देहरादून में माइनर हुए बेलगाम, 666 फीसदी बढ़े चालान, ड्रंक ड्राइविंग में 274% की बढ़ोत्तरी – Polkhol

देहरादून में माइनर हुए बेलगाम, 666 फीसदी बढ़े चालान, ड्रंक ड्राइविंग में 274% की बढ़ोत्तरी

उत्तराखंड की राजधानी में ट्रैफिक नियमों के उल्लंघन की लोगों में होड़ मची हुई लगती है. देहरादून शहर की ट्रैफिक समस्या को लेकर एडीजी अपराध एवं कानून व्यवस्था वी मुरुगेशन ने बैठक ली. तब पता चला कि यातायात नियमों का उल्लंघन करने पर चालान 42.40 प्रतिशत बढ़ गए हैं. हाल ये है कि शराब पीकर वाहन चलाने वालों के चालान में 274 प्रतिशत वृद्धि हुई है. वहीं नाबालिग वाहन चालकों के चालान में 666 प्रतिशत की वृद्धि हुई है

एडीजी अपराध एवं कानून व्यवस्था ने जनपद के सभी राजपत्रित अधिकारियों के साथ बैठक की. बैठक में फोर्स की कमी के संबंध में बताया गया. साथ ही साल 2017 से अब तक जूलुस, रैली, धरना प्रदर्शन, मेले और त्यौहारों के बढ़ते आयोजनों के बीच फोर्स की कमी देखने को मिली. बैठक में बताया गया कि देहरादून जिले के नगर क्षेत्र में लगभग 12 लाख वाहन रजिस्टर्ड हैं. इस कारण भी लगातार मार्गों पर यातायात का दबाव बना रहता है.

बैठक में बताया गया कि देहरादून जनपद के नगर क्षेत्र में लगभग 12 लाख वाहन रजिस्टर्ड हैं. जिसके कारण लगातार मार्गों पर यातायात का दबाव बना रहता है. जनपद में 20 बॉटल नेक्स को पुलिस ने चिन्हित किया गया है, जहां यातायात व्यवस्था के संचालन के लिए अतिरिक्त पुलिस बल की आवश्यकता है. जनपद के आन्तरिक मार्गों पर पीडब्ल्यूडी, यूपीसीएल, गेल और जल संस्थान आदि विभागों द्वारा भी अलग-अलग समयों पर निमार्ण कार्य किए जाते हैं, जिसके कारण भी मार्गों पर यातायात का अत्यधिक दबाव रहता है.

वहीं यातायात व्यवस्था में सुधार के लिए जनपद पुलिस ने नगर क्षेत्र के 12 मुख्य मार्गों पर फड़, ठेलियों को प्रतिबंधित करने के लिए नगर निगम से नो-वेन्डिंग जोन घोषित कराया है. जनपद में पहले से चिन्हित 52 ब्लैक स्पॉट पर पुलिस ने दुर्घटनाओं में कमी लाने के लिए सुधार किए हैं. जिससे संख्या को 20 तक सीमित कर लाया गया है. इसमें अभी भी सुधार करने की कार्रवाई चल रही है.

बताया गया कि मसूरी विकास प्राधिकरण के साथ मिलकर 241 पार्किंग स्थल को भी चिन्हित कर पार्किंग के आम जनता के लिए प्रयोग के कार्रवाई चल रही है. साथ ही पुलिस ने यातयात नियमों का उल्लंघन खासकर ड्रंक एंड ड्राइव, रैश ड्राइविंग, ओवर स्पीडिंग आदि में पिछले साल की तुलना में इस साल दो से तीन गुनी अधिक कार्रवाई की. इसका परिणाम सड़क दुर्घटनाओं में आई 18 प्रतिशत की कमी के रूप में दिखाई दिया है.

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