मजबूत होगा हिमाचल का स्वास्थ्य क्षेत्र, कोविड वैक्सीन की भी ज्यादा खेप मिलने की आस
शिमला। केंद्र सरकार के बजट से हिमाचल के हैल्थ सेक्टर में भी कई सौगातें मिलने की उम्मीद जग गई है। ऐसे में हिमाचल को नए हैल्थ एंड वेलनेस सेंटर मिल सकते हैं। बजट में इंटिगे्रटिड पब्लिक हैल्थ लैब बनाने का भी प्रावधान किया गया है। ऐसे में अगर हिमाचल को यह सौगात मिलती है, तो राज्य के सभी जिलों में एक-एक लैब खुल जाएगी। केंद्र सरकार ने बजट में 17,788 शहरी और 11,024 ग्रामीण क्षेत्रों में हैल्थ एंड वेलनेस सेंटर बनाए जाएंगे। हालांकि हिमाचल में अभी तक 736 सेंटर पहले से ही कार्यरत हैं। ऐसे में अगर हिमाचल को सेंटर मिलते हैं, तो यहां पर बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं मिलेगी।
बजट में देश के 11 राज्यों में 3,382 इंटिग्रेटिड पब्लिक हैल्थ लैब बनाने का भी प्रस्ताव रखा गया है। ऐसे में अगर हिमाचल को भी यह लैब मिलती है, तो सभी जिलों में एक-एक लैब खुल जाएगी और लोगों को इसकी सुविधाएं मिलेंगी। इंटिग्रेटिड हैल्थ इन्फार्मेशन पोर्टल सभी पब्लिक हैल्थ लैब से जुड़ जाएंगी, जिससे सभी का डाटा एक क्लिक पर मिल जाएगा और बीमारियों को रोकने में सहायता मिलेगी। इसके अलावा 15 हैल्थ आपातकाल ऑपरेशन सेंटर और दो मोबाइल अस्पताल भी देश में खुलने जा रहे हैं। ऐसे में हिमाचल को भी इनमें से कुछ मिल सकता है, तो सोने पर सुहागा होगा। कोविड वैक्सीन के लिए भी 35 हजार करोड़ रुपए का बजट मिला है। ऐसे में हिमाचल को और वैक्सीन मिलने की उम्मीद जगी है, जिससे निशुल्क वैक्सिनेशन का आयोजन किया जा सकता है।
कांगड़ा में भरे जाएंगे जेबीटी के 104 पद
काँगड़ा। हिमाचल प्रदेश के जिला कांगड़ा में जेबीटी के 104 पदों पर भर्ती होगी। इस दौरान सामान्य वर्ग से 38, आर्थिक कमजोर वर्ग से 13, सामान्य स्वतंत्रता सेनानी आश्रित से एक, अन्य पिछड़ा वर्ग से 17, अन्य पिछड़ा वर्ग आईआरडीपी से चार, अन्य पिछड़ा वर्ग स्वतंत्रता सेनानी आश्रित एक, अनुसूचित जाति से 19, अनुसूचित जाति आईआरडीपी चार, अनुसूचित जाति स्वतंत्रता सेनानी आश्रित से एक, अनुसूचित जनजाति पांच, अनुसूचित जनजाति आईआरडीपी से एक पद भरा जाएगा। इन पदों के लिए काउंसिलिंग डाइट कांगड़ा स्थित धर्मशाला के कार्यालय में 12 फरवरी को जिला कांगड़ा के अभ्यर्थियों के लिए होगी। इसके अलावा 13 फरवरी को अन्य जिलों के अभ्यर्थियों की काउंसिलिंग होगी।
कांगड़ा के उपनिदेशक प्रारंभिक शिक्षा मोहिंद्र कुमार धीमान ने बताया कि 31 दिसंबर 2013 तक जेबीटी का दो वर्ष का प्रशिक्षण और जेबीटी टेट पास करने वाले अभ्यर्थी काउंसिलिंग में भाग ले सकते हैं। भाग लेने वाले अभ्यर्थियों का नाम किसी रोजगार कार्यालय में पंजीकृत होना जरूरी है। उन्होंने बताया कि काउंसिलिंग के दौरान अभ्यर्थियों को अपने मूल प्रमाण पत्रों तथा इनकी एक सत्यापित प्रति साथ लानी होगी। कांगड़ा के अभ्यर्थियों के नामों की सूचियां संबंधित रोजगार कार्यालयों से प्राप्त हुई हैं, जिन्हें काउंसिलिंग के लिए पत्र भेजे जा रहे हैं। फिर भी यदि किसी अभ्यर्थी को समय पर बुलावा पत्र नहीं मिलता है तो वे 12 फरवरी को काउंसिलिंग में भाग ले सकते हैं।
केंद्रीय बजट को पूर्णतः मजदूर, कर्मचारी व किसान विरोधी : सीटू
