उत्तरांचल पावर इन्जीनियर्स एसोशिएशन ने चार अभियंताओं को बिना ठोस जांच करायें निलम्बित किये जाने पर जताया रोष

जब साहब मेहरबान तो गधे भी पहलवान होते हैं यहाँ भृष्टाचार पर ज़ीरो टोलरेंस के दो दो चश्मे वाली सरकार के राज्य में




देहारादून। आज यूपीसीएल के अभियन्ताओं ने मुख्यालय गेट पर धरना दिया शाम होते होते एमडी जो वार्ता छोड़ कर बीच में ही भाग गया था जिससे अभियंता और भड़क गये तथा जमकर नारेबाजी करने लगे तभी देरशाम एमडी ने 30 सितम्बर को सहायक अभियन्ता, गुरुकुल नारसन को व उपखंड अधिकारी मंगलोर ई० अनुभव सैनी को वासू स्टील के बिजली मीटर से छेड़छाड़ के मामले में निलम्बित कर दिया गया था।
अभियंताओं का बढ़ता आक्रोश देखते हुए प्रबन्धन ने आज ही देर सांय को ई० गुलशन बुलानी और ई० अनुभव सैनी का निलंबन समाप्त करते हुए बहाल भी कर दिया। एसोसिएशन ने यह भी माँग की अन्य निलंबित अभियंताओं की बहाली भी शीघ्र की जाये।
वार्ता में उत्तरांचल पावर इन्जीनियर्स एसोशिएशन के अध्यक्ष वाई०एस० तोमर, महासचिव राहुल चानना, वरिष्ठ उपाध्यक्ष विवेक राजपूत, उपाध्यक्ष अनिल मिश्रा, सौरभ पाण्डेय सहित अभिनव रावत, मुकेश, अमित, ब्रजेश, अनूप, अश्वनी, कैलाश, अनुभव, प्रशांत, विकास, प्रदीप पन्त, हारून, अर्शद अली, मीनाक्षी पन्त, अनुपमा गैरोला, कल्पना डोभाल, मनीष, सुभाष आदि उपस्थित रहे तथा धरने में सैकड़ो अभियंता शामिल हुये। उक्त विज्ञप्ति राहुल चानना, महासचिव, उत्तरांचल पावर इन्जीनियर्स एसोशिएशन के द्वारा जारी की गयी।
मुख्यमंत्री से ऊर्जा निगमों में हस्तक्षेप की मांग : सेवा विस्तार व्यवस्था से प्रभावित होती है पदोन्नतियां : अभियंता नाराज
विज्ञप्ति के अनुसार प्रदेश के ऊर्जा निगमों में सेवा विस्तार का मामला जोर पकड़ रहा है अभियन्ताओं का है कि, उत्तराखण्ड के ऊर्जा निगमों में उच्चस्तरीय पदों पर सेवा विस्तार और प्रभारी व्यवस्था को लेकर अभियंताओं ने मुख्यमंत्री से हस्तक्षेप की मांग की है। इस सम्बंध में सीएम धामी को पत्र लिखा गया है। ज्ञात हो कि 2024 मे एमडी अनिल कुमार को अधिवर्ष्टा आयु पूरी करने के बाद सेवानिवृत्त
गौरतलब है कि उत्तराखण्ड पावर कारपोरेशन में प्रबंध निदेशक अनिल यादव व निदेशक ऑपरेशन एम आर आर्य रिटायरमेंट के बाद सेवा विस्तार ले चुके हैं। जल्द ही रिटायर होने वाले गढ़वाल ज़ोन के चीफ इंजीनियर बीएमएस परमार के भी संभावित सेवा विस्तार की जोरों पर चर्चा है।
पूर्व में यूपीसीएल के एमडी पद परअनिल यादव के सेवा विस्तार को लेकरपावर कॉरिडोर और मीडिया में विशेष चर्चा का बाजार गर्म रहा था। एक बार फिर सीएम को भेजे पत्र के बाद अभियंताओं के आक्रोश से मामला और भी गर्मा गया है।
उत्तराखंड पावर इंजीनियर्स एसोसिएशन का कहना है कि निगमों में प्रबन्ध निदेशक, निदेशक और अन्य उच्च पदों पर कार्यरत अधिकारियों को अधिवर्षता की आयु 60 वर्ष पूर्ण होने के बाद भी सेवा विस्तार दिया जा रहा है, जिससे विभाग के पात्र अभियंताओं की पदोन्नति समय पर नहीं हो पा रही है।
इस संबंध में अभियंता संगठन के महासचिव राहुल चानना की ओर से मुख्यमंत्री को भेजे गये पत्र में कहा गया है कि सेवा विस्तार की इस व्यवस्था के कारण मुख्य अभियंता से लेकर सहायक अभियंता तक लगभग चार स्तरों की पदोन्नति प्रभावित होती है।
इससे कई अभियंता बिना पदोन्नति के ही सेवानिवृत्त हो रहे हैं, जो उनके संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन है।
पत्र में यह भी कहा गया है कि अधिवर्षता पूर्ण होने के बाद भी सेवा विस्तार देना यह संकेत देता है कि विभाग में अन्य अभियंता कम सक्षम हैं, जबकि ऊर्जा निगमों में सरकार की विभिन्न योजनाओं के क्रियान्वयन के लिए पर्याप्त योग्य अभियंता उपलब्ध हैं।
संगठन ने मुख्यमंत्री से मांग की है कि 60 वर्ष की आयु पूरी कर चुके किसी भी अधिकारी को सेवा विस्तार न दिया जाए तथा वर्तमान में सेवा विस्तार अथवा प्रभारी व्यवस्था में कार्यरत अधिकारियों की सेवा तत्काल प्रभाव से समाप्त की जाए। पत्र की प्रतिलिपि मुख्य सचिव आनंद वर्द्धन व प्रमुख सचिव ऊर्जा मीनाक्षी सुन्दरम को भी भेजी गई है।
यहां यह भी बता दें कि अनिल यादव के सेवा विस्तार के आदेश की मांग को लेकर बॉबी पंवार और आईएएस मीनाक्षी सुन्दरम के बीच सचिवालय में तीखी झड़प हुई थी। यह मसला कई दिनों तक चर्चाओं में रहा था।

