मौत को दावत देते ये यूपीसीएल के नंगे तारों वाले ये पोल : एक बेजुबान पक्षी की जान लेने के बाद भी नही चेते अधिकारी

खंभों पर 11 हजार वोल्ट का करंट क्यों न फैले, जब लापरवाही हो ऐसी?

नंगे तार बिना इंसुलेटर के ही डाल दिये गए!

क्या यह सरकार के  दोहरे मानदण्ड को नहीं दर्शाते?

देहरादून। उत्तराखंड पावर कार्पोरेशन की लापरवाही और काम करने की प्रणाली देखते ही बनती है इनकी लापरवाही के कारण एक बेजुबान पक्षी पोल मेँ फैले करंट से मौत के मुख में समा गया और ना जाने कितने लोग और जानवर करंट का झटका खाखा कर इसकी  चपेट में आते आते बच गए क्यूंकी उनकी किस्मत अच्छी थी। बात घनी अबादी बाले क्षेत्र जीत मार्केट, डोभाल चौक के पास  की है जहां  11हजार वोल्ट के करंट बाली लाईन जिस तरह से खंभों पर डाली गयी है उससे यूपीसीएल के अभियन्ताओं की काबलियत साफ दिखाई पड़ती है की हाई करंट बाले तारों को खंभो पर लगे इंसुलेटर मे ना डाल कर सीधे लोहे के खंभो पर डाल दिया गया है जिससे लाइन लॉस के साथ साथ करंट भी फैल रहा है। तारों पर दौड़ता हाई वोल्टेज करंट ना जाने कब कोई बड़ी घटना को अंजाम देदे और हादसा हो जाए तथा धाकड़ धामी सरकार की  छवि व कुशल प्रबंधन पर प्रश्न चिन्ह लग जाए?

वैसे भी इनके कुशल प्रबंधन तथा लाडले ऊर्जा विभाग के यूपीसीएल के सबसे बेहतर एमडी एवं खासम खास एक निदेशक जिनको कार्यकुशलता के लिए ही हजारों करोड़ कि आरडीएसएस स्कीम के कुशल क्रियानवयन के लिए  विशेष रूप से सारे नियमों को बलाए ताक रखते हुये इन्हें आय से अधिक करोड़ों करोड़ की नामी बेनामी सम्पत्तियों के उजागर होने के पश्चात भी सतर्कता विभाग की जांच को निक्षेपित करते हुये दो वर्ष का सेवा विस्तार भी  दिया जा चुका है जबकि अनेकों अन्य अधिकारियों और को भृष्टाचार पर जीरो टालरेंस भेट चढ़ा कर वाहवाही लूटी जा चुकी है। क्या यह सरकार के दोहरे मानदण्ड को नहीं दर्शाता?

ज्ञात हो कि यह कोई ऐसा एक मामला ही नही है ऐसे तो अनेकों कबीले तारीफ काम है जो गुल खिला रहे हैं ये तो लोंगों की किस्मत अच्छी है जो बे हादसे के शिकार नही हुये वरना यूपीसीएल के अधिकारियों ने कोई कोर कसर नही छोड़ी है।

उल्लेखनिए तो यहाँ  यह की जिस लाइन लॉस की दुहाई देकर यूपीसीएल बिजली की दरों मे बढ़ोत्तरी कर उपभोक्ताओं पर थोपता है उसकी रोकथाम में इनकी गम्भीरता और कुशल प्रबंधन  यहाँ साफ दिखाई दे रहा है।

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