तीन दिवसीय शहरी वानिकी कार्यशाला का सफल आयोजन, दिल्ली में सरकारी शिक्षक, कॉर्पोरेट व NGO प्रतिनिधियों ने लिया भाग – Polkhol

तीन दिवसीय शहरी वानिकी कार्यशाला का सफल आयोजन, दिल्ली में सरकारी शिक्षक, कॉर्पोरेट व NGO प्रतिनिधियों ने लिया भाग

तीन दिवसीय शहरी वानिकी कार्यशाला का सफल आयोजन महत्मा गांधी जलवायु परिवर्तन नियंत्रण संस्थान, दिल्ली में सरकारी शिक्षक, कॉर्पोरेट व NGO प्रतिनिधियों ने लिया भाग

नई दिल्ली, 20 जून 2025 — महात्मा गांधी जलवायु परिवर्तन नियंत्रण संस्थान (MGICCC), दिल्ली सरकार द्वारा पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय, भारत सरकार के संरक्षण में “शहरी वानिकी और शहरी क्षेत्रों में जीवन की गुणवत्ता पर इसके प्रभाव” विषय पर तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यशाला का आयोजन 18 से 20 जून के बीच किया गया। इस कार्यशाला में सरकारी शिक्षक, कॉर्पोरेट क्षेत्र से जुड़े प्रतिनिधि तथा विभिन्न गैर-सरकारी संगठनों के सदस्य शामिल हुए।

कार्यक्रम का उद्देश्य प्रतिभागियों को शहरी वानिकी के महत्व, सतत शहरी विकास और जलवायु परिवर्तन के प्रति समाज को अधिक जागरूक और सक्षम बनाना था। कार्यक्रम का शुभारंभ श्री ईश्वर सिंह, पूर्व प्रमुख मुख्य वन संरक्षक (IFS), द्वारा दीप प्रज्वलन के साथ हुआ। उद्घाटन सत्र में श्री अंकित कुमार (IFS), वन संरक्षक ने स्वागत भाषण प्रस्तुत किया।

कार्यशाला के दौरान कई प्रमुख विशेषज्ञों ने शहरी वानिकी के विविध पहलुओं पर चर्चा की। इनमें शामिल रहे:

  • डॉ. अजय कौशिक (डीडीटीडीसी)
  • डॉ. आर.के. सापरा (IFS)
  • प्रो. प्रद्युत भट्टाचार्य (जीजीएसआईपी विश्वविद्यालय)
  • डॉ. अनिल कुमार (पूर्व निदेशक, पर्यावरण विभाग)
  • डॉ. अजय कुमार (NIT दिल्ली)
  • श्री निशीथ सक्सेना (IFS)

सत्रों में शहरी हरियाली की भूमिका, जैव विविधता, डिज़ाइन और प्रबंधन, आर्थिक लाभ तथा जनस्वास्थ्य पर सकारात्मक प्रभाव जैसे विषयों पर चर्चा हुई। प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों ने गढ़ी मंडू अर्बन फॉरेस्ट और MGICCC परिसर का दौरा कर व्यावहारिक अनुभव भी प्राप्त किया।

कार्यक्रम के अंतिम दिन योग सत्र का आयोजन हुआ तथा समापन समारोह में सभी प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र वितरित किए गए। संस्थान के निदेशक श्री सौरभ शर्मा (IFS) एवं उपनिदेशक श्री अंकित कुमार (IFS) ने समापन भाषण दिया और प्रतिभागियों के योगदान की सराहना की।

यह कार्यशाला MGICCC की उस प्रतिबद्धता को दर्शाती है जिसमें वह शिक्षा, जनभागीदारी और पर्यावरणीय नेतृत्व को बढ़ावा देकर जलवायु संकट का समाधान खोजने के लिए सतत प्रयासरत है।

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