मसूरी देहरादून विकास प्राधिकरण (एमडीडीए) को लगभग 7 करोड़ का नुकसान ?

उत्तर प्रदेश से अलग होकर उत्तराखंड बनाया गया ।प्रदेशवासियों ने जबरदस्त संघर्ष किया । कुर्बानी और शहादत के बाद पहाड़ के लोगों को अपना राज्य मिला ।लेकिन प्राकृतिक सौंदर्य से भरपूर पर्वतीय प्रदेश के अव्यवस्थित विकास का स्थानीय लोगों के लिए मुसीबत बन रहा है । राजधानी देहरादून के विकास की बड़ी जिम्मेदारी मसूरी देहरादून विकास प्राधिकरण की है ।जानकार बताते हैं ज्यादातर मामलों में अवैध प्लाटिंग पर मल्टीयुनिट के मानचित्र को गुपचुप तरीके से स्वीकृत कराया जाता है । स्थानीय लोग इसकी शिकायत करते हैं लेकिन उसका समाधान होने के बजाय कुछ मामलों में अवैध प्लाटिंग करने वाले भू माफिया उनको डरने धमकाने का भी प्रयास करते हैं। एमडीडीए भी शिकायतों पर कार्रवाई नहीं करता है ।

जानकारों का कहना है ज्यादातर मामलों में भू माफिया धन के प्रभाव से अपने मकसद में कामयाब हो जाते हैं । इस काम में कुछ लोग बिचैलिए का काम करते हैं और अवैध प्लाटिंग में मददगार होते हैं । इसी तरह का एक मामला दिनांक 16.04.2026 को हमारे द्वारा ही प्रकाशित किया था। यह मामला सहस्त्रधारा रोड के मंदाकनी विहार का है जहां लगभगे 80 बीघा जमीन पर अवैध प्लाटिंग कर दी गई है । बताते हैं यह जमीन पी.सी. डवलपर की है । जिसका प्रतिनिधि मोहित बुटोला है और इसी ने इस पूरी अवैध प्लाटिंग को अंजाम दिया ।बताते है यह व्यक्ति अवैध प्लॉट खरीदने वालों को नक्श।पास हो जाने का झूठा भरोसा देकर प्लाॅट बेच दिए। वह दवा करता है कि प्राधिकरण व शासन आवास विभाग में उसकी जबरदस्त पकड़ है और धन बल के प्रभाव से नक्शा पास कर देगा ।इस बीच कुछ लोगों ने प्लॉट खरीदने के बाद एमडीडीए में नक्शा डाला तो वहां से अवैध प्लाटिंग के कारण नक्शा स्वीकृत नही हो पाया। जब लोगों ने इस मोहित बुटोला के नाम के व्यक्ति से बात की और अपना विरोध जताया तो यह बोलता है कि मैं प्राधिकरण में बात कर लूंगा। इसके लिए प्लाट खरीदने वालों से अलग से धन राशि की मांग की गई।

उसका कहना है विकास प्राधिकरण में धनराशि देनी पड़ेगी। चुंकि बिल्डर को प्राधिकरण से ले-आउट पास कराने में प्राधिकरण के नियमानुसार प्लाटिंग पर नाली, बिजली के पोल, पक्की सड़क व बच्चों के लिए पार्क आदि छोड़ना पड़ता है। और तरह की अवैध प्लाटिंग से प्राधिकरण को राजस्व का करोड़ों रूपये का नुकसान झेलना पड़ता है। इस 80 बीघे में लगभग 3 करोड़ रूपये का शल्टर फंड एवं 4 से 5 करोड़ रूपये का प्राधिकरण का डवलपमेंट चार्ज का सीधा-सीधा नुकसान है और वह मूलभूत सुविधायें जो जनता को मिलनी चाहिए थी वह नही मिलने वाली। इस तरह के प्राॅपर्टी डीलर अवैध प्लाटिंग कर यह कृत्य अधिक पैसा बचाने के लिए करते हैं। ताज्जुब तो यह है कि प्राधिकरण के सेक्टर-6 के जे.ई./ए.ई भी इस प्रकरण से अंजान बने हुए है ।

ऐसे में सैटिंग-गेटिंग के खेल से इंकार नहीं किया जा सकता है । प्राधिकरण अवैध प्लाटिंग और अवैध निर्माण के खिलाफ सख्त कार्रवाई के दावे करता है लेकिन हालत ठीक उलट है। खासकर सहस्रधारा रोड पर जहां नियमों की अनदेखी करते हुए भू माफिया नालों पर कब्जा करने के साथ ही बहुमंजिली इमारतों का अवैध निर्माण कर रहे हैं । साथ ही आपदा और आग लगने की स्थिति में जान मांल की क्षति को आमंत्रण दे रहे हैं। रियल स्टेट से जुड़े कुछ लोग धन बल पर इस क्षेत्र में वृक्षों की कटाई से पर्यावरण के लिए भी संकट पैदा कर रहे हैं । इस बारे में लोग शिकायत करते हैं लेकिन जिम्मेदार अधिकारी अपने निजी स्वार्थ में समस्याओं के हल के बजाय शिकायतकर्ता को आश्वासन देते हैं ।

अब देखना है कि प्राधिकरण मंदाकिनी विहार जैसी अवैध प्लाटिंग पर क्या रूख अपनाता है। इस अवैध प्लाटिंग पर कब ध्वस्तीकरण की कार्यवाही करता है।हालांकि लोग कार्रवाई को लेकर नाउम्मीद हैं। कुछ लोग अदालत की शरण में जाने तो कुछ लोग चुनाव में सत्तारूढ़ पार्टी के खिलाफ काम करने की बात करते हैं ।




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