देहरादून। उत्तराखंड विधानसभा के गैरसैंण स्थित भराड़ीसैंण में आयोजित सत्र के दौरान सरकार ने विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े कई संशोधन विधेयक सदन में पेश किए। इनमें अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थानों के नियमन, सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने पर दंड, राज्य की ऋण सीमा, जीएसटी कानून में बदलाव और तीन नए निजी विश्वविद्यालयों की स्थापना से जुड़े प्रस्ताव शामिल हैं। इन विधेयकों का उद्देश्य संबंधित कानूनों में संशोधन कर प्रशासनिक व्यवस्था, शिक्षा और विकास कार्यों से जुड़े प्रावधानों में बदलाव करना है।
अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थानों के लिए नए प्रावधान प्रस्तावित
सरकार ने उत्तराखंड अल्पसंख्यक शिक्षा अधिनियम में संशोधन विधेयक सदन में पेश किया। प्रस्तावित प्रावधानों के अनुसार, अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थानों में धार्मिक शिक्षा दिए जाने की पुष्टि होने पर संबंधित संस्थान के खिलाफ कार्रवाई की जा सकेगी। इसमें संस्थान को बंद करने, संचालक पर पांच लाख रुपये तक का अर्थदंड लगाने और रिसीवर नियुक्त करने का प्रावधान प्रस्तावित है। कार्रवाई से पहले संबंधित संस्थान के संचालक को सुनवाई का अवसर दिया जाएगा।
विधेयक में मान्यता से संबंधित व्यवस्था भी प्रस्तावित की गई है। इसके तहत कक्षा आठ तक शिक्षा देने वाले संस्थानों को सक्षम प्राधिकारी से, जबकि कक्षा नौ से 12 तक शिक्षा देने वाले संस्थानों को विद्यालयी शिक्षा परिषद से मान्यता लेनी होगी।
सार्वजनिक संपत्ति पर लिखने और विज्ञापन लगाने पर बढ़ेगा जुर्माना
सरकार ने सार्वजनिक संपत्ति पर लिखने, रंगने या विज्ञापन चिपकाने से संबंधित दंड के प्रावधानों में बदलाव का प्रस्ताव रखा है। इसके तहत अधिकतम कारावास की अवधि एक वर्ष से घटाकर तीन महीने करने और जुर्माने की राशि 10 हजार रुपये से बढ़ाकर 20 हजार रुपये करने का प्रस्ताव है। दोषी को संपत्ति की मूल स्थिति बहाल करने में आई लागत भी चुकानी होगी।
उत्तराखंड जल प्रबंधन एवं विनियामक अधिनियम, 2013 के तहत अधिकतम कारावास की अवधि एक वर्ष से घटाकर छह महीने करने का प्रस्ताव भी शामिल है।
निर्धारित मूल्य से अधिक वसूली पर जुर्माने का प्रावधान
एक अन्य प्रस्ताव के तहत निर्धारित मूल्य से अधिक राशि वसूलने पर अतिरिक्त वसूली गई रकम के दस गुना तक जुर्माना लगाया जा सकेगा। जुर्माने की अधिकतम सीमा दो लाख रुपये निर्धारित करने का प्रस्ताव है। संबंधित अपराध में कारावास का प्रावधान हटाने की बात भी विधेयक में शामिल है। इसके अतिरिक्त पंचायती राज अधिनियम, 2016 की एक उपधारा हटाने का प्रस्ताव रखा गया है।
यूआइआइडीबी में एमडी की जगह सीईओ होंगे प्रमुख
उत्तराखंड निवेश और आधारिक संरचना विकास बोर्ड (यूआइआइडीबी) से जुड़े संशोधन विधेयक में प्रबंध निदेशक के स्थान पर मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) को प्रमुख बनाने का प्रस्ताव है। इसके साथ ही बोर्ड की ओर से शुरू की गई परियोजनाओं के तहत परिसंपत्तियों, सुविधाओं और सेवाओं के रखरखाव एवं संचालन से संबंधित प्रावधान भी प्रस्तावित किए गए हैं।
विकास कार्यों के लिए ऋण लेने की सीमा से जुड़े बदलाव
सरकार ने उत्तराखंड राजकोषीय उत्तरदायित्व और बजट प्रबंधन संशोधन विधेयक भी सदन में पेश किया। प्रस्ताव के अनुसार, एक अप्रैल 2026 से 31 मार्च 2031 तक प्रत्येक वित्तीय वर्ष में राजकोषीय घाटा राज्य के सकल घरेलू उत्पाद (जीएसडीपी) के तीन प्रतिशत से अधिक नहीं रखने का प्रावधान है। वहीं, इसी अवधि में कुल दायित्व और संचयी ऋण की सीमा जीएसडीपी के 30 प्रतिशत तक रखने का प्रस्ताव है। इसका उद्देश्य विकास कार्यों के लिए वित्तीय संसाधनों के प्रबंधन की व्यवस्था निर्धारित करना है।
हरिद्वार और चंपावत में खुलेंगे तीन नए निजी विश्वविद्यालय
उच्च शिक्षा के विस्तार के लिए सरकार ने उत्तराखंड निजी विश्वविद्यालय द्वितीय संशोधन विधेयक पेश किया। इसके तहत हरिद्वार में आरोग्यम विश्वविद्यालय और बीएसएम विश्वविद्यालय, जबकि चंपावत में मां पूर्णागिरी विश्वविद्यालय स्थापित करने का प्रस्ताव है। इन प्रस्तावों के माध्यम से राज्य में उच्च शिक्षा के अवसर बढ़ाने की योजना है।
जीएसटी कानून में संशोधन से व्यापारियों को राहत का प्रस्ताव
सरकार ने उत्तराखंड माल और सेवा कर (संशोधन) विधेयक, 2026 भी सदन में रखा। इसमें छूट, क्रेडिट नोट जारी करने और कर वापसी की प्रक्रिया से जुड़े प्रावधानों में संशोधन प्रस्तावित हैं।