मसूरी देहरादून विकास प्राधिकरण (एमडीडीए) ने सोमवार को भारी पुलिस बल की मौजूदगी में मासोनिक लॉज बस स्टैंड क्षेत्र स्थित नगर पालिका भूमि पर बने लगभग 80 आवासों को सील करने की कार्रवाई की। प्रशासन ने बताया कि यह कार्रवाई उच्च न्यायालय के निर्देशों के अनुपालन में की गई। हालांकि कुछ परिवारों ने इस कार्रवाई का विरोध भी किया।
कार्रवाई के दौरान कई परिवार पहले ही अपने घरों से सामान हटा चुके थे, जबकि कुछ लोग अब भी आवासों में रह रहे थे। प्रशासन ने ऐसे तीन कमरों में रह रहे परिवारों को दो दिन का समय देते हुए फिलहाल सीलिंग की कार्रवाई स्थगित कर दी। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि निर्धारित समय पूरा होने के बाद इन आवासों को भी सील किया जाएगा।
स्थानीय निवासी प्रियंका पवार ने प्रशासन की कार्रवाई पर आपत्ति जताते हुए कहा कि उनके पास वर्ष 2026 तक की नगर पालिका की रसीदें मौजूद हैं, लेकिन अधिकारियों ने उन्हें स्वीकार नहीं किया। उनका आरोप है कि बिना कोई पूर्व नोटिस दिए बरसात के मौसम में उन्हें बीमार पति के साथ घर खाली करने के लिए कहा जा रहा है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब वर्षों से लोग यहां रह रहे थे, तब कार्रवाई क्यों नहीं की गई।
पूर्व नगर पालिका अध्यक्ष अनुज गुप्ता ने भी कार्रवाई का विरोध करते हुए इसे तानाशाही करार दिया। उन्होंने दावा किया कि उच्च न्यायालय ने केवल चार वर्ष पूर्व आवासों के आवंटन पर रोक लगाई थी, जबकि मौजूदा निवासियों के खिलाफ बिना नोटिस कार्रवाई की जा रही है। उनके अनुसार अधिकांश निवासी स्थानीय हैं और उन्हें अपना पक्ष रखने का पर्याप्त अवसर दिया जाना चाहिए।
उप जिलाधिकारी राहुल आनंद ने बताया कि मासोनिक लॉज परिसर में 70 से 80 कमरे हैं, जिनमें लोग अनधिकृत रूप से रह रहे थे। उन्होंने कहा कि उच्च न्यायालय के निर्देशों के अनुपालन में सीलिंग की कार्रवाई की गई है। तीन कमरों में रह रहे लोगों को दो दिन का समय दिया गया है, जिसके बाद वहां भी नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
नगर पालिका परिषद मसूरी के अधिशासी अधिकारी गौरव भसीन ने बताया कि नगर पालिका की भूमि पर बने इन आवासों पर समय के साथ कुछ लोगों ने कब्जा कर लिया था। वर्ष 2023 में इस संबंध में उच्च न्यायालय में याचिका दायर की गई थी, जिसके बाद न्यायालय ने आवंटन और कथित अवैध कब्जों को लेकर जानकारी तलब की थी। उन्होंने कहा कि न्यायालय के निर्देशों के अनुपालन में वर्तमान कार्रवाई की जा रही है।
प्रशासन ने कहा है कि पूरी कार्रवाई न्यायालय के निर्देशों और नियमानुसार की जा रही है। वहीं प्रभावित परिवारों ने पुनर्वास, नोटिस प्रक्रिया और अपने दस्तावेजों पर विचार किए जाने की मांग उठाई है। मामले को लेकर स्थानीय स्तर पर चर्चा और विरोध की स्थिति बनी हुई है।