उत्तराखंड वन महकमे में नए मुखिया की ताजपोशी, इस अधिकारी के नाम पर सहमति

उत्तराखंड वन विभाग में नए मुखिया की ताजपोशी पर मुहर लग गई है. खास बात ये है कि प्रमुख वन संरक्षक पद पर बदलाव के साथ ही विभाग में काफी कुछ नया देखने को मिलेगा. दरअसल, एक तरफ प्रिंसिपल चीफ कंजरवेटर ऑफ फॉरेस्ट (PCCF) हॉफ पद के लिए डिपार्टमेंटल प्रमोशन कमेटी (DPC) हुई है तो दूसरी तरफ नई टीम बनाने पर भी मंथन शुरू हो रहा है.

उत्तराखंड वन विभाग में आने वाले दिनों में बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं. विभाग में नए प्रमुख वन संरक्षक (PCCF HoFF) की नियुक्ति का रास्ता लगभग साफ हो गया है और इसके साथ ही शीर्ष स्तर से लेकर फील्ड स्तर तक जिम्मेदारियों के पुनर्वितरण और तबादलों का दौर भी शुरू होने की संभावना है. हाल ही में प्रमुख वन संरक्षक (हेड ऑफ फॉरेस्ट फोर्स) पद के लिए विभागीय पदोन्नति समिति (DPC) की बैठक आयोजित की गई, जिसमें नए वन मुखिया के चयन को लेकर महत्वपूर्ण चर्चा हुई.

मुख्य सचिव आनंद वर्धन की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में प्रमुख सचिव वन, वर्तमान पीसीसीएफ हॉफ और भारत सरकार के प्रतिनिधि के रूप में मध्य प्रदेश के प्रमुख वन संरक्षक हॉफ भी मौजूद रहे. बैठक में विभाग के वरिष्ठतम अधिकारियों के नामों पर विचार किया गया. इनमें सबसे वरिष्ठ अधिकारी कपिल लाल, नीना ग्रेवाल और एसपी सुबुद्धि शामिल रहे. प्रमुख वन संरक्षक रंजन कुमार मिश्र ने इसकी पुष्टि की है.

राज्य सरकार इस बार वरिष्ठता के आधार पर ही नए वन मुखिया की नियुक्ति करने के पक्ष में दिखाई दे रही है. ऐसे में सबसे वरिष्ठ अधिकारी होने के कारण कपिल लाल का नाम सबसे आगे माना जा रहा है. कपिल लाल और नीना ग्रेवाल दोनों ही 1993 बैच के भारतीय वन सेवा अधिकारी हैं, जबकि एसपी सुबुद्धि 1994 बैच के अधिकारी हैं. कपिल लाल और नीना ग्रेवाल का लंबा कार्यकाल प्रतिनियुक्ति पर बीता है और वे लंबे समय तक विभाग से बाहर विभिन्न जिम्मेदारियों का निर्वहन करते रहे हैं.

कपिल लाल को विभाग में एक सख्त और प्रशासनिक दृष्टि से सक्षम अधिकारी के रूप में जाना जाता है. उनके खिलाफ किसी प्रकार की विभागीय जांच, शिकायत या कार्रवाई लंबित नहीं है, जिसके चलते उन्हें नए वन प्रमुख के रूप में जिम्मेदारी दिए जाने की संभावना सबसे अधिक मानी जा रही है. इससे पहले यह चर्चा थी कि कपिल लाल भारत सरकार में प्रतिनियुक्ति पर जाने का प्रयास कर सकते हैं और ऐसी स्थिति में नीना ग्रेवाल को वन विभाग की कमान मिल सकती है. हालांकि डीपीसी में कपिल लाल के नाम पर बनी सहमति ने इन अटकलों पर विराम लगा दिया है.

अधिकारियों को नई जिम्मेदारियां मिलने के बाद उनके वर्तमान पद भी रिक्त होंगे, जिस कारण विभाग में अन्य अधिकारियों के पदों और जिम्मेदारियों में भी बदलाव की संभावना बढ़ जाएगी. इसके अलावा भारत सरकार में प्रतिनियुक्ति पूरी कर वापस लौटे बी के गांगटे को भी अभी तक कोई नई जिम्मेदारी नहीं सौंपी गई है. माना जा रहा है कि उन्हें विभाग के भीतर किसी महत्वपूर्ण पद पर नियुक्त किया जा सकता है या फिर राज्य प्रतिनियुक्ति पर भेजा जा सकता है.

वन विभाग में केवल शीर्ष स्तर पर ही नहीं बल्कि फील्ड स्तर पर भी बड़े पैमाने पर बदलाव की तैयारी चल रही है. अधिकारियों के तबादलों के लिए विभागीय स्तर पर होमवर्क पहले ही पूरा किया जा चुका था और इसके लिए सिविल सर्विस बोर्ड की बैठक भी प्रस्तावित थी. हालांकि, विभिन्न कारणों से यह बैठक आयोजित नहीं हो सकी और तबादलों की प्रक्रिया फिलहाल टल गई.

अब माना जा रहा है कि नए वन प्रमुख के कार्यभार संभालने के बाद एक बार फिर तबादला सूची पर चर्चा होगी और उनकी प्राथमिकताओं के अनुसार इसमें बदलाव भी संभव है. इसके बाद फील्ड स्तर पर वन संरक्षकों, मुख्य वन संरक्षकों और अन्य अधिकारियों के दायित्वों में फेरबदल किया जाएगा.

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