(पोलखोल ब्यूरो)


देहरादून / नैनीताल। विगत सप्ताह तकनीकी योग्यता को लेकर पी सी ध्यानी को एमडी पिटकुल की नियुक्ति को गलत ठहराये जाने सम्बंधी याचिका पर जारी आदेश को ठेंगा दिखा रहे हठधर्मी प्रमुख सचिव ऊर्जा आर. मीनाक्षी सुंदरम आदि के विरुद्ध आरटीआई एक्टिविस्ट अनिल चंन्द्र बलूनी आदि के द्वारा प्रस्तुत याचिका की सुनवाई में न्यायमूर्ति आलोक वर्मा के द्वारा कडा रुख अपनाते हुये जो आदेश पारित किया गया उसको ठेंगा दिखाने और अत्यंत चालाक चतुर एक आईएएस की सूझबूझ ने अपने को 19 मार्च की जबाबदेही से बचाने के लिए जो हथकंडा अपनाया और आनन-फानन में कार्यालय ज्ञाप जारी किया है उसे जितना भी काबिले तारीफ कहा जाए कम होगा!

प्रमुख सचिव सुंदरम की इस चतुराई ने उत्तराखंड के राज्यपाल की सहर्ष स्वीकृति को भी सबालिया निशानों में लाकर खडा कर दिया है यही नहीं उच्च न्यायालय के आदेश से एक दिन की पहले की डेट और एकाएक इस ज्ञाप के प्रकटन से गले की फाँस उडती पडती दिखाई पड रही है। मजेदार बात यहाँ यह भी नजर आ रही है कि जो पेशबंदी की गई है वह उच्च न्यायालय को ठेंगा दिखाने जैसा भी माना जा रहा है।
यदि यह आदेश पहले ही जारी हो चुका था तो उच्च न्यायालय में अवमानना पिटीशन तो के समक्ष एमडी के प्रभार हटाये जाने के तथ्य को उजागर करने से क्यों कतराया शासन?
क्या यह उत्तराखण्ड के राज्यपाल की सहर्ष स्वीकृति की गरिमा को ठेस पहुँचानें वाला आला अफसर एवं प्रमुख सचिव आर मीनाक्षी सुंदरम की हडबडाहट और घबडाहट तथा हाई कोर्ट के न्यायमूर्ति आलोक वर्मा के CLCON No. 54 of 2026 आज के आदेश को धत्ता बताने के इरादे से उठाया गया कदम नहीं है या फिर ज्यादा होशियारी का नमूना⁉️
क्या धाकड धामी अपने ऐसे नायाब नवरत्न के अद्भुत कारनामे पर संज्ञान लेंगे?
