उत्तराखंड: उम्मीद पोर्टल में दर्ज नहीं हुई वक्फ संपत्तियाँ अब जाएंगी सरकार के कब्जे में

देवभूमि उत्तराखंड में दर्जनों ऐसी संपत्तियों का ब्यौरा सामने आने लगा है जोकि वक्फ बोर्ड में चढ़ी हुई है लेकिन केंद्र सरकार द्वारा जारी “उम्मीद पोर्टल ” में नहीं दर्ज की गई है। जानकारी के मुताबिक इसके पीछे वजह ये बताई जा रही है कि उक्त संपत्तियों के बारे में कब्जेदारो के पास कोई दस्तावेज नहीं है, ये भी जानकारी मिली है कि इनमें बहुत से ऐसी संपत्तियाँ है जोकि सरकार जमीनों में कब्जे कर बनाई गई और उन्हें फिर वक्फ बोर्ड में दर्ज कर दिया गया

उल्लेखनीय है कि वक्फ संपत्तियों के बारे में भारत सरकार ने जो नए नियम बनाए उसके तहत 6 दिसंबर 2025 तक सभी कब्जेदारो को उसकी सूचना,दस्तावेजों ,साक्ष्यों के साथ ” उम्मीद पोर्टल ” पर ऑनलाइन दर्ज करवाने थे। भारत सरकार और राज्य सरकार ने बाकायदा इसके लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम चलाए और ” मुतवल्लियों ” को ये सिखाया गया कि कैसे ऑनलाइन प्रकिया अपनानी है। देशभर में बहुत सी संपत्तियां दर्ज भी हुई कुछ छूट गई ,केंद्र ने पुनः तीन माह का समय दिया और 6 फरवरी 2026 तक सभी वक्फ संपत्तियों का ब्यौरा यहां दर्ज करने के लिए कहा गया.

उत्तराखंड में 7288 संपत्तियों को सूचीबद्ध किया गया था जिनमें 2105 औकाफ़ संपत्तियों का उल्लेख किया गया शेष 5388 संपत्तियों में कब्रस्तान, ईदगाह, मस्जिद ,मदरसे मजारे ,इमामबाड़ा ,स्कूल आदि शामिल है। जिनमें से केवल 1597 ही एप्रूव होकर दर्ज हुई ,इसके साथ साथ 2105 औकाफ़ संपत्तियों को ही अभी तक उम्मीद पोर्टल में दर्ज किया गया है। यानि 3791 मस्जिद, मदरसों,ईदगाह, मजारों आदि श्रेणी की संपत्तियां और 841 औकाफ़ श्रेणी की संपत्तियां के बारे में कब्जेदारो ने जानकारी उम्मीद पोर्टल पर दर्ज नहीं की है

उम्मीद पोर्टल पर वक्फ संपत्तियों को दर्ज करने के लिए पर्याप्त समय और अवसर केंद्र और राज्य सरकार द्वारा दिए जा रहे है, अब कोई इसमें संपत्तियों को दर्ज नहीं करवा रहे है तो उन्हें सरकार द्वारा दिए गए सख्त नियमों का सामना करना पड़ेगा, इसमें संपत्ति के सरकार में निहित करने का प्रावधान भी शामिल है

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