नैनीताल। मंसूरी नगर पालिका द्वारा ईको पर्यटक शुल्क धांधली मामले में सरकार फंस गयी है। उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने दोषियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं किये जाने के मामले में गंभीर रूख अख्तियार करते हुए प्रदेश के मुख्य सचिव एसएस संधु से जवाब तलब किया है।
मुख्य न्यायाधीश विपिन सांघी और न्यायमूर्ति राकेश थपलियाल की युगलपीठ में देहरादून की मैसर्स चौधरी ट्रेडर्स की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई हुई। याचिकाकर्ता की ओर से कहा गया कि मंसूरी नगर पालिका द्वारा देहरादून-मंसूरी रोड पर कई वर्षों से कोल्हू खेत के पास ईको पर्यटक शुल्क वसूला जा रहा है।
इस मामले में नगर पालिका और ठेकेदार आपसी मिलीभगत कर सन् 2018 से सरकार को चूना लगा रहे है। याचिककार्ता की ओर से आगे कहा गया कि नगर पालिका द्वारा विभिन्न शासनादेश और अधिप्राप्ति नियमावली का उल्लंघन कर हर साल दो प्रतिशत की बढ़ोतरी एक ही व्यक्ति को शुल्क वसूली का ठेका आवंटित किया जा रहा है।

पहली बार सन् 2018 में नवीन कुमार अग्रवाल नामक व्यक्ति को ठेका आवंटित किया गया। तब से लेकर आज तक धांधली कर यह ठेका एक ही व्यक्ति को दिया जा रहा है।
जिला प्रशासन की ओर से वर्ष 2022 में की गयी जांच में भी धांधली की पुष्टि हुई है। देहरादून की जिलाधिकारी सोनिका की ओर से पिछले साल 23 दिसंबर, 2022 को अपर मुख्य सचिव को इस मामले में पत्र लिखकर कार्रवाई की मांग की गयी लेकिन आज तक कुछ नहीं हुआ।
अंत में अदालत ने इस प्रकरण को गंभीरता से लेते हुए मुख्य सचिव एसएस संधु को अगली सुनवाई पर व्यक्तिगत रूप से जवाबी हलफनामा दायर करने को कहा है।
अदालत ने अपने आदेश में स्पष्ट उल्लेख किया है कि सरकार को इस प्रकरण में कोई स्थगन जारी नहीं किया जायेगा। इससे साफ है कि सरकार इस मामले में फंस चुकी है और वह अदालत के शिकंजे से बच नहीं सकती है। मुख्य सचिव को हर हाल में 21 अगस्त तक जवाब दाखिल करना ही होगा।