हर साल विधानसभा बजट सत्र के दौरान राज्य सरकार की ओर से वर्तमान वित्तीय वर्ष का लेखा-जोखा प्रस्तुत किया जाता है. जिसके तहत सदन की कार्रवाई के दौरान आर्थिक सर्वेक्षण रिपोर्ट सदन के पटल पर रखी जाती है. जिसमें राज्य की जीएसडीपी, प्रति व्यक्ति आय, कर्ज में तमाम विभागों की स्थिति का ब्यौरा समाहित होता है.
इसी क्रम में आर्थिक सर्वेक्षण रिपोर्ट में राज्य सरकार को तमाम सुझाव भी दिए जाते हैं. इसी क्रम में आगामी विधानसभा बजट सत्र के दौरान सदन में पेश होने वाले आर्थिक सर्वेक्षण रिपोर्ट 2025-26 में तमाम सुझाव भी दिए गए हैं. जिसके तहत, अगर कुछ सेक्टर में राज्य सरकार गवर्नमेंट एक्सपेंडिचर को बढ़ाती है. उससे जीएसडीपी ग्रोथ दर बढ़ने की संभावना है.
नियोजन विभाग के प्रमुख सचिव आर मीनाक्षी सुंदरम ने कहा आगामी वित्तीय वर्ष 2026-27 में जीएसडीपी ग्रोथ 8.2 फीसदी दर से होने की संभावना है. वर्तमान वित्तीय वर्ष में जीएसडीपी में सेक्टर वाइस शेयर की बात करे तो सबसे अधिक शेयर मेन्यूफेक्चरिंग सेक्टर है. जीएसडीपी में मेन्यूफेक्चरिंग सेक्टर की हिस्सेदारी 26.2 फीसदी, ट्रेड होटल्स एंड रेस्टोरेंट्स की हिस्सेदारी 18.8 फीसदी और कंस्ट्रक्शन सेक्टर का 10.6 फीसदी है.
उन्होंने बताया आगामी वित्तीय वर्ष में जीएसडीपी ग्रोथ 8.2 फीसदी दर से होने की उम्मीद है. अगर गवर्नमेंट एक्सपेंडिचर को कुछ सेक्टर में बढ़ाया जाता है. जीएसडीपी ग्रोथ दर बढ़ सकती है. इसको लेकर आर्थिक सर्वेक्षण रिपोर्ट में सुझाव भी दिए गए हैं.
दरअसल, वित्तीय वर्ष 2025-26 में फिस्कल डेफिसिट, कुल जीएसडीपी का 3.3 फीसदी था. इसी तरह पब्लिक डेट यानी राज्य का कर्ज कुल जीएसडीपी का 27.9 फीसदी रहा है. ऐसे में आगामी वित्तीय वर्ष 2026-27 में फिस्कल डेफिसिट, कुल जीएसडीपी का 3.2 फीसदी और पब्लिक डेट यानी राज्य का कर्ज कुल जीएसडीपी का 28.6 फीसदी रहने की संभावना है. ऐसे में अगर आर्थिक सर्वेक्षण रिपोर्ट में गवर्नमेंट एक्सपेंडिचर के लिए जो सुझाव दिए गए हैं अगर उसे धरातल पर उतर जाता है तो फिस्कल डेफिसिट, कुल जीएसडीपी का 4.8 फीसदी और पब्लिक डेट यानी राज्य का कर्ज जीएसडीपी का 28.6 फीसदी रहने की संभावना है.
आर्थिक सर्वेक्षण रिपोर्ट में तमाम तरह के सुझाव दिए गए हैं. जिसके तहत गवर्नमेंट एक्सपेंडिचर को ज्ञान यानि गरीब, युवा, अन्नदाता और नारी के क्षेत्र में बढ़ाना चाहिए. इसके लिए फोकस क्षेत्र टूरिज्म और इंफ्रास्ट्रक्चर है. ऐसे में अगर आगामी वित्तीय वर्ष में करीब 10,000 करोड़ रुपए की गवर्नमेंट एक्सपेंडिचर इन क्षेत्रों में बढ़ाते हैं, तो जीएसडीपी ग्रोथ दर 13.6 फीसदी को छू सकती है.