कल देर शाम विफल हो गयी थी शासन और हड़ताली संगठनों की वार्ता!
रात्रि 12बजे से अधिकांश संगठन व ऊर्जा कर्मी व अभियंता गये हड़ताल पर!
उपनल एवं एक अन्य ऊर्जा संगठन हड़ताल से चल रहा है परोक्ष रूप से अलग!
क्या वास्तव में अंधकार में डूब जायेगा अब ऊर्जा प्रदेश?
पीने के पानी और स्वास्थय सेवाओं पर भी पडे़गा सीधा प्रमाव!
क्या विगत चार वर्षों से मामले को ठण्डे बस्ते रखने और इस स्थिति की नौवत लाने वाली वाली तथाकथित जिम्मेदार पूर्व सचिव ऊर्जा पर भी होगी कोई कार्यवाही?
ऊर्जा संकट के समय क्या सरकार जनहित और प्रदेशहित का रखेगी ध्यान या फिर डिप्लोमेसी और लिंगरआॅन पालिसी के शानोशौकत दिखायेगें ऊर्जा मंत्री?
क्या खुद वार्ता कर हड़ताल को समाप्त कराने का प्रयास करेंगे डा. हरक सिंह रावत?

देहरादून। ऊर्जा विभाग की पूर्व घोषित हड़ताल बीती रात्रि से प्रारम्भ हो गयी। सम्पूर्ण उत्तराखंड के अधिकांश ऊर्जा कर्मी, सुपरवाईजर, अभियंता व कर्मचारी कल देर शाम वार्ता विफल हो जाने के कारण हड़ताल पर चले गये हैं। उत्तराखंड जल विद्युत निगम के अधिकारियों, अभियंताओं और कर्यचारियों के हड़ताल पर चले जाने से विद्युत निर्माण बंद हो गया है। ऊर्जा संगठनों के नेताओं ने यह भी बताया कि रात्रि 12 बजे से ऊर्जा उत्पादन बंद हो गया और पावर हाऊसों की टरबाईनें ठप्प हो गयीं।
उन्होंने यह भी बताया कि जो एक आध संगठन और उपनल कर्मी अभी उनके साथ नहीं हैं उनके अधिकांश सदस्य हमार साथ हैं तथा इक्का दुक्का छुटभैइये नेता झूठी और छलावे बाली चाटुकारिता में कर्मचारियों के हितों से विमुख होकर अनुचित भूमिका निभा रहें हैं जबकि उन्हें ज्ञात है कि विगत चार वर्षों से शासन और सरकार उनके साथ छलावा करती आ रही है और झूठे आश्वासन देती आ रही है।
हड़ताली अनेकों नेताओं का मानना है कि शासन की फूट डालो, राज करो की नीति में अब हम नहीं आयेंगे और जब तक हमारी सभी माँगे पूर्ण नहीं हो जाती तब तक हड़ताल जारी रहेगी!
देखना यँहा गौर तलब होगा कि धामी सरकार अपने 20 दिन के कार्यकाल के भीतर की पहली इस विषम परिस्थितियाँ उत्पन्न करने बाली हड़ताल को सौहाद्रपूर्ण वातावरण में समाप्त करायेगी अथवा फिर एश्मा जैसे बृह्म्मास्त्र का प्रयोग करेगी?