टनकपुर-पिथौरागढ़ राष्ट्रीय राजमार्ग 33 घंटे बाद यातायात के लिए बहाल

नैनीताल।  उत्तराखंड में पहाड़ की लाइफ लाइन कहे जाने वाला टनकपुर-पिथौरागढ़ राष्ट्रीय राजमार्ग 33 घंटे बाद सोमवार को यातायात के लिये खुल गया है। तीन दिन से फंसे लोगों व यात्रियों ने आखिरकार राहत की सांस ली।

जिला प्रशासन की ओर से आज सुबह राजमार्ग खुलने की घोषणा की गयी। उपजिलाधिकारी हेमंत वर्मा की ओर से मौका का जायजा लेने के बाद यातायात सुचारू किया गया। मुख मार्ग बंद होने से पहाड़ी इलाकों में जरूरी सामानों की किल्लत होनी शुरू हो गयी थी।

टनकपुर से पिथौरागढ़ को जोड़ने वाला राष्ट्रीय राजमार्ग भारी भूस्खलन के चलते शनिवार रात को बंद हो गया था। स्वाला व अमोड़ी गांव के बीच यहां भारी मलबा व बोल्डर आ गये व सुरक्षा दीवार ढह गयी। जिससे यातायात पूरी तरह से बाधित हो गया। पहाड़ व मैदान को जाने वाले वाहन यहां 33 घंटे तक फंसे रहे।

जिला प्रशासन की ओर से राजमार्ग को खुलवाने के लिये युद्धस्तर पर कार्यवाही की गयी। दोनों ओर से जेसीबी मशीनों को लगाया गया। दोनों मशीनों की ओर से लगातार मलबा हटाने का काम किया गया। प्रशासन की ओर से यहां फंसे लोगों व यात्रियों के लिये प्रशासन खाने-पीने व रहने की व्यवस्था भी की गयी।

इस दौरान एक बुरी खबर आयी। बताया जा रहा है कि जाम में एक एम्बुलेंस के फंस जाने से उपचार के अभाव में बीमार बच्चे की मौत हो गयी। साथ ही कई आवश्यक सेवा के वाहन भी फंसे रह गये। आज पुलिस व प्रशासन की ओर से धीरे-धीरे वाहनों को निकाला गया।

जिला प्रशासन की ओर से अंदेशा जताया गया है कि अभी पहाड़ी से पत्थर गिरने का खतरा बना हुआ है। प्रशासन की ओर से लोगों से अपील की गयी है कि आवश्यक होने पर ही यात्रा करें।

दूसरी ओर कुमाऊं में डेढ़ दर्जन मोटर मार्ग अभी भूस्खलन के चलते बंद पड़े हुए हैं। पिथौरागढ़ में चीन सीमा को जोड़ने वाला घारचूला-तवाघाट-गूंजी बार्डर मार्ग भी अवरूद्ध है। नैनीताल व भवाली को जोड़ने वाला राजमार्ग सड़क ढ़़ह जाने व मलबा आने से अभी नहीं खुल पाया है।

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