ब्रिटिशकालीन मैलरोज कोठी में लगी भीषण आग, करोड़ो की सम्पत्ति जलकर हुई स्वाह

(गुंजन मेहरा)
नैनीताल। शुक्रवार की देर शाम मल्लीताल क्षेत्र में ब्रिटिशकालीन मैलरोज कोठी में भीषण आग लग गई। अग्निकांड में करोड़ों की संपत्ति जलकर स्वाह हो गई। घंटों मशक्कत के बाद भी आग पर काबू नहीं पाया जा सका। आग लगने के कारणों का पता नहीं चल सका है। हालांकि पुलिस के अनुसार आग लगने का कारण शॉर्ट सर्किट हो सकता है।
देरशाम आठ बजे के बाद सैनिक स्कूल के पास मैलरोज कंपाउंड क्षेत्र में रह रहे लोगों के वहां वर्षों पुरानी मैलरोज कोठी में अचानक आग धधकती देखी गई। यह कोठी लकड़ी, पत्थरों की बनी है और टिन की छत है।
इससे पहले कि लोग कुछ समझ पाते आग की लपटें आसमान छूने लगीं। कोठी में रह रहे लोग जान बचाने के लिए कमरों से बाहर भागे और शोर मचाने लगे। आसपास के लोगों ने वहां मौजूद संसाधनों से आग बुझाने का प्रयास किया मगर सफलता नहीं मिली। सूचना के बाद भी दमकल की टीम आधे घंटे पहुंची। टीम ने आग बुझाने का प्रयास किया लेकिन घंटों की मशक्कत के बाद भी आग पर काबू नहीं पाया जा सका। कोतवाल अशोक कुमार के मुताबिक मैलरोज कोठी में कुमाऊं विश्वविद्यालय के प्रोफेसर पीसी तिवारी, कुमाऊं मंडल विकास निगम से सेवानिवृत्त प्रकाश पांडे, त्रिभुवन भोज और बंटी भाई अधिकारी के परिवार रहते हैं। अग्निकांड के दौरान प्रो. तिवारी परिवार समेत हल्द्वानी गए थे, जबकि अन्य लोग अपने आवास में थे। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक सबसे पहले आग की लपटें प्रो. तिवारी के यहां से निकलती दिखी जिसके बाद लकड़ी की कोठी धू धू कर स्वाह हो गई। अग्निकांड में हुए नुकसान का आंकलन नहीं हो सका है। खबर लिखे जाने तक दमकल और स्थानीय लोग भूपेंद्र सिंह बिष्ट, सुरेश बिनवाल, प्रेम बिष्ट, पप्पू भट्ट और आदित्य साह समेत कई लोग आग बुझाने में जुटे थे। खबर लिखे जाने तक पीड़ित परिवार खुले आसमान के नीचे ही थे।
चंद मिनट में ही खत्म हो गया दमकल का पानी
नैनीताल। मैलरोज कंपाउंड में जिस कोठी में आग लगी, वहां सकरी सड़क होने के कारण फायर ब्रिगेड की गाड़ी नहीं पहुंच सकी। बाद में फायर ब्रिगेड की छोटी गाड़ी हंस निवास की ओर से आई, लेकिन चंद मिनटों में ही इस छोटी गाड़ी का पानी खत्म हो गया।