बिग ब्रेकिंग : यूपीसीएल! वाह रे, वाह! ऊर्जा विभाग!
तीन तीन और चार-चार आईएएस और कड़क मंत्री की नाक के नीचे!
स्क्रेप नीलामी में भी बारे न्यारे?
ये तो कबाडी़ से भी बडे़ कबाडी़ हैं!
न प्रोक्योरमेंट पालिसी, न शासनादेश और न ही हाईकोर्ट का अनुपालन!
क्या निरस्त होगी आज यह नीलामी प्रक्रिया?
(ब्यूरो चीफ सुनील गुप्ता)
देहरादून। उत्तराखंड के सीएम पुष्कर के लिए भले ही भ्रष्टाचार और घोटालेबाजों पर लगाम लगाना दुष्कर हो परंतु इन घोटालेबाजों और भ्रष्ट अधिकारियों के लिए कुछ भी दुष्कर नहीं हैं। ये अपनी आदत से मजबूर हैं! यूँ तो कई दर्जन घोटाले और भ्रष्टाचार के मामले ठण्डे बस्ते में पडे़ जिसका ही परिणाम है कि आर्थिक तंगी से गुजर रहा प्रदेश कराह रहा है और जनता इनकी करनी भुगतते भुगतते त्रस्त है। सरकार के इन निगमों भ्रष्ट अधिकारियों की अथाह अकूत सम्पत्ती दिन दोगुनी रात चौगुनी की कहावत के अनुसार बढ़ती ही जा रही है।
ऐसा ही एक और मामला प्रकाश में आया है जिसके अनुसार आज यदि इस टेण्डर प्रक्रिया और आक्शन को न रोका गया तो यूजेवीएनएल की तरह ही एक और घोटाले को अंजाम देकर गुल खिलाया जा सकता है और फिर चहेते निविदादाता को साँठगाँठ के चलते करोंडों करोंडो़ का स्क्रेप मैटीरियल मैनेजमेंट द्वारा मात्र लाखों में खुर्द बुर्द कर बारे न्यारे कर लिए जायेंगे!
सूत्रों के अनुसार आज यूपीसीएल के मैटीरियल मैनेजमेंट के अधीक्षण अभियंता द्वारा ई-निविदा सूचना विशिष्टीकरण संख्या 11/ एस ई (एम एम)/221-22 दिनांकित 21-8-2021 की नीलामी के लिए आज निविदा प्रस्तुत करने की तिथी 9 सितम्बर है तथा कल 10 सितम्बर 2021 को उक्त आनलाईन निविदा 4 बजे खोली जायेगी।

ज्ञात हो कि उक्त निविदा के अनुसार विद्युत भण्डारण खंड देहरादून, हल्द्वानी, रुड़की, हरिद्वार, ऋषिकेश, कोटद्वार, टिहरी, काशीपुर, रुद्रपुर, काशीपुर, टनकपुर, अल्मोडा़ एवं पिथौरागढ़ सहित नौ जगह के भण्डारगृहों का स्टील स्क्रैप (मेलटेबल आयरन /एम्पटी ट्रांसफार्मर टेक / प्लेट / जीआई वायर, गैलोनाइज्ड स्क्रैप इत्यादि की नीलामी जहाँ है- जैसी है के आधार पर होनी है।
उल्लेखनीय है कि साडे़ पाँच करोड़ मैट्रिक टन इस बहुमूल्य स्क्रैप के ई आक्शन में जिस प्रकार निगम को चूना और अपनी अपनी जेबों में कान्ट्रेक्टर से साँठगाँठ कर चाँदी बटोरने की जो बिशात बिछाई गयी है उसमें माननीय उच्च न्यायलय के आदेशों की अवमानना के साथ साथ सचिव उत्तराखंड (वित्तं) एवं विभाग की प्रोक्योरमेंट पालिसी का जम कर दोहन और दमन करते हुये मनमाने और अपने चहेते कान्ट्रेक्टर को क्वालीफाई बनाने तथा और को अयोग्य ठहराने का जो आपत्तिजनक खेल खेला जा रहा है उस पर भी छोटे कान्ट्रेक्टरों और कुछ निविदादाताओं ने आपत्ती करते हुये बताया कि यदि जहाँ है जैसी है पालिसी के तहत ई आक्शन होना है तो उसी जिला स्तर पर हो ताकि अधिक से अधिक टेण्डर भरे जा सके और तद्अनुसार निगम को कम्पटीशन में स्क्रैप की अधिक कीमत मिल सके। इससे अधिक छोटे ठेकेदारों को भी लाभ व्यवसाय मिलेगा। परंतु ऐसा दर्द “इन माले मुफ्त दिले बे रहम” तथाकथित घोटालेबाज अफसरों को कहाँ? इनकी भला से “इनका काम बनता भाड़ में जाये जनता और निगम”। देखिए माननीय उच्च न्यायलय के एक प्रकरण में किये गये आदेश इस पर भी लागू होते हैं…



