यूपीसीएल के पूर्व एमडी का दबदबा अभी भी या टूटेगा भ्रम ?
लाडले जेई के लिए भारी पडेगी बेरोजगारी व प्रोन्नतियों पर ग्रहण वाली नई परम्परा?
शासन ही नहीं इन्हें भी आती है एक्सटेंशन की विशात बिछाना!
(ब्यूरो चीफ)
देहरादून। विगत कुछ वर्षों से उत्तराखंड में चहेते अधिकारियों के सेवा विस्तार के खेल से प्रदेश में जहाँ भ्रष्टाचार और घोटालों की बाढ आई है उसे देख कर लगता है कि अनुभवों, आवश्यकताओं एव विशेषज्ञता का तो बहाना है केवल खाईबाडी की ट्वीनिंग को निरंतर बनाये रखना ही उसके पीछे की मंशा है!
इस सेवा विस्तार की परम्परा ने जहाँ सक्षम, योग्य व कुशल अधिकारियों व कर्मचारियों के मनोवल को हताशा में बदला है वहीं दूसरी ओर लगन परिश्रम व ईमानदारी से कार्य करने वालों को आगे बढने और प्रमोशन के सपने संजोए रखने की ललक को तो समाप्त किया ही है साथ ही साथ बेरोजगारी को दूर करने के नारों और वादों पर भी ग्रहण लगाया है।
ज्ञात हो कि अभीतक तो उत्तराखंड शासन के द्वारा ही आये दिन वरिष्ठ स्तर के अधिकारियों और मुख्य अभियंताओं को ही परियोजना निदेशक, प्रबंध निदेशक अथवा डायरेक्टर के पदों पर प्रभारी व्यवस्था के रूप में नियुक्ति व सेवा विस्तार का ही खेल धडल्ले से “खाओ खिलाओ” के आधार पर “पे माईनस पेंशन” और भी बहुत कुछ अथवा अतिरिक्त प्रभार दिए जाने का चलता आ रहा है किन्तु अब “खरबूजे को देख अगर खरबूजे रंग न बदले” तो भला संगत का क्या असर और ‘तू डाल डाल मैं पात-पात” की कहावत भी तो है? ऐसा ही एक और सेवा विस्तार दिए जाने के लिए की जा रही कबायद का अजीबोगरीब मामला उत्तराखंड पावर कारपोरेशन (यूपीसीएल) का सामने में आ रहा है जो शायद एक नई कुप्रथा और प्रोन्नतियों बेरोजगारों के सपनों पर ग्रहण ही लगाने में कारगर होगी!
सूत्रों की अगर माने तो यह कबायद किसी चीफ इंजीनियर या जीएम के सेवा विस्तार के लिए नहीं बल्कि एक जेई स्तर के अभियंता की है जो काफी समय से किच्छा (ऊधम सिंह नगर) के उपखण्ड अधिकारी के रूप में प्रभारी के रूप में कार्य देखते चले आ रहे हैं क्यूँकि तमाम सहायक अभियंताओं के होते हुए इन पर पूर्व एमडी का संरक्षण अभी भी बरकरार है। पूर्व एमडी भले ही कितने भ्रष्टाचारों और घोटालों के विवाद में घिरे रहे हो उनका दबदबा अभी भी बरकरार है बिना उनकी मर्जी और इच्छा के यूपीसीएल तो क्या शासन में भी पत्ता तक नहीं हिलता है? क्यूँकि जनाब महाबली जो ठहरे और फिर अकूत सम्पत्तियो के एम्पायर भी तो हैं ही! हांलाँकि महाबली यादब साहब लगभग दो साल के सेवा विस्तार के बाद अभी भी “जल बिन मछली” की तरह तडपते हुए किसी न किसी तख्ते ताज को हासिल करने में लगे हुये बताये जा रहे हैं फिर चाहे एडवाईजर की ही कुर्सी क्यूँ न हो?
उलेखनीय होगा कि यदि आज 30 अप्रैल को सेवा निवृत्त होने वाले किच्छा उपखणड प्रभारी दिनेश गुरुरानी को पूर्व केन्द्रीय मंत्री व नैनीताल सांसद अजय भट्ट के पत्रांक 2091/ सां/ लो. सभा/2026 दिनांकित 05-03-2026 की चिठ्ठी जिसमें एक वर्ष के सेवा विस्तार दिये जाने की सिफारिश के साथ साथ कुछ उपलब्धियाँ भी प्रभारी महोदय के कार्यकाल की गिनाई गयीं है। इन उपलब्धियों में विगत चार वर्षों में बिजली चोरी, लाईन लास कम करना तथा 72% स्मार्ट मीटर स्थापित कराने जैसे कार्यों का उल्लेख देवभूमि व्यापार मंडल, किच्छा के अनुरोध पत्र सं. 53 दिनांकित 5 मार्च 2026 भी संलग्न किया गया है ताकि क्षेत्र की जनता की माँग प्रदर्शित हो।



मजेदार बात यहाँ यह भी है इन महाशय की जिन उपलब्धियों को आधार बनाते हुये सेवा विस्तार की सिफारिश सांसद महोदय कर रहें हैं क्या उनके पीछे की असल कहानी को भी जाँचने व परखने की कोशिश की गयी की गयी ? अथवा यूँ ही जो आया उसकी सिफारिश कर यूपीसीएल प्रबंधन को एक नयी कुप्रथा डालने के लिए बाधा में लाकर खड़ा कर दिया! सांसद महोदय शायद यह भूल गये कि उन्हीं की भाजपा की डबल इंजन सरकार नित बेरोजगारों और भ्रष्टाचारियों के विरुद्ध नारे और आश्वासन देकर लोक लुभावन करती है वहाँ उनका यह सिफारिशी पत्र नीति विरुद्ध या बाधक नहीं साबित होगा? या फिर यूपीसीएल प्रबंधन के लिए मुसीबत नहीं बनेगा?
गौरतलब है कि अगर यह उपलब्धियाँ केवल इन महाशय की ही रही हैं तो शेष अन्य सभी निकम्मे और नालायक या अक्षम हैं अथवा पूर्व एमडी के द्वारा घोषित लाईन लास, बिजली चोरी और विवादित स्मार्ट मीटर के दावे खोखले थे या फिर उनमे किसी आँय अधिकारी का योगदान नही रहा? दर असल दावे और वादे तो होते ही खोखलें है. अगर वास्तविकता से जाँच कराई जाये तो महबली रहे पूर्व एमडी पावर परचेज में एक ऐसी विनाशकरी प्रथा यूपीसीएल के गले डाल गए जिसका दंश आगे तक उपभोक्ताओं को झेलना होगा, करोडों करोडों की परियोजनाओं के टेण्डरों में बंदरबांट और चहेते ठेकेदारों की घुसपैठ व काली कमाई में सहायको की मनचाही पोस्टिंग आदि घोटालों की भरमार खुल कर सामने खुद व खुद सामने आयेगी? परंतु क्या वर्तमान एमडी निगम के हिट कोई कडा कदम उठाएंगे या फिर जैसा चल रहा है चलने दो के सिद्धान्त पर चलेंगे?
देखना यहाँ गौर तलब होगा कि यूपीसीएल एमडी जी एस बुदियाल निगम व कर्मचारियों के प्रमोशन के हितार्थ नियमानुसार कार्य करके सेवा विस्तार की इस नासूर साबित होने वाली नयी परम्परा को हवा देते हैं या इस पर विराम ही लगा रहने देगे। वैसे यहाँ विशेषज्ञों की राय है कि यूपीसीएल की नियमावली में ऐसा कोई प्रावधान भी वर्तमान में नहीं है जिसके तहत प्रबंधन को अधिकार हो?
