देहरादून। उत्तराखंड में बीते वर्षों के दौरान विकास, रोजगार सृजन और जनकल्याण के क्षेत्र में किए गए कार्यों की तस्वीर सामने आई है। सरकारी भर्तियों से लेकर स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार, शिक्षा में सुधार, धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने, महिला सशक्तीकरण और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने तक कई क्षेत्रों में योजनाओं और परियोजनाओं पर काम किया गया है।इसमें युवाओं को रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने, आम लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं देने, सड़क और रेल कनेक्टिविटी मजबूत करने तथा स्वरोजगार और सौर ऊर्जा को बढ़ावा देने जैसे विषय शामिल हैं।
35 हजार से अधिक युवाओं को मिली सरकारी नौकरी
प्रदेश में भर्ती प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिए नकल विरोधी कानून लागू किया गया। सरकार के उपलब्धि दस्तावेज के अनुसार, पिछले पांच वर्षों में 35 हजार से अधिक युवाओं को सरकारी नौकरी मिली है। वहीं, मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना के तहत 38,550 से अधिक लोगों को लाभ मिला और 70,200 से अधिक रोजगार अवसर सृजित किए गए।
इसके अलावा, राज्य आंदोलनकारियों के लिए सरकारी नौकरियों में 10 प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण और महिलाओं के लिए 30 प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण का प्रावधान भी किया गया है।
आयुष्मान योजना से लाखों लोगों को मिला उपचार
स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में अटल आयुष्मान योजना के तहत प्रदेश में 63.32 लाख आयुष्मान कार्ड बनाए गए हैं। दस्तावेज के मुताबिक, 17.36 लाख से अधिक मरीजों को 3,717 करोड़ रुपये से अधिक के कैशलेस उपचार का लाभ मिला है।
राज्य में 207 प्रकार की पैथोलॉजी जांच निशुल्क उपलब्ध कराने के साथ हल्द्वानी में आधुनिक सरकारी कैंसर संस्थान के निर्माण और किच्छा में एम्स के सैटेलाइट सेंटर के कार्य में भी प्रगति दर्ज की गई है। दस्तावेज में एम्स सैटेलाइट सेंटर का 85 प्रतिशत कार्य पूरा होने की जानकारी दी गई है।
शिक्षा के क्षेत्र में डिजिटल सुविधाओं का विस्तार
शिक्षा के क्षेत्र में राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 लागू करने और राज्य को पूर्ण साक्षर घोषित किए जाने का उल्लेख किया गया है। इसके साथ ही 500 सरकारी माध्यमिक विद्यालयों में वर्चुअल कक्षाएं संचालित की जा रही हैं।
विद्यार्थियों को ऑनलाइन कोचिंग और छात्रवृत्ति जैसी सुविधाओं से जोड़ने के प्रयास भी किए गए हैं। उच्च शिक्षा के तहत पीएचडी करने वाले 100 मेधावी विद्यार्थियों को प्रतिमाह 5,000 रुपये की छात्रवृत्ति देने की मंजूरी का भी दस्तावेज में जिक्र है।
केदारनाथ-बदरीनाथ में विकास कार्यों को गति
प्रदेश में धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए केदारनाथ और बदरीनाथ धाम में मास्टर प्लान के तहत विकास कार्य किए गए हैं। बदरीनाथ धाम को आधुनिक आध्यात्मिक पहाड़ी कस्बे के रूप में विकसित करने के लिए 255 करोड़ रुपये की योजनाओं का उल्लेख है।
इसके अलावा, गौरीकुंड-केदारनाथ और गोविंदघाट-हेमकुंड साहिब रोपवे परियोजनाओं की आधारशिला रखे जाने की जानकारी दी गई है। कुमाऊं क्षेत्र में मानसखंड मंदिर माला मिशन के तहत 48 मंदिरों और गुरुद्वारों को धार्मिक सर्किट के रूप में जोड़ने की योजना भी शामिल है। दस्तावेज में 83 प्रमुख हिमालयी चोटियों को पर्वतारोहण अभियानों के लिए खोलने का भी उल्लेख है।
दिल्ली-देहरादून कॉरिडोर से कनेक्टिविटी को बढ़ावा
सड़क और परिवहन के क्षेत्र में दिल्ली-देहरादून इकोनॉमिक कॉरिडोर का निर्माण प्रमुख परियोजनाओं में शामिल है। दस्तावेज के अनुसार, 210 किलोमीटर लंबे इस कॉरिडोर पर 11,963 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं।
वहीं, ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल लाइन का 72.5 प्रतिशत कार्य पूरा होने और पंतनगर हवाई अड्डे के रनवे के विस्तार के लिए भूमि हस्तांतरित किए जाने का उल्लेख है। पर्वतीय क्षेत्रों में हेली सेवाओं का विस्तार करने की पहल भी की गई है।
तीन लाख से अधिक महिलाएं बनीं लखपति दीदी
महिला सशक्तीकरण के तहत लखपति दीदी योजना के माध्यम से तीन लाख से अधिक महिलाओं के लखपति दीदी बनने की जानकारी दी गई है। स्वयं सहायता समूहों और महिला उद्यमियों को प्रोत्साहित करने के लिए ऋण और बाजार तक पहुंच उपलब्ध कराने से जुड़ी पहल भी की गई हैं।
मुख्यमंत्री एकल महिला स्वरोजगार योजना के तहत 696 लाभार्थियों को 6.21 करोड़ रुपये हस्तांतरित किए गए। इसके अलावा, महिला स्वयं सहायता समूहों की सदस्यों को ड्रोन संचालन का प्रशिक्षण देने की पहल भी शामिल है।
सौर ऊर्जा क्षमता 1,027 मेगावाट के पार
ऊर्जा क्षेत्र में प्रदेश की स्थापित सौर ऊर्जा क्षमता 1,027 मेगावाट से अधिक हो गई है। दस्तावेज में बताया गया है कि वर्ष 2021-22 में यह क्षमता 439 मेगावाट थी।
पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना के तहत 42 हजार से अधिक रूफटॉप सोलर संयंत्र स्थापित किए जाने का उल्लेख है। इसके साथ ही मुख्यमंत्री सौर स्वरोजगार योजना के माध्यम से रोजगार के अवसर बढ़ाने पर भी जोर दिया गया है।
कृषि और पशुपालन से बढ़े स्वरोजगार के अवसर
ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए सेब और कीवी उत्पादन, मिलेट्स, ट्राउट मछली पालन और पशुपालन को प्रोत्साहित किया गया है। दस्तावेज के अनुसार, पिछले चार वर्षों में गौपालन, बकरी पालन और भेड़ पालन के माध्यम से 11,500 से अधिक लोगों को स्वरोजगार के अवसर मिले हैं।
इसके अलावा, प्रदेश के 27 उत्पादों को भौगोलिक संकेतक (जीआई) टैग मिलने का भी उल्लेख किया गया है। इन पहलों का उद्देश्य स्थानीय उत्पादों को पहचान दिलाने और ग्रामीण क्षेत्रों में आजीविका के अवसर बढ़ाने से जुड़ा है।
3.81 लाख करोड़ रुपये के पार पहुंची अर्थव्यवस्था
आर्थिक क्षेत्र में उपलब्धि दस्तावेज के अनुसार, वर्ष 2024-25 में उत्तराखंड का सकल राज्य घरेलू उत्पाद (जीएसडीपी) 3,81,889 करोड़ रुपये रहा। वहीं, वर्ष 2026-27 के लिए 1,11,703.21 करोड़ रुपये का बजट पारित किए जाने की जानकारी दी गई है।
निवेश के मोर्चे पर ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट में 3.56 लाख करोड़ रुपये के समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर और एक लाख करोड़ रुपये से अधिक के निवेश की ग्राउंडिंग का उल्लेख है। प्रदेश में स्टार्टअप, उद्योग और निवेश को बढ़ावा देने के लिए भी कदम उठाए गए हैं।
विकास के विभिन्न क्षेत्रों में दर्ज की गई प्रगति
सरकार के उपलब्धि दस्तावेज में रोजगार, स्वास्थ्य, शिक्षा, धार्मिक पर्यटन, सड़क और रेल कनेक्टिविटी, महिला सशक्तीकरण, कृषि और ऊर्जा सहित कई क्षेत्रों की प्रगति का ब्योरा दिया गया है। प्रस्तुत आंकड़े प्रदेश में संचालित योजनाओं और विकास कार्यों की स्थिति को दर्शाते हैं