नीचे की इस शिकायत से नाम हटाया जा रहा है ताकि उससे खुंदक न पूरी हो…

मजे की बात तो यह है कि इन ऊर्जा निगमों और उरेडा पर तीन तीन और चार चार आईएएस क्रमशः चेयरमैन, सचिव, अपर सचिव व एमडी के पद पर सुशासन और भ्रष्टाचार पर जीरो टालरेंस के लिए वर्तमान में पाबंदे तैनाती में है तथा एक कड़क और जनता, राज्य तथा छोटे ठेकेदारों के पक्षधर मंत्री डॉ. हरक सिंह राबत भी जिम्मा सम्हाले हुये हैं फिर भी इतना दुस्साहस? ऐसे में इस प्रश्न का भी उठना लाजमी ही है कि बंदर बाँट में कहीं सभी शामिल तो नहीं?
देखना यहाँ गौर तलब होगा कि धामी सरकार, शासन और निगम के वफादारों के कानों पर जूँ रेगती है या नहीं? और उक्त भ्रष्टाचार की बू वाली उक्त हानि कारक ई-निविदा निरस्त की जाती है अथवा नहीं? क्या यूपीसीएल इस स्क्रैप की निविदा को अलग अलग जिलों में बाँट कर सचिव वित्त के लेटेस्ट अप्रैल 2021 के आदेशों का अनुपालन करते हुये सुधार लायेगा?
वैसे यहाँ यह भी स्मरण दिलाना उचित होगा कि बिना आवश्यकता, केवल अपनी कमाई हेतु बिकास नगर, चकराता, कालसी, त्यूनी और ऋषिकेश में एबीसी केविल के 18 करोड़ के दस काम चहेते ठेकेदार को साँठगाँठ के चलते निदेशक परिचालन और सीएण्ड पी चीफ द्वारा गड़बड़झाला करके दिये जा चुके हैं जिसका भण्डाफोड़ भी पहले ही किया जा चुका है परंतु तत्कालीन सचिव ऊर्जा और एमडी ने जानबूझ कर कार्यवाही न करके मामले को ठण्डे बस्ते में डाले रखा और अन्ततः निदेशक महोदय हाल ही में सेवा निवृत्त भी हो गये…! इसी प्रकार तथाकथित यूजेवीएनएल के चहेते एमडी पर भी कबाड़ प्रकरण को भी चुपचाप सुपुर्दे खाक करवा दिया गया।
प्रभारी निदेशक एचआर एवं चीफ सीएण्डपी के गड़बड़ झालों का तो कहना ही क्या, उनके शीशेमें सबके सब उतर ही रखें हैं फिर चाहे वह 60-70 करोड़ का क्रियेट पाॅवर परचेज प्रकरण हो या रिषीकेश हेतु दो ट्रांसफार्मर परचेज में छः लाख बीस हजार को जीरो का खेल खेल कर बाँसठ लाख में क्रय कर निगम को चूना लगाने के प्रकरण, हो या फिर आनलाईन भर्ती परीक्षा अथवा अन्य दर्जनों घालमेल और भ्रष्टाचार के मामले रहे हों! यदि यही हाल और रवैया रहा तो उक्त महाशय भी बडी़ शान से हाथ झाड़ते हुये दिसम्बर माह में रिटायर हो घर चले जायेंगे!?
एक ओर निगम घाटे में दिखाया जा रहा है और दूसरी ओर उपभोक्ताओं पर दरों की वृद्धि की मार!! यही नहीं दस दस साल जूनियर्स का प्रमोशन और सीनियर का नजर अंदाज करना और आड़ आईने में उतारे हुये एमडी की आड़ आदि आदि!
