आयोग की अंतरिम रिपोर्ट – 416 पदों के लिए सवा लाख अभ्यर्थी हुए थे शामिल
देहरादून, (कमल जोशी)। उत्तराखंड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग (UKSSSC) की बहुचर्चित ग्रेजुएट लेवल परीक्षा को प्रदेश सरकार ने तत्काल प्रभाव से रद्द कर दिया है। यह बड़ा फैसला आज मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) यू.सी. ध्यानी की अध्यक्षता वाले एकल सदस्यीय जांच आयोग द्वारा अंतरिम रिपोर्ट सौंपे जाने के बाद लिया गया।
पेपर लीक प्रकरण के कारण परीक्षा की शुचिता पर उठे गंभीर सवालों और समूचे प्रदेश में मचे हड़कंप के मद्देनजर सरकार ने छात्र हित में यह कदम उठाया है। मुख्यमंत्री कार्यालय ने स्पष्ट किया है कि यह परीक्षा अगले तीन माह के भीतर दोबारा आयोजित की जाएगी, जिससे प्रभावित अभ्यर्थियों को जल्द से जल्द दूसरा अवसर मिल सके। इस परीक्षा में 416 पदों के लिए एक लाख से अधिक (लगभग सवा लाख) अभ्यर्थी शामिल हुए थे, जिनके भविष्य को लेकर अनिश्चितता बनी हुई थी। जांच आयोग की रिपोर्ट में परीक्षा में हुई अनियमितताओं की पुष्टि होने के बाद यह कार्यवाही की गई है। आयोग ने यह भी सुनिश्चित किया है कि इस फैसले का अन्य परीक्षाओं पर कोई नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ेगा।
पेपर लीक प्रकरण के सामने आने के बाद उत्तराखंड बेरोजगार संघ के बैनर तले प्रदेश के युवा लगातार धरना-प्रदर्शन कर रहे थे और परीक्षा रद्द कर दोबारा कराने की मांग कर रहे थे। मुख्यमंत्री धामी स्वयं युवाओं के बीच पहुंचे थे और उनकी मांगों पर कार्रवाई का आश्वासन दिया था, जिसके बाद युवाओं ने अपना धरना समाप्त किया था। युवाओं ने सरकार को कार्रवाई के लिए दस दिन का समय दिया था, जिसकी मियाद आज पूरी हो रही थी।
भाजपा विधायक प्रतिनिधिमंडल ने भी शुक्रवार को मुख्यमंत्री धामी से मुलाकात कर छात्रहित में परीक्षा रद्द करने और दोबारा आयोजित करने की पुरजोर मांग की थी। मुख्यमंत्री धामी ने इस प्रकरण को लेकर पहले ही एसआईटी का गठन कर दिया था और सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति यूसी ध्यानी की अध्यक्षता में जांच आयोग का गठन किया था।
जनसंवाद और गहन छानबीन के आधार पर आयोग ने आज अपनी अंतरिम रिपोर्ट सरकार को सौंप दी। मुख्यमंत्री धामी पूर्व में ही युवाओं के हित को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए यह कह चुके हैं कि ‘युवाओं के लिए झुकना तो क्या, अगर जरूरत पड़ी तो अपने सर भी कटा सकते हैं ‘, जो उनकी इस मामले में दृढ़ता को दर्शाता है। सरकार का मानना है कि इस निर्णय से मेहनती और ईमानदार अभ्यर्थियों के साथ न्याय हो सकेगा।