ऊधम सिंह नगर जिले के पंतनगर स्थित गोविंद बल्लभ पंत कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय में 119वें अखिल भारतीय किसान मेला एवं कृषि उद्योग प्रदर्शनी का आयोजन किया जा रहा है. इस आयोजन का शुभारंभ प्रदेश के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने फीता काटकर और दीप प्रज्ज्वलित कर किया. तीन दिवसीय इस मेले में देश-प्रदेश से आए किसानों, वैज्ञानिकों और कृषि विशेषज्ञों ने भाग लिया. इस दौरान मुख्यमंत्री ने मेले में लगे स्टॉलों का निरीक्षण किया. किसानों से संवाद किया और प्रगतिशील किसानों को सम्मानित भी किया.
इसके बाद विश्वविद्यालय के सभागार में आयोजित संवाद कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने उपस्थित जनसमूह को संबोधित किया. सीएम धामी ने कहा इस किसान मेले में 350 से अधिक स्टॉल लगाए गए हैं, जहां किसानों को एक ही स्थान पर कृषि से जुड़ी नई तकनीक, उन्नत बीज, आधुनिक उपकरण और वैज्ञानिकों से सीधे संवाद का अवसर मिल रहा है. ऐसे आयोजनों से किसानों को नई जानकारी और आधुनिक खेती के तरीके सीखने में काफी लाभ मिलता है.
इसके बाद विश्वविद्यालय के सभागार में आयोजित संवाद कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने उपस्थित जनसमूह को संबोधित किया. सीएम धामी ने कहा इस किसान मेले में 350 से अधिक स्टॉल लगाए गए हैं, जहां किसानों को एक ही स्थान पर कृषि से जुड़ी नई तकनीक, उन्नत बीज, आधुनिक उपकरण और वैज्ञानिकों से सीधे संवाद का अवसर मिल रहा है. ऐसे आयोजनों से किसानों को नई जानकारी और आधुनिक खेती के तरीके सीखने में काफी लाभ मिलता है.
मुख्यमंत्री ने कहा कि किसान देश के अन्नदाता हैं. उनकी मेहनत तथा समर्पण से ही देश और प्रदेश की समृद्धि संभव है. उन्होंने कहा कि नरेंद्र मोदी के विकसित भारत के संकल्प में किसानों की महत्वपूर्ण भूमिका है. किसानों की ताकत से ही देश लगातार आगे बढ़ रहा है. उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री किसानों को देश की आत्मा मानते हैं और उनकी आय बढ़ाने तथा समृद्धि के लिए लगातार काम कर रहे हैं.
मुख्यमंत्री ने बताया कि हाल ही में असम में आयोजित कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री द्वारा किसान सम्मान निधि की 22वीं किस्त जारी की गई, जिसका लाभ उत्तराखंड के लगभग 9 लाख से अधिक किसानों को मिला है. इसके अलावा जंगली जानवरों द्वारा फसलों को होने वाले नुकसान की भरपाई के लिए 25 करोड़ रुपये की पहली किस्त भी जारी की गई है.
उन्होंने कहा केंद्र और राज्य सरकार किसानों के हित में कई योजनाएं चला रही है. किसान क्रेडिट कार्ड की सीमा 3 लाख रुपये से बढ़ाकर 5 लाख रुपये कर दी गई है. किसानों को 3 लाख रुपये तक का ऋण बिना ब्याज के दिया जा रहा है. इसके साथ ही कृषि यंत्रों पर 80 प्रतिशत तक की सब्सिडी दी जा रही है. बागवानी को बढ़ावा देने के लिए ड्रैगन फ्रूट सहित कई नई फसलों को प्रोत्साहित किया जा रहा है. इस क्षेत्र में भी 80 प्रतिशत तक की सब्सिडी उपलब्ध कराई जा रही है.
मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य में फलों के उत्पादन में लगभग 2.5 गुना वृद्धि दर्ज की गई है. मशरूम उत्पादन में उत्तराखंड देश में पांचवें स्थान पर पहुंच गया है, जबकि शहद उत्पादन में राज्य आठवें स्थान पर है. उन्होंने कहा मधुमक्खी पालन और शहद उत्पादन के क्षेत्र में अपार संभावनाएं हैं.
मुख्यमंत्री ने बताया उन्होंने अपनी ग्रीष्मकालीन राजधानी क्षेत्र गैरसैंण-भिकियासैंण के पास स्थित सड़कोट गांव को गोद लिया है, जो आज एक मॉडल गांव के रूप में विकसित हो रहा है. राज्य में 23 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में सुगंधित पौधों की खेती भी की जा रही है. उन्होंने कहा कि राज्य सरकार किसानों के हित में लगातार काम कर रही है. नहरों से सिंचाई को पूरी तरह मुफ्त किया गया है. गेहूं पर 20 रुपये प्रति क्विंटल का बोनस दिया जा रहा है. गन्ने के समर्थन मूल्य में भी बढ़ोतरी की गई है, जो पड़ोसी राज्य उत्तर प्रदेश से भी 5 रुपये अधिक है.
मुख्यमंत्री ने कहा उत्तराखंड की भौगोलिक परिस्थितियों को देखते हुए कृषि के लिए विशेष योजनाएं बनाई जा रही हैं. सेब उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए 1200 करोड़ रुपये की लागत से नई सेब नीति लागू की गई है. उन्होंने कहा कि राज्य सरकार किसानों की आय बढ़ाने के लिए लगातार प्रयास कर रही है.इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने लगभग एक दर्जन प्रगतिशील किसानों को “प्रगतिशील किसान सम्मान” से सम्मानित किया. सम्मानित किसानों को 11-11 हजार रुपये और 5-5 हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि भी प्रदान की गई.