उत्तराखंड भले ही उत्तर प्रदेश से नवंबर, 2000 में अलग हो गया था लेकिन दोनों के बीच संपत्तियों को लेकर विवाद 26 साल बाद भी चल रहा है। हाल ही में टिहरी बांध की संपत्तियों को लेकर दोनों ही राज्य आमने-सामने थे। 21 सितंबर यानी सोमवार को इस मामले पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। टिहरी हाइड्रोपावर की संपत्तियों को लेकर यह मामला 14 साल से लटका हुआ है। सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई करते हुए कहा कि दोनों ही राज्य आपस में बैठकर बातचीत से इस मसले का हल निकालने की कोशिश करें। साथ ही कोर्ट ने यह भी पूछा कि क्या इस मामले को मध्यस्थता के लिए भेजने का रास्ता भी अपनाया जा सकता है? कोर्ट ने दोनों राज्यों को इस मामले में बातचीत का सुझाव देकर अगली सुनवाई के लिए टाल दिया है। इस विवाद को लेकर अगली सुनवाई अब 28 सितंबर, 2026 को होगी।
क्या है मामला?
यह पूरा मामला 2001 में हुए संपत्ति बंटवारे से जुड़ा है। 9 नवंबर, 2000 को अलग उत्तराखंड राज्य बनने के बाद संपत्तियों का बंटवारा हुआ था। उत्तराखंड का कहना है कि टिहरी हाइड्रोपावर डेवलपमेंट कॉरपोरेशन (THDC) की कुछ संपत्तियां बंटवारे के समय उत्तर प्रदेश को दे दी गई थीं जबकि प्रोजेक्ट उत्तराखंड में था। उत्तराखंड इसी आधार पर इन संपत्तियों पर अपना दावा पेश कर रहा है। बता दें कि यह कोई नया मामला नहीं है। यह मामला 2012 से अदालत में चल रहा है।
उत्तराखंड ने क्या कहा?
उत्तराखंड का आरोप है कि उत्तर प्रदेश की तरफ से सबूत दाखिल करने में बार-बार देरी की गई है। वरिष्ठ वकील अमित आनंद तिवारी ने कोर्ट में बताया कि 2019 में इस मामले में 30 लाख रुपए की लागत भी लगाई गई थी लेकिन इसके बावजूद इसका कोई समाधान नहीं निकाला जा रहा है। बल्कि उल्टे दूसरी तरफ से निर्देश लेने के लिए चार हफ्ते का समय मांगा गया है। उत्तराखंड की तरफ से कोर्ट को ये भी बताया गया कि पहले की सुनवाई में अटॉर्नी जनरल ने उसकी संपत्तियों के दावे को जस्टिफाएबल क्लेम यानी उचित दावा माना था। जहां कोर्ट ने कहा कि बातचीत से समाधान निकाला जाए। वहीं, उत्तराखंड ने कहा कि इस विवाद का समाधान सुप्रीम कोर्ट के आदेश से ही संभव है। कोर्ट ने इस बात पर जोर दिया कि यह विवाद दो राज्यों के बीच का है। इसलिए पहले कोशिश यह की जानी चाहिए कि इसका विवाद आपसी बातचीत से निकाला जाए। कोर्ट ने कहा कि यह देखा जाना चाहिए कि क्या दोनों ही पक्ष इसका समाधान आपसी बातचीत से निकाल सकते हैं?
संपत्ति विवाद खत्म होने का था दावा
18 नवंबर, 2021 को लखनऊ में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने एक मीटिंग की। इस मीटिंग के बाद कहा गया कि दोनों राज्यों के बीच संपत्ति बंटवारे का विवाद सुलझा लिया गया है। चुनाव में भी इस दावे को खूब भुनाया गया। लेकिन अब सवाल उठता है कि जब दोनों राज्यों के बीच संपत्ति विवाद को सुलझा लिया गया था तो आज यह मामला सुप्रीम कोर्ट में क्यों लटका पड़ा है? सवाल सिर्फ अभी नहीं उठ रहे। सवाल तब भी उठाए जा रहे थे, जब दोनों प्रदेशों के मुख्यमंत्रियों ने 21 साल बाद इस विवाद को एक ही दिन में सुलझाने का दावा किया था।
दरअसल तब सरकार ने दावा किया था कि उत्तर प्रदेश ने उत्तराखंड को उधमसिंह नगर स्थित धौरा, बैगुल, नानक सागर जलाशय में पर्यटन एवं वाटर स्पोर्ट्स की अनुमति दे दी है। जब संपत्तियों का बंटवारा हो गया था तो फिर अनुमति मांगने की आवश्यकता क्यों पड़ी?
कमजोर राजनीतिक इच्छाशक्ति का परिणाम
9 नवंबर, 2000 को उत्तराखंड जब अलग राज्य बना तो उत्तर प्रदेश के साथ संपत्तियों का बंटवारा हुआ। बंटवारा बड़ा आसान था। शर्त रखी गई थी कि बंटवारे के लिए जहां है, जैसा है का सिद्धांत लागू किया जाएगा। यानि कि जो संपत्तियां उत्तर प्रदेश में हैं, वो यूपी की होंगी और जो उत्तराखंड में हैं, वो देवभूमि की हो जाएंगी लेकिन ऐसा हुआ नहीं। आसान से बंटवारे को जानबूझकर बहुत जटिल कर दिया गया। हमारे नेताओं की कमजोर राजनीतिक इच्छाशक्ति ने इस बंटवारे को शांतिपूर्ण ढंग से नहीं होने दिया। ये वही राजनेता थे जिन्होंने यूपी से चुपचाप दो हजार करोड़ का कर्ज विरासत में ले लिया लेकिन अपनी सपंत्तियों के बंटवारे के समय ये लोग चुप्पी साधे रहे। उसी का परिणाम है कि 26 साल बाद भी दोनों राज्यों के बीच संपत्ति बंटवारे को लेकर कोई समाधान निकलता हुआ नहीं दिख रहा है।
बातचीत से निकलेगा हल?
ताजा मामले में सुनवाई के दौरान कोर्ट में अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल केएम नटराज ने कहा कि इस मामले में बातचीत से हल निकालने की संभावनाएं देखी जा सकती हैं। नटराज ने कहा कि उन्होंने उत्तराखंड के अटॉर्नी जनरल से बात कर ली है। हालांकि बातचीत से इसका समाधान निकलना मुश्किल लग रहा है। क्योंकि अगर दोनों राज्य आपसी सहमति से इसका हल निकालना चाहते तो वह कब का हो चुका होता। अब देखना होगा कि इस मामले की अगली सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट का क्या रुख अपनाता है?