देहरादून। अपनी मांगों को लेकर लंबे समय से आंदोलनरत प्रांतीय रक्षक दल (पीआरडी) के जवानों ने एक बार फिर सरकार के खिलाफ मोर्चा खोलने का एलान किया है। मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं होने से नाराज जवान 18 नवंबर को देहरादून में महाआक्रोश रैली निकालेंगे। संगठन ने सरकार पर वादाखिलाफी का आरोप लगाया है।
प्रांतीय रक्षक दल हित संगठन के पदाधिकारियों ने सोमवार को प्रेस क्लब में प्रेस वार्ता कर आंदोलन की घोषणा की। संगठन के प्रदेश अध्यक्ष किशन सिंह रावत ने बताया कि जवानों की दो प्रमुख मांगों को लेकर लंबे समय से संघर्ष किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि पीआरडी जवानों को होमगार्ड की तर्ज पर मूल वेतन के साथ महंगाई भत्ता दिया जाए और उन्हें वर्षभर नियमित रोजगार उपलब्ध कराया जाए। इन मांगों को लेकर संगठन ने 18 मार्च से एकता विहार में अनिश्चितकालीन धरना शुरू किया था।
संगठन के अनुसार, छह जुलाई को विभागीय मंत्री रेखा आर्या को मांगों के संबंध में ज्ञापन सौंपा गया था। मंत्री के निर्देश पर संयुक्त निदेशक युवा कल्याण एवं प्रांतीय रक्षक दल ने धरना स्थल पर संगठन के प्रतिनिधियों से वार्ता कर कार्रवाई का भरोसा दिया था। इसके बाद संगठन ने सात जुलाई से धरना स्थगित कर दिया।
किशन सिंह रावत ने आरोप लगाया कि उस समय दो कैबिनेट बैठकों के भीतर मांगों को कैबिनेट के समक्ष रखने का आश्वासन दिया गया था, लेकिन सात कैबिनेट बैठकें होने के बाद भी मांगों पर निर्णय नहीं लिया गया। इससे प्रदेशभर के पीआरडी जवानों में निराशा है।
उन्होंने चेतावनी दी कि यदि दोनों मांगों पर जल्द सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो 18 नवंबर को प्रदेशभर के पीआरडी जवान देहरादून में महाआक्रोश रैली निकालकर प्रदर्शन करेंगे।प्रेस वार्ता में प्रदेश महासचिव वीर सिंह रावत, जिला अध्यक्ष नवीन सिंह बिष्ट, जिला महासचिव पवन किशोर बहुगुणा, विनोद तोमर और सुधीर तोमर समेत अन्य पदाधिकारी मौजूद रहे।