चिक्कमगलुरु : कर्नाटक में किसानों के लिए जंगली जानवरों से फसल बचाना स्वभाविक रूप से एक बड़ी चुनौती है। कुछ इलाकों में किसानों ने हाथियों से अपनी फसल की सुरक्षा के लिए नया मास्टर प्लान बनाया है जिसके तहत अब खेतों और बगीचों में माइक सेट और डीजे, सिस्टम लगाये जा रहे हैं।
किसानों ने लिखे अधिकारियों को पत्र
इनमें से अधिकांश किसानों ने अधिकारियों को कई बार पत्र लिखे लेकिन उन्हें इस सनस्याओंसे छुटकारा नहीं मिला। उन्होंने अब हाथियोंसे छुटकारा पाने के लिए एक नया मास्टर प्लान बनाया है।
बिकनहल्ली, हम्पापुर व चिक्कमगलुरु तालुक के किसान हाथी को लेकर काफी परेशानी में हैं। किसान अब यार्ड व बगीचों में माइक सेट तथा डीजे, सिस्टम लगा रहे हैं ताकि हाथियों से अपनी फसल की रक्षा कर सकें। किसानों का मानना है कि हाथियों के आने से खेतों में तबाही मच जाती है।
इस अनूठे प्रयोग के बाद से हाथियों काे खेतों से दूर रखने में कामयाबी हासिल हुई है। कुछ बागों में पहले से ही पेड़ों में माइक लगा हुआ है। कुदिनाडु मूडीगेरे तालुक में, पिछले कई वर्षाें से जंगली हाथियों का आतंक सा है। एक हाथी ने चार लोगों की जान भी ले ली है।
चिक्कमगलुरु में हम्पापुर और बीकनहल्ली सहित आसपास के गांवों में हाथी अब अधर में हैं। किसान पहाड़ के आसपास के जंगलों पर हमला किए बिना डीजे की आवाज पर चले गए हैं। आसपास के खेतों में तीस से अधिक अभ्रक लगाए गए हैं।
जंगली जानवरों को भगाने के लिए लगातार लोगों के बात करने, जानवरों के चिल्लाने, माइक पर आतिशबाजी करने की आवाजें सुनाई देती हैं। कुल मिलाकर जंगली जानवरों से त्रस्त किसान कई बार अधिकारियों से गुहार लगा चुके हैं।
पर हाथियों को पता है कि यह माइक हमारा यमराज बनने जा रहा है। इसलिए स्थानीय लोगों विशेषकर किसानों की इच्छा है कि वन विभाग जंगली जानवरों और हाथियों के जीवन और फसल दोनों को वैज्ञानिक रूप से संरक्षित करे।