यहाँ स्मरण दिलाना उचित होगा कि गत वर्ष 2024 में यूपीसीएल के जिन दो दो मुख्यअभियंता स्तर के अधिकारियों की सेवानिवृत्ति के पश्चात किसी विशेष प्रयोजन को दर्शाते हुए तमाम घोटालों और भ्रष्टाचार के मामलों को नजर अंदाज करते हुए सबसे विद्वान, अनुभवी व सक्षम मानते हुए केन्द्र की सैंकडो हजारों करोड की योजना को ठिकाने / क्रियान्वित करने के लिए तथा बिजीलेंस विभाग की आय से अधिक सम्पत्तियों के मामले में दोषी पाये जाने के बाबजूद जाँच रिपोर्ट को निक्षेपित रख इस कहावत को चरितार्थ करते हुये, ” कि जब साहब मेहरबान तो गधे भी पहलबान*” का अनुसरण कर दिया गया। ज्ञात हो कि एमडी यूपीसीएल व निदेशक परियोजना ने तीन दर्जन से अधिक सम्पत्तयाँ आय से कई गुना अधिक अपने परिजनों, रिश्तेदारों और सहायकों के साथ खरीदफरोख्त कर रखी थी जिनके बिक्रयपत्रों को सप्रमाण उजागर किया जा चुका है। ऐसे ही निदेशक की नियुक्ति में भी बिचलन जैसे चमत्कारी शब्द का प्रयोग कर मनचाही नियम विपरीत नियुक्ति दी जा चुकी है। ऐसे में लगता है कि धाकड धामी सरकार का भ्रष्टाचार पर जीरो टालरेंस के दो दो मतलब हैं तभी तो एक ओर पेयजल विभाग के एकश्रजेई पर केवल एक बेनामी सम्पत्ती पाये जाने पर बरखास्तगी और दूसरी ओर यूपीसीएल के अनिल कुमार एमडी की लगभग ढातीन दर्जन नामी बेनामी आय से अधिक सम्पत्तियों के सप्रमाण उजागर होने पर चुप्पी तथा और पालना पोसनाअपने आप में ही बैकफुट पर खडा करता है।
