यूनेस्को के अंतर्राष्ट्रीय मातृभाषा दिवस पर उत्तराखंड की लोकभाषाओं के संरक्षण का संकल्प, 2026 से विशेष आयोजन की शुरुआत

दुनिया की सभी भाषाओं की तरह मेरी भाषा भी प्रवाहमान रहे समृद्ध हो.
अंतरराष्ट्रीय मातृभाषा दिवस पर मातृ भाषाओं के पक्ष में उत्तराखंड आम आदमी पार्टी ने बैठक कर चिंता व्यक्त की ।।

मातृभाषा दिवस आयोजन का विचार यूनेस्को द्वारा 17 नवम्बर, 1999 को दुनिया की उन भाषाओं के संरक्षण और संवर्धन की ओर दुनिया का ध्यान आकर्षित करने के लिए एक प्रस्ताव पारित किया गया, जो कहीं न कहीं संकट में हैं। इसमें विश्व की सांस्कृतिक और भाषाई विविधता के संरक्षण और संवर्धन हेतु विश्व स्तर पर प्रयास किये जाने का प्रस्ताव रखा गया। इसके तहत हर वर्ष 21 फरवरी को अंतर्राष्ट्रीय मातृभाषा दिवस के रूप में मनाने का निश्चय किया गया। यह दिवस दुनिया में भाषा के पहले आंदोलन जो कि बांग्ला भाषा के पक्ष में ढाका में 21 फरवरी को हुआ था और जिसमें अनेक युवा शहीद हुए थे उनकी स्मृति में यह दिवस मनाया जाता है।

पहला अंतर्राष्ट्रीय मातृभाषा दिवस वर्ष 2000 में मनाया गया और 2026 में हमने उत्तराखंड की भाषाओँ के पक्ष में ये आयोजन प्रारम्भ किये हैं। वर्ष 2009 में यूनेस्को द्वारा जारी एक रिपोर्ट के अनुसार दुनिया की कई भाषाओं का अस्तित्व खतरे में है। इन भाषाओं उनमें उत्तराखण्ड की सभी लोकभाषाएं शामिल हैं। समाज और सरकारी स्तर पर अपनी मातृभाषाओं का महत्व न होने से उत्तराखण्ड की नई पीढ़ी में भी अपनी मातृभाषा के प्रति अलगाव की प्रवृत्ति लगातार बढ़ रही है। यह हमारी भाषाओं के सामने सबसे बड़ी चुनौती और चिंता तो है ही हमारी सांस्कृतिक पहचान के लिए भी खतरा है।

उत्तराखण्ड की लोकभाषाएं संसार की सुन्दरतम भाषाएं में है। लेकिन दुर्भाग्य यह रहा कि आजादी से पूर्व व बाद भी समाज और सरकार दोनों स्तरों पर लोकभाषा की घोर अनदेखी हुई जिससे वे अपनी ज़मीन/मूल भूमि से भी कटने लगीं और आज उन पर अस्तित्व का संकट मंडरा रहा है।इसलिए आज न केवल अपनी भाषायी विरासत को बचाने व उसके साहित्य के संरक्षण, विकास एवं प्रसार की जरूरत है बल्कि लोकभाषाओं के सवाल पर अधिक गम्भीरता और निरंतरता के साथ काम किए जाने के साथ ही उन्हें समकालीन सृजनचेतना से जोड़ने की आवश्यकता है। अपनी लोकभाषाओं की इन्हीं चिन्ताओं और उन्हें बचाने की तरफदारी में हम सभी अपने गाँवो को स्वराज को जगाने का प्रयास भी कर रहें हैं ताकि भाषाएं बच सके

पार्टी की बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि वर्ष 2026 के सभी संगठनात्मक कार्यक्रमों को राज्यव्यापी स्वरूप दिया जाएगा। वर्ष 2024–25 में आयोजित कई कार्यक्रम मीडिया में प्रकाशित हुए, किंतु संगठनात्मक स्तर पर उन्हें अपेक्षित विस्तार नहीं मिल सका। भविष्य में प्रत्येक आयोजन का व्यापक प्रचार-प्रसार सुनिश्चित किया जाएगा। आज की बैठक में सचिन थपलियाल शुभम कुमार अवनीश कुमार जौनसार से आकाश चौहान आदि शामिल रहे।

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