उत्तराखंड विद्युत विनियामक आयोग ने किया गलोगी लघु जलविद्युत परियोजना का निरीक्षण, आरएमयू कार्यों पर व्यक्त किया संतोष
उत्तराखंड विद्युत विनियामक आयोग के अध्यक्ष श्री एम.एल. प्रसाद, सदस्य तकनीकी श्री प्रभात किशोर डिमरी, सदस्य विधि श्री अनुराग शर्मा तथा निदेशक वित्त श्री दीपक पांडेय ने आज यूजेवीएन लिमिटेड के प्रबंध निदेशक श्री अजय कुमार सिंह, अधिशासी निदेशक श्री आशीष जैन, महाप्रबंधक श्री अजय पटेल तथा श्री के.के. जायसवाल एवं निगम के अन्य अधिकारियों के साथ 3.5 मेगावाट क्षमता की गलोगी लघु जलविद्युत परियोजना का स्थलीय निरीक्षण किया।
निरीक्षण के दौरान आयोग की टीम ने परियोजना के विद्युत गृह, हेडवर्क्स, पेनस्टॉक तथा अन्य प्रमुख संरचनाओं एवं घटकों का अवलोकन करते हुए परियोजना के संचालन एवं तकनीकी व्यवस्थाओं की विस्तृत समीक्षा की।
इस अवसर पर आयोग द्वारा परियोजना के नवीनीकरण, उच्चीकरण एवं पुनरोद्धार (Renovation, Modernization and Upgradation – RMU) कार्यों की प्रगति एवं गुणवत्ता का मूल्यांकन किया गया तथा इन कार्यों पर संतोष व्यक्त किया गया। उल्लेखनीय है कि आरएमयू कार्यों पर हुए व्यय के आधार पर टैरिफ संशोधन हेतु यूजेवीएन लिमिटेड द्वारा आयोग के समक्ष याचिका प्रस्तुत की गई है।

निरीक्षण के दौरान निगम के अधिकारियों ने परियोजना से संबंधित विभिन्न तकनीकी, वित्तीय एवं प्रशासनिक पहलुओं की जानकारी भी आयोग के समक्ष प्रस्तुत की।
निरीक्षण के उपरांत आयोग ने निगम को गलोगी पावर हाउस से संबंधित आवश्यक संरक्षण एवं सुरक्षात्मक कार्यों को प्राथमिकता के आधार पर शीघ्र पूर्ण किए जाने के निर्देश दिए, ताकि लगभग 120 वर्ष पुरानी इस ऐतिहासिक रूप से महत्वपूर्ण जलविद्युत परियोजना का एक धरोहर के रूप में संरक्षण सुनिश्चित किया जा सके। निरीक्षण के दौरान परियोजना अधिकारियों द्वारा आयोग एवं निगम प्रबंधन को अवगत कराया गया कि गलोगी परियोजना से विद्युत उत्पादन के साथ-साथ जल संस्थान को देहरादून हेतु पेयजल आपूर्ति भी की जाती है। इस पर यूजेवीएन के प्रबंध निदेशक ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि परियोजना में विद्युत प्रणाली एवं पेयजल आपूर्ति हेतु एक उन्नत तकनीकी एकीकृत SCADA प्रणाली स्थापित की जाए, जिससे परियोजना का प्रभावी, सुदृढ़ एवं गुणवत्तापूर्ण संचालन सुनिश्चित किया जा सके।
नियामक आयोग का यह निरीक्षण परियोजना की तकनीकी स्थिति के प्रत्यक्ष मूल्यांकन के साथ-साथ इसके भावी आर्थिक एवं परिचालन संबंधी पहलुओं के आकलन की दृष्टि से एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।