तथाकथित तेज तर्रार डीएम और एसपी सिटी ने भी नहीं किया समाधान व एक सप्ताह बीत जाने पर भी नहीं दर्ज कराई आपराधिक ट्रेसपास की एफआईआर?
मित्र पुलिस ने की भूमाफियाओं व गुण्डों से मित्रता और असहाय महिला व परिजनों को टाल अनुचित सलाह दे पढाया कोर्ट जाने का पाठ !
एसपी सिटी साहब भी अभीतक देख ही रहें है और बेचारी पीडिता अपनी जवान वेटी व वेटे के साथ बरसात में सडक पर खुले आसमान के नीचे रहने को मजबूर!
देहरादून। अगर पुलिस व कानून के रखवाले चाहे और अपना धर्म निभायें तो गुण्डे और भूमाफिया स्वत: ही जमींदोज हो जायें, परंतु ऐसा है कहाँ? और फिर अब तो नये नये युवा वकीलों ने वकालत की आड में घर व सम्पत्तयों को काले कोट की धमकी देकर मशल पावर का प्रयोग करना शुरू कर दिया है।








ऐसा ही मामला प्रकाश में आया है जिसने कोर्ट की भी छवि तो धूमिल की ही साथ ही साथ एक असहाय विधवा के परिवार को उसके लगभग बीस वर्षो से अधिक अध्यासन वाले शहर के बीचों बीच 2, पटेल रोड (फालतू लाईन) पर सुधा उनियाल को अनुचित बल प्रयोग किये जाने से भारी बरसात के चलते सडक पर ला दिया और घर से बेघर कर दिया।
ज्ञात हो जिस सिविल जज (सी. डि.) के आदेश की आड ली गयी वह दर असल 6 पटेल रोड के लिए निर्माण कार्य न करने और तृतीय पक्ष का हित सृजित न करने का आदेश श्रीमती घिल्डियाल के द्वारा श्रीमती उनियाल का पता भी 6, पटेल रोड दर्शाकर लिया गया जबकि वास्तविकता व सारे सबूत श्रीमती उनियाल परिवार के पास 2, पटेल रोड के ही हैं।





उल्लेखनीय यहाँ यह है कि पुलिस हेल्प लाईन से बुलाई गयी बारदात के समय चीता पुलिस या तो अनपढ थी या पर किसी साँठगाँठ के चलते गुण्डों व भूमाफियाओं से मित्रता निभाते हुये कार्यवाही करने से कतरा रही थी और अपने आपको असहाय बता पल्ला झाड रही थी?
पीडिता के अनुसार दूसरी गली में रह रही श्रीमती घिल्डियाल का किसी भी प्रकार से कोई सम्बंध उनके अध्यासन वाली सम्पत्ति का है ही नहीं और कोर्ट का आदेश में 2,पटेल रोड पर ताला डालने और उसे बेघर कर देने का जब आदेश ही नहीं है तो उसके साथ घिल्डियाल परिवार व उसके दामाद राहुल काला एवं उनके वकील की ड्रेस में आये अधिवक्ता अतुल जोशी, सुरजीत सिंह राबत के साथ एक सादे कपडों मे अपने को दीपांशु वकील बताने वालों ने अवैध रूप से बल प्रयोग कर जबरन उनके घर पर मरम्मत का कार्य कर रहें मजदूरों के कीमती मशीनें इलैक्ट्रिक कटर, बेलचे फावडे आदि सहित पीडिता का घरेलू सामान उठा कर किस अधिकार से ले गये?
पीडिता के अनुसार उसने पुलिस कंट्रोल रूम के अलावा जब कोतवाली नगर में मामले की एफआईआर दर्ज करानी चाही तो उसे भगा दिया और कोर्ट का आदेश पढे बिना ही टालमटोल कर भगा दिया फिर सोमवार को जन समाधान में डीएम आशीष चौहान से मिल कर अनुरोध किया तो उन्होंने भी बिना कोई आदेश के मौजूद एसपी सिटी को उनका प्रार्थना पत्र देखने के लिए दे दिया जो एसपी सिटी साहब भी अभीतक देख ही रहें है और बेचारी पीडिता अपनी जवान वेटी व वेटे के साथ बरसात में सडक पर खुले आसमान के नीचे रहने को मजबूर हैँ।
देखना यहाँ गोर तलव होगा कि धाखड व धुरंधर मुख्यमंत्री धामी स्वत: संज्ञान लेते हुये उत्तराखंड पुलिस को सिखायेंगे कि मित्रता पीडितो से निभानी है या कानून से खिलवाड करने वालों से!
क्या पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी भी स्वत: संज्ञान लेते हुए गलत कार्य और दादागिरी दिखाने वाले इन वकीलों व गुण्डों के विरुद्ध कोई कार्यवाही कर वेचारी विधवा महिला एवं उसके बच्चों को न्याय दिलायेंगे?