उत्तराखंड कोरोना : 7 नये मरीज मिले अब संख्या 160 हो गयी है

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उत्तराखंड कोरोना : 7 नये मरीज मिले अब संख्या 160 हो गयी है

Good Morning की जगह अब Happy Corona बोलकर ही जीना पडे़गा : सावधानी है रखना

देहरादून। प्रधानमंत्री मोदी ने पहले कहा था कि कोरोना को नहीं है बुलाना तथा जान है तो जहान है। फिर कहा जो जहाँ है वहीं रहे और उसके बाद कहा कि जान भी और जहान भी। किन्तु राज्य सरकारों ने अपने अपने प्रदेशों में रह रही लाखों और करोंडो़ स्थाई नागरिकों की परवाह किये बिना ही मात्र कुछ प्रवासियों के लिए इनमें जागे एकाएक प्रेम और ऊपर से आधी अधूरी तैयारी तथा बचकाने निर्णयों के साथ बुलाए गये हमारे ही प्रवासी भाइयों को यहाँ बुलाकर जहाँ उन्हें न इधर का रखा और न ही उधर का, जहाँ वे कैसे न कैसे रह तो रहे थे और  सुरक्षित भी थे। अगर भूखे और प्यासे थे तो भी उनके लिए ये सरकारें चाहतीं तो आपस में सामंज्स्य बिठाती तथा उनकी आवश्यकताओं की पूर्ति वहीं पूरी करवा सकती थी, परन्तु नहीं! सरकारी खजाने की वरवादी करके जनता को खतरे में डालने वाले खरों के इन खिलाडि़यों ने अपनी मनमानी कर ही डाली।

शायद प्रदेशों के मुखियाओं और इनकी व इनके अत्यंत तथाकथित कुछ मुँह लगे आला अधिकारियों और थूक में पकोडे़ तलने वाले छुटभैयये सत्ताधारी नेताओं की ही सलाह रही होगी जो हमेशा ऐनकेन प्रकरेण खाने कमाने और लूट की फिराक में ही रहते हैं तथा उन्हीं की ही घातक सोच रही होगी या फिर इसके पीछे इनकी घडि़याली और दिखावटी, घटिया राजनीतिक ऊथल पुथल ही होगी? खैर जो भी सोच रही हो खामियाजा आज इनकी करनी का सभी को भुगतना पड़ रहा है। प्रदेशों में लगभग हर जगह लाकडाउन -3 तक पूर्ण रूप से समाप्त ही हो चुका था अब ये कोरोना और अधिक गति से वापस आ गया व आता ही जा रहा है तथा वे भी क्वारंटीन हो गये और कहीं के नहीं रहे जिन्तहे घर वापसी की ललक थी, अब वे भी यही कहते नजर आ रहे कि इससे तो अच्छे वहीं थे।

परिणाम अब सभी के सामने तेजी से आ रहे हैं। इस जिद्दोजहद में एक सवाल का जबाव फिर भी नहीं मिल रहा है कि आखिर उस जनता ने इनका क्या बिगाडा़ था जिसने अनुशासनवद्ध रहकर धैर्य के साथ मात्र एक आवाह्न पर लगभग 40-45 दिन की तपस्या की थी। इस तपस्या को भंग करने का अधिकार इन अपरिपक्व राज्य सरकारों को आखिर किसने दिया। अगर राष्ट्रीय आपदा के समय केन्द्र की नहीं मान रहीं थी इन पर भी तो डिजास्टर मैनेजमेंट एक्ट के तहत कार्यवाही हो सकती थी और राष्ट्रपति शासन लगाया जा सकता था!

जनता आज पछता रही या फिर कोसते हुये कह रही कि इससे तो वेहतर होता आज की ही तरह शुरू से ही हमें और इन्हें हमारे ही हाल पर छोड़ देते अथवा फिर देश के प्रधानमंत्री की उस दूरगामी सोच और योजना का ये राज्य सरकारें भी अनुपालन करती, जिसे पूरी दुनिया आज मान रही है, अच्छा, नहीं होता क्या? अब तो भाई हम सभी को

Good Morning और नमस्कार की जगह अब Happy Corona बोलकर ही जीना पडे़गा तथा सावधानी घटी, दुर्हैघटना घटी के साथ…!

परिणाम तेजी से आने ही लगे हैं, लो फिर भुगतो ….

देर रात आई रिपोर्ट ने आज सुबह सुबह ही हड़कम्प मचा दिया। चम्पावत जनपद में एक साथ 7 नये कोरोना पाजिटिव की पुष्टि सीएमओ डा. खंडूरी ने की है।

देहरादून में मिले  1 और व्यक्ति (?) को अगर जोड़ लें तो यह संख्या 161 मानी जानी चाहिये। किन्तु इसकी अधिकारिक पुष्टि नहीं हो सकी है।

अब तक कोरोना संक्रमण से बचा चम्पावत प्रवासियों के लौटने के साथ ही कोरोना की चपेट में आने लगा है।

लाॅकडाउन में मिली छूट के बाद यहाँ भी बाहरी प्रदेशों से आने वाले का क्रम जारी है।

जनपद की सीमा पर स्थित जगबूढ़ा पुल पर बाहर से आने वालों की हो रही है स्क्रीनिंग।

सातों को चंपावत जिला अस्पताल में भर्ती किए जायेंगे।

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