करोड़ो की सरकारी जमीन लाखों के खेल में हरि कृपा से हुई खुर्द-बुर्द : सरकार हारी

जाते जाते कैसे कर गये आबंटित सीलिंग की करोडों रुपये की ढाई बीघा जमीन दुरुस्ती के नाम पर खुर्द-बुर्द ?

कडक डीएम और धुरंधर सीएम की सरकार में बेधडक एसडीएम के लिए न नियम, न कानून तो कमिश्नर के आदेश ही क्या ?

शिशु शमशान पर तत्कालीन प्रधान के कार्यकाल से चल रहा था राजकीए महाविद्यालय भी खटाई में ?

वादा निभाने के चक्कर में नए विवादों को जन्म दे गए छोटे सरकार !

डीएम साहब संज्ञान लीजिये!

(ब्यूरो चीफ सुनील गुप्ता की पडताल में हुआ खुलासा)

देहरादून। अभी तक तो सरकार से लेकर सुप्रीमकोर्ट ही उत्तराखंड में भूमाफिया की जमीनों की हेराफेरी को लेकर दर्ज हो चुकी हजारों एफआईआर को लेकर चिंतित नजर आ रही थी और सरकारी जमीनों के खुर्द-बुर्द होने से बचाने के लिए जबतब कड़े कड़े फरमान जारी होते रहते थे किन्तु इस बडे खेल के पीछे किन-किन की संलिप्तता और सहभागिता होती है इस पर कभी भी ध्यान देने की शायद ज़मीनों के मामलों में  जमीनी हकीकत पर प्रयास ही नहीं किये गये तभी तो राजस्व विभाग के अधिकारी स्वयं ही  रक्षक से भक्षक बन बारे न्यारे के  खेल खेल रहे हैं। ऐसा ही एक और हैरत अंगेज मामला राजधानी देहरादून का प्रकाश में आया है जिसे देख कर लगता है कि रक्षकों के भक्षक बनने के पीछे या तो अप्रत्यक्ष शह और संरक्षण है या फिर व्यवस्था ही अपंग है तभी इन “हरि… – गिरी” की कृपा भूमाफियाओं पर बरस रही है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार हमारी पडताल में जो तथ्य उजागर हुये हैं उसके अनुसार सहायक कलैक्टर प्रथम श्रेणी / परगनाधिकारी सदर देहारादून के द्वारा राजस्व मौजा नत्थनपुर (परवादून) के द्वारा वाद संख्या 40 / 2024-25 अन्तर्गत धारा 33/39 भू-राजस्व अधिनियम सुरजीत कौर आदि बनाम सरकार में पारित दिनां 16 अप्रैल 2026 को पारित आदेश को देखकर यकीन होने लगा है कि है कि न खाता न बही जो ये कह दें और कर दें वही सही! तभी तो अपनी दुरूस्ती की चिंता न करते हुए भिज्ञ होते हुए भी कि उक्त सीलिंग  के खाते से  वर्ष 1976 मे आवंटित पट्टों से बची हुई सीलिंग अर्थात सरकार की भूमि  है जिसकी  दुरूस्ती तो क्या उसको छूने की भी शक्ति साहब को नहीं है फिर भी साहब तो साहब और वह भी “हरि… गिरि ” धडल्ले से पृथक कर  बिना रकवा स्पष्ट किए पूरा नम्बर की ही अभिलेखों में दर्ज करने का परवाना भी जारी कर गये? यूँ तो चर्चा तो यह भी है की  “हरि..” की कृपा हर उस जगह वारसी जहाँ – जहाँ रहे?  यहाँ तो यह भी बताया जा रहा है उक्त आदेश 23 अप्रैल को चर्चा में आया जबकि आदेश की तिथि 16 अप्रैल दर्शाई गयी है ? क्यूँकि साहब जुबान के बहुत पक्के थे अगर वचन दे दिया तो ऐन केन प्रकरेण निभाना भी जानते हैं। वैसे प्रायः देखने को यही मिलता है कि ट्रांसफर आदेश आने के उपरांत कोई भी अधिकारी आरोपों में फसने के डर से निर्णय नहीं सुनाता है परंतु “जा पर कृपा इन हरि की होई……!” हांलाँकि पीसीएस अफसरों के ट्रांसफर आदेश 17 अप्रैल को आये हैं।

उल्लेखनीय यहाँ यह भी है सरदार दिलीप सिंह की जमींदार की भूमि सीलिंग में आ चुकी थी तथा अन्य आवंटियों के साथ साथ राम चन्दर को भी आवंटित हुई थी तथा स0 दलीप सिंह की पुत्रवधू के पास सीलिंग से बची हुई भूमि खसरा नम्बर 719 का आंशिक भाग था जबकि उक्त आदेश में खाता संख्या 04229 के पूरे खसरा 719 में बने राजकीय प्राथमिक विद्यालय का नाम पृथक कर पूरा खसरा जो सीलिंग का है को भी मुख्तारे आम सागर बोरा व अर्जुन सिंह के नियम विरुद्ध शपथ पत्रों के आधार पर दुरूस्ती किये जाने के आदेश पारित कर दिए और खसरा नम्बर 720 पर विद्यालय का नाम दुरुस्त किये जाने के आदेश पारित कर दिए गया।

उक्त आदेश से प्रतीत होता है कि उक्त राजकीय विद्यालय मोबाईल वैन के रूप में जिसे एसडीएम साहब ने बिना किसी उचित आधार के ही खसरा संख्या 720 में चलायमान कर दिया और आवंटी रामचन्दर के वारिसों का जिनका निरंतर कब्जा चला आ रहा है से नये विवाद की स्थित भी उत्पन्न कर दी गयी ?

ज्ञात हो उक्त खसरे 719 व 720 में से कितना – कितना रकवा दुरूस्त किया गया है यह साईलेंट रखा गया जिससे कब्जे को लेकर नये वाद विवाद होने की सम्भावना भी उत्पन्न हो गयी है।

मजेदार बात यहाँ यह भी प्रतीत हो रही है कि अपर आयुक्त गढवाल का आदेश दिनांकित 23-02-2026 भी “हरि” साहब के संज्ञान मे आ चुका है जो भी इसी भूमि से सम्बंधित बताया जा रहा है की भी अनदेखी की गयी।

देखना येहान गौर तलब होगा कि हमारी पड़ताल मे उजागर हुये सरकारी ज़मीनों के खेल पर उच्च स्तरीय जांच होगी और  क्या सरकारी / सीलिंग की भूमि को एक सरकारी जिम्मेदार पद पर आसीन सहायक कलैक्टर प्रथम श्रेणी के द्वारा बिना अधिकार अनुचित रूप से खुर्द-बुर्द की गई करोडों की कीमती जमीन के किए जाने के गम्भीर अपराध पर कडक छवि वाले जिलाधिकारी सविन वंसल एफआईआर दर्ज कराकर दूध का दूध और पानी का पानी करेंगे और धुरंधर धामी सरकार के शासन में किसी कडे एक्शन अथवा स्व संज्ञान लेते हुए उच्च स्तरीय जांच व कार्यवाही की संस्तुति करेगें अथवा यूं ही सरकारी जमेनों का खेल खेला जाता रहेगा?

देखिये गजब का आदेश और कुछ …..

 

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