विजिलेंस ऑफिस के पास बड़ी मस्जिद में छिपे हो सकते हैं तब्लीगी जमात के कुछ कोरोना संदिग्ध
सम्प्रदाय विशेष के क्षेत्रवासियों की भीड़ ने आशा कार्यकत्रियों व स्वास्थ्यकर्मियों से दुस्साहस की घटना को दोहराने का किया असफल प्रयास
पटेलनगर पुलिस द्वारा मामले को छिपाने की कोशिश
(सुनील गुप्ता की खास पड़ताल)
देहरादून। तब्लीगी जमात से लौटे 14 कोरोना संदिग्ध देहरादून में कारगी बंजारावाला क्षेत्र में विजिलेंस ऑफिस के निकट बड़ी मस्जिद में लुप्त बताये जा रहे हैं। उक्त संदिग्धों के बारे में पता लगाने हेतु स्वास्थ्य विभाग व एनएचआरएम की आशा कार्यकत्रियां जब इस क्षेत्र में पहुंची तो इनसे यहां के क्षेत्रवासी जो एक सम्प्रदाय विशेष के हैं, किसी ऐरा नामक स्कूल के प्रिंसिपल आदि के कहने पर इकठ्ठा होकर महिला व पुरूषों की भीड़ ने इन आशाओं को घेर लिया और उनके सरकारी कार्य में बाधा पहुंचाते हुये उनसे दुर्व्यवहार करने पर आमादा हो गये। यह भी बताया जा रहा है कि वर्दीधारी चार आशा कार्यकत्रियां अपनी आशा फेसिलेटेटर व सीएचओ के सुपरविजन में सर्वे करने आज दोपहर करीब 11 बजे क्षेत्र में पहुंची और सरकार द्वारा जारी पम्पलेट दरवाजों पर चिपका रही थी तथा घर में किसी बीमार की जानकारी लेकर सहायता की बात कर रही थी तभी उक्त स्कूल का प्रिंसिपल आदि ने इन आशा वर्करों से दुर्व्यवहार करने व क्षेत्र से भाग जाने के लिये मजबूर किया और धमकाया कि तुम लोग झूठ बोलकर एनआरसी का सर्वे कर रहे हो हम आप लोगों को कोई कागज नहीं दिखाएेंगे और न ही जानकारी देगें, चुपचाप यहां से चले जाओ। दुर्व्यवहार व मौके की स्थिति को भांपते हुये आशा कार्यकत्रियों ने अपने स्वास्थ्य विभाग के डीपीएम व डॉ प्रतीक थापा को सूचना दी और मदद मांगी।

यह भी बताया जा रहा है कि मौके पर दो पुलिस कर्मी व एक दरोगा भी पहुंच गये थे परन्तु विडम्बना यह है कि हमेशा की भांति पुलिस के कुछ लोग अपनी लचर कार्यप्रणाली से मौके की नजाकत और भविष्य में घटने वाली किसी अप्रत्याशित व अप्रिय घटना की संजीदगी को न समझकर संगीन मामलों को भी मौके पर ही रफा-दफा करने की गलतियां कर बैठते हैं जो बाद में विकराल रूप लेकर समाज व कानून व्यवस्था के लिये मुसीबत बन जाती है।
बताया तो यह भी जा रहा है कि इस बड़ी मस्जिद से संबंधित 14 लोग तब्लीगी जमात से वापस आये हैं, जिनके कोरोना संदिग्ध व कोरोना कैरियर होने की पूर्ण आशंका व संभावना बनी हुई है। बताया तो यह भी जा रहा है कि इन जमातियों में से कुछ लोग अभी भी क्षेत्र में ही अंडरग्राउंड हो रखे हैं और कुछ को कोरेनटाइन कर दिया गया है।
उल्लेखनीय है कि उक्त घटना की छोटी से वीडियो देहरादून में भी भयावह स्थिति के अलार्म का संकेत दे रही है तथा गत दिवस स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं व डॉक्टरों के साथ देश के कई जगहों पर घटित हुई घटनाओं से उत्तराखंड पुलिस को सबक लेना चाहिए और गम्भीरतापूर्वक कड़ी कार्यवाही करनी चाहिए ताकि दुस्साहस की पुर्नरावत्ति न हो और कोरोना जैसे संकटों को बढ़ावा न मिले जो समाज के लिये दुखदायी बने। इस चिंगारी को छिपाने की नहीं इसकी संजीदगी को इस समय समझने व कार्यवाही की आवश्यकता है! वैसे इस मामले की कोई एफआईआर नहीं लिखाई गई है, फिर भी इस मामले पर देश हित में स्वतः संज्ञान की आवश्यकता भी प्रतीत होती है।
यहां यह भी उल्लेखनीय है कि उक्त घटना की जानकारी जब हमारे ब्यूरो चीफ सुनील गुप्ता ने शाम करीब 6 बजे पुलिस उप महानिरीक्षक/वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक व नगर पुलिस अधीक्षक एवं सम्बन्धित क्षेत्रधिकारी से चाही तो सभी अनभिज्ञ नजर आये और थाना पटेलनगर ने तो सत्यता को छिपाते हुये किसी भी ऐसी घटना व दुस्साहस के होने से इंकार कर दिया तथा थाने में उपस्थित दिवस अधिकारी उपनिरीक्षक ने फोन पर बात करना भी उचित नहीं समझा। हांलाकि पुलिस उप महानिरीक्षक/ वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक व नगर पुलिस अधीक्षक ने कहा कि पूरे मामले पर कड़े एक्सन की भी बात कही है।