देहरादून: उत्तराखंड में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस के सामने प्रत्याशियों के चयन की चुनौती बढ़ने के आसार हैं। पार्टी के भीतर इस बार लगभग हर विधानसभा सीट पर टिकट के दावेदारों की संख्या बढ़ने का अनुमान लगाया जा रहा है। ऐसे में योग्य प्रत्याशी का चयन करने के साथ ही अन्य दावेदारों को एकजुट रखना भी पार्टी के लिए अहम होगा।
10 साल से सत्ता से बाहर, दावेदारों को बढ़ी उम्मीद
उत्तराखंड में कांग्रेस पिछले 10 साल से सत्ता से बाहर है। इस दौरान पार्टी के कई नेता और कार्यकर्ता चुनाव में अवसर मिलने का इंतजार कर रहे हैं। अब 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर पार्टी के भीतर सक्रियता बढ़ने की संभावना है। दावेदारों को उम्मीद है कि प्रदेश में सरकार के खिलाफ असंतोष का फायदा कांग्रेस को मिल सकता है।
वहीं, विभिन्न विधानसभा क्षेत्रों में भाजपा के मौजूदा विधायकों को लेकर नाराजगी की चर्चाओं के बीच कांग्रेस नेता चुनावी संभावनाएं तलाश रहे हैं। ऐसे में कई सीटों पर टिकट के लिए प्रतिस्पर्धा बढ़ सकती है।
पुराने नेताओं के साथ नए चेहरों की भी दावेदारी
इस बार टिकट की दौड़ में अनुभवी नेताओं के साथ युवा और नए चेहरे भी शामिल हो सकते हैं। लंबे समय से राजनीति में सक्रिय नेता जहां अपने अनुभव और संगठन में पकड़ के आधार पर दावेदारी पेश करेंगे, वहीं नए नेताओं की ओर से भी अवसर की मांग उठ सकती है।
ऐसे में कांग्रेस के लिए सभी दