बहुप्रतीक्षित तीन रिक्तियों के लिए 56 आवेदन, 33 अयोग्य एवं 23 में से कौन कौन मारेगा बाजी?
प्रभारी व्यवस्था से होती हैं परियोजनाएं वाधित और मचती है लूट-खसोट!
धुरंदर धामी शासन में क्या इस बार साफ और ईमानदार छवि वाले धुरंदर एमडी ही मिलेंगे या फिर बंटाधार करने वाले घोटालेबाज ?
(ब्यूरो चीफ सुनील गुप्ता)
देहरादून। ऊर्जा विभाग के तीनों निगम वर्तमान में प्रभारी व्यवस्था में साँँसे ले रहे हैं। उत्तराखंड जल विद्युत निगम (यूजेवीएनएल) में वर्तमान प्रभारी एमडी अजय कुमार सिंह अवश्य कुछ सक्रिय व बिगडी हुई व्यवस्वथाओं को पटरी पर लाने में अवश्य नजर आते रहते हैं वहीं यूपीसीएल की अगर बात करें तो इसके प्रभारी एमडी खुद को ही नहीं पहचान पा रहे हैं क्यूँकि शायद उनके ऊपर कुंडली मारे बैठे रहे पूर्व एमडी और निदेशक की जोड़ी का दबदबा अभी भी बरकरार दिखाई देता है तभी तो कोई ठोस और उपभोक्ताओं के व निगम हित में निर्णय लेने में कारगर नहीं दिख रहे हैं रहा प्रश्न पिटकुल का तो वहाँ तो पता ही नहीं चलता कि कोई प्रभारी एमडी वर्तमान में है भी या नहीं? अपर सचिव ऊर्जा को प्रभारी एमडी बनाए जाने से पूर्व निदेशक मानव संसाधन ही प्रभारी एमडी का कार्य देख रहे थे जिनेह उच्च न्यायालय के एक आदेश के तहत पदच्युत होना पड़ा था। वैसे जिसका जब कोई नहीं होता तो वह राम भरोसे ही चलता है।
ज्ञात हो 2024 में रिक्त हो चुके इन पदों पर नियुक्तियां करने के लिए अप्रैल माह में रिक्तियाँ घोषित की गई थी और समाचार पत्रों में विज्ञापन प्रकाशित कराते हुए दिनांक 23 अप्रैल तक आवेदन माँगे गये थे जिनके परिणास्वरुप यूपीसीएल व पिटकुल के लिए 18-18 व यूजेवीएनएल के लिए 20 आवेदन प्राप्त हुये और 11 आवेदन निर्धारित तिथि के पश्चात प्राप्त हुये जिन्हें स्वीकार ही नहीं किया गया। अब नजर आ रहा है कि तीनों ऊर्जा निगमों को नये एमडी के रूप में कुशल, योग्य और ईमानदार तथा योजनाओं और परियोजनाओं को यथार्थ में धरातल पर उतारने वाले तथा जनधन का सदुपयोग करने वाले कडक छवि के कर्मठ अधिकारी मिल सकेंगे वशर्ते कोई ग्रहण न लगे और लगवाया जाये!

शासन द्वारा गठित की गई अपर सचिव ऊर्जा की अध्यक्षता में गठित तीन सदस्यीय स्क्रूटनी समिति ने एमडी यूपीसीएल के लिए प्राप्त 18 आवेदनों में से 11 को अयोग्य घोषित करते हुए 7 अभ्यर्थियों को साक्षात्कार के लिए चयनित किया तथा पिटकुल एमडी के लिए 18 में से 12 को अयोग्य घोषित करते हुये 6 अभ्यर्थियों का तथा यूजेवीएनएल के एमडी पद के लिए आये 20 आवेदनों में से 10 अयोग्य और 10 का चयन साक्षात्कार हेतु किया गया। मजेदार बात यह है कि इनमें अधिकांश अभ्यर्थियों ने तीनों निगमों जोर अजमाईश की है ताकि इसमें न सही तो उसमें तो नम्बर आ ही जायेगा? वैसे कुछ धुरंदरों ने भी जोर अजमाईश के लिए छलांग तो लगाईं थी परंतु बेचारे किस्मत के मारे साक्षात्कार से पहले ही धडाम हो गये।
उल्लेखनीय यहाँ यह तथ्य भी है कि पूर्व एमडी के कारण गर्त में पहुँच चुके यूपीसीएल को इस बार कोई ऐसा एमडी मिलेगा जो इस निगम को डूबने से बचा पाने में सक्षम व योग्य होगा तथा साथ ही हालिया वर्षों में करोडों करोडों के भ्रष्टाचार के कारनामों और घोटालों की कलई खोलने में सक्षम होगा या नहीं? सूत्र बताते हैं कि यूपीसीएल में जिस तरह हजारों और लाखों में मिलने वाले उपकरणों को करोडों करोडों में चहेते कान्ट्रेक्टरों को ही अवार्ड करके नियमों को बलाए ताक रखते हुये टेण्डरों में बंदरबाँट का खेल खेला जा चुका है उन पर भी एक्शन और विराम भी लगता है या नहीं?
देखने योग्य यहाँ यह होगा कि धाकड धामी सरकार तीनों ऊर्जा निगमों मे एमडी के सिंहासनों पर किसकी किसकी ताजपोशी करती है या फिर यूँ ही वैशाखियों के सहारे प्रभारी व्यवस्था जारी रखती है?