सीटू राज्य कमेटी हिमाचल प्रदेश ने केंद्रीय बजट को पूर्णतः मजदूर, कर्मचारी व किसान विरोधी करार दिया है। यह बजट गरीब विरोधी है व केवल पूंजीपतियों को फायदा पहुंचाने वाला है। सीटू ने केंद्र सरकार को चेताया है कि केंद्र सरकार की मजदूर विरोधी नीतियों के खिलाफ आंदोलन तेज होगा व 3 फरवरी को मजदूर,कर्मचारी व किसान विरोधी बजट व चार लेबर कोडों के खिलाफ देशव्यापी प्रदर्शन होंगे।
सीटू प्रदेशाध्यक्ष विजेंद्र मेहरा व महासचिव प्रेम गौतम ने कहा है कि केंद्र की मोदी सरकार पूरी तरह पूँजीपतियों के साथ खड़ी हो गयी है व आर्थिक संसाधनों को आम जनता से छीनकर अमीरों के हवाले करने के रास्ते पर आगे बढ़ रही है। बजट में बैंक,बीमा,रेलवे,एयरपोर्टों,बंदरगाहों,ट्रांसपोर्ट,गैस पाइप लाइन,बिजली,सरकारी कम्पनियों के गोदाम व खाली जमीन,सड़कों,स्टेडियम सहित ज़्यादातर सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों का निजीकरण करके बेचने का रास्ता खोल दिया गया है। ईज़ ऑफ डूइंग बिजनेस के नारे की आड़ में मजदूर विरोधी लेबर कोडों को अमलीजामा पहनाकर यह बजट *इंडिया ऑन सेल* का बजट है। इस से केवल पूंजीपतियों,उद्योगपतियों व कॉरपोरेट घरानों को फायदा होने वाला है व गरीब और ज़्यादा गरीब होगा।
खुद को गरीबों की सरकार कहने वाली है। महिला मोदी सरकार गरीबों को खत्म करने पर आमदासशक्तिकरण व नारी उत्थान के नारे देने वाली केंद्र सरकार
ने गरीबों व महिलाओं को इस बजट में आर्थिक तौर पर कमज़ोर किया है। देश का सबसे गरीब तबका व सबसे ज़्यादा महिलाएं सामाजिक क्षेत्र में महत्वपूर्ण भूमिका अदा करने वाली मनरेगा व स्कीम वर्करज़ जैसी कल्याणकारी योजनाओं में कार्य करते हैं। इन क्षेत्रों के बजट में भारी कटौती की गई है। सरकार ने मनरेगा के बजट में 41 प्रतिशत कटौती कर दी गयी है जबकि देश में कोरोना महामारी के कारण उद्योग बन्दी व अन्य क्षेत्रों में काम बन्दी होने से मजदूरों का गांव की ओर रिवर्स माइग्रेशन हुआ है व बेरोजगार जनता के लिए मनरेगा रोज़गार का सबसे बड़ा साधन बनकर उभरा है। मनरेगा में बजट कटौती से देश में बेरोज़गारी और बढ़ेगी। कोरोना वारियर की बेहतरीन भूमिका अदा करने वाले आंगनबाड़ी कर्मियों के बजट में सरकार ने 30 प्रतिशत कटौती कर दी है। बच्चों की शिक्षा में अहम योगदान देने वाली मिड डे मील योजना के बजट में 1400 करोड़ रुपये की कटौती कर दी गयी है। जॉब व स्किल डेवेलपमेंट के बजट में 35 प्रतिशत की कटौती कर दी गयी है। सरकार ने 15वें वित्त आयोग की सिफारिश अनुसार कई केंद्रीय योजनाओं को खत्म करने का ऐलान किया है। देश में सबसे कम वेतन लेने वाले योजना कर्मियों जिन्हें सरकार द्वारा घोषित न्यूनतम वेतन भी नहीं मिलता है व जिन्हें केंद्र सरकार एक हज़ार से चार हज़ार रुपये वेतन प्रतिमाह देती है,उनके बजट में भारी कटौती की गई है जबकि खजाना खाली होने का रोना रोने वाली केन्द्र सरकार ने पूंजीपतियों से साढ़े दस लाख करोड़ रुपये के बकाया टैक्स को वसूलने पर एक शब्द तक नहीं बोला है। सरकार ने पिछले पांच वर्षों में योजनकर्मियों के बजट में लगातार कटौती की है जबकि दूसरी ओर पूंजीपतियों के टैक्स लगातार घटाकर उन्हें भारी राहत दी गयी है। टैक्स चोरी करने वाले पूंजीपतियों को सरकार ने पिछले पांच वर्षों में लगातार संरक्षण दिया है जोकि बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है।
