मोटे चावल पर 20 प्रतिशत का निर्यात शुल्क, टुकड़ा चावल के निर्यात पर पाबंदी

दिल्ली। सरकार ने खरीफ मौसम में धान की पैदावार अनुमान से कम होने की संभावनाओं के बीच चावल के निर्यात पर गुरुवार को कुछ पाबंदियां लगाने की घोषणा की।

सरकार ने धान और विभिन्न प्रकार के मोटे चावल के निर्यात पर 20 प्रतिशत की दर से शुल्क लगाने के साथ ही टुकड़ा चावल के निर्यात पर पाबंदी लगा दी है। ये फैसले 09 सितंबर से लागू होंगे।

विदेश व्यापार महानिदेशालय द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार टुकड़ा चावल (एचएस कोड 1064000) के तहत अब तक निर्यात के लिए मुक्त टुकड़ा चावल को संशोधित निर्यात नीति के तहत प्रतिबंघित सूची में डाल दिया गया है। डीजीएफटी ने स्पष्ट किया है कि यह आदेश इस समय निर्यात के लिए लादी जा रही चावल की खेप या सीमा शुल्क विभाग को सुपुर्द की गयी खेप या उस खेप पर लागू नहीं होगी, जहां शिपिंग बिल भर दिया गया है और लगान के लिए जहाज ने लंगर डाल दिया है।

चावल उद्योग के आंतरिक सूत्रों का दावा है कि इस बार खरीफ की फसल में धान का उत्पादन अनुमान से कम होने के आसार के बीच यह निर्णय लिया गया है।

सूत्रों के अनुसार विश्व में खाद्य कीमतों में तेजी के बीच सरकार चावल जैसे रोजमर्रा के उत्पादों की घरेलू कीमतों को लेकर संवेदनशील है।

चावल पर निर्यात शुल्क लगाए जाने संबंधी गुरुवार को जाीरी सीमा शुल्क विभाग की अधिसूचना में कहा गया है, “यह अधिसूचना 09 सितंबर, 2022 से लागू होगी।

अधिसूचना के अनुसार, बिना दला चावल (धान ), भूरा चावल और आधा दले या पूरा दले धान ( चावल ) पर 20% निर्यात शुल्क लगाया जाएगा। यह निर्णय पॉलिश किए हुए या ग्लेज्ड (बासमती और उसना चावल को छोड़ कर)सभी तरह के चावल पर लागू होगा।

देश में खाद्य कीमतों की बढ़ती कीमतों के मद्देनजर सरकार द्वारा गेहूं के आटे के निर्यात को प्रतिबंधित करने के बाद चावल के संबंध में यह कदम उठाया गया है। सरकार ने पहले गेहूं के निर्यात पर रोक लगा दी थी क्योंकि रूस और यूक्रेन के बीच सैन्य संघर्ष के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजारों में प्रमुख खाद्यान्न की कीमतें बढ़ने लगी थीं।

कृषि क्षेत्र के एक विशेषज्ञ ने कहा कि इस सीजन में धान का उत्पादन उम्मीद से कम हो सकता है। इससे कीमतों में बढ़ोतरी हो सकती है। सरकार का फैसला एहतियाती है।

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