठे ये राजनेता और आलाअधिकारी जो इस समय वीडियो कानफ्रेसिंग के माध्यम से सत्ता व शासन चला रहे हैं, खुद को कोरोना से इतना अधिक बचाते हुये आडम्बर कर ढोल पीटने में व्यस्त हैं अगर जरा सा भी धरातल पर जाकर असलियत को परखने और देखने की अचानक बिना ढोल पीटे छापामार नीति के तहत अमल में लाये तो ही शायद कुछ जनता का भला हो सकेगा और राष्ट्रीय आपदा के धन का बंदरबाँट रुक सकेगा! वरना फिर हवाहवाई की जाँच हवा में उड़ चुके घोटालों की हमेशा की तरह बिना लाभ के कराते रहना!

प्रदेश में केवल नगर निगम ही नहीं, सरकारी कार्यालयों और निगमों व प्राधिकरणों में भी सैनेटाईजेशन के नाम पर हो रहे हैं लाखों लाखों के बारे न्यारे। घटिया स्तर के सैनेटाईजर और साबुन, कास्टिक व ब्लीच को फर्जी लेवल वाले कन्टेनर और डिब्बों एवं बोतलों में साँठगाँठ के तहत जा रहा है कई गुनी मात्रा दिखाकर की जा रही है खरीद?

उल्लेखनीय यह भी है कि सरकारी मशीनरी के निकम्मेपन और अनदेखी व उदासीनता के चलते ही बाजार में घटिया और निम्न स्तर का अथवा नकली सैनेटाईजर महँगे दामों पर धड़ल्ले से बिना किसी खौफ के बिक रहा है।

क्या TSR सरकार व जिले के जिलाअधिकारी राष्ट्रीय आपदाकाल में जनजीवन से खिलवाड़ करने व राहत के नाम पर लूटखसोट मचाने वालों पर कोई गुरिल्ला नीति अपनाकर ठोस कार्यवाही जनहित में करेगी या खुद एसी रूम में बैठ कर उपदेश और भाषणबाजी ही करती रहेगी? तथा जनता के साथ वफादारी को ढोल पीटते रहेगी? क्या खुद को बचाने का नाटक खत्म कर यथार्थ में ड्यूटी और जनसेवा करेगी और जनजीवन को बचाने की सार्थक पहल करेगी!

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