उत्तराखंड में गुटखा और निकोटीन वाले पान मसाले पर एक साल की रोक, जानें सरकार ने क्यों लिया फैसला

देहरादून: उत्तराखंड में गुटखा, तंबाकू और निकोटीन युक्त पान मसाले को लेकर बड़ा फैसला लिया गया है। प्रदेश में ऐसे उत्पादों पर एक साल के लिए प्रतिबंध लगाया गया है। इस कदम का उद्देश्य लोगों के स्वास्थ्य की रक्षा करना और तंबाकू व निकोटीन के सेवन से होने वाले नुकसान को रोकना है।

खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन की ओर से जारी आदेश के तहत प्रतिबंधित उत्पादों के निर्माण, भंडारण, वितरण और बिक्री पर रोक लागू रहेगी। यह प्रतिबंध 13 अक्टूबर  से प्रभावी होकर अगले एक साल तक जारी रहेगा।

 

 

स्वास्थ्य को होने वाले नुकसान को देखते हुए फैसला

 

तंबाकू और निकोटीन का सेवन स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा माना जाता है। इनके इस्तेमाल से मुंह के कैंसर समेत कई गंभीर बीमारियों का जोखिम बढ़ सकता है। ऐसे में इन पदार्थों से बने उत्पादों की बिक्री और वितरण पर रोक लगाने का उद्देश्य लोगों को इनके दुष्प्रभावों से बचाना है।

 

किन उत्पादों पर रहेगी रोक?

 

प्रतिबंध के दायरे में तंबाकू और निकोटीन युक्त गुटखा, पान मसाला और ऐसे अन्य खाद्य उत्पाद शामिल हैं, जिनमें इन पदार्थों का इस्तेमाल किया जाता है। आदेश के अनुपालन के लिए संबंधित अधिकारियों को आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं।

 

हालांकि, बिना तंबाकू और निकोटीन वाले सभी पान मसाला उत्पादों पर भी प्रतिबंध लागू है या नहीं, यह संबंधित आदेश की शर्तों के आधार पर ही स्पष्ट होगा। प्रतिबंधित उत्पादों की बिक्री या भंडारण करने वालों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जा सकती है।

 

प्रदेश में इस फैसले के जरिए तंबाकू और निकोटीन युक्त उत्पादों के इस्तेमाल पर अंकुश लगाने तथा सार्वजनिक स्वास्थ्य की सुरक्षा पर जोर दिया गया है।

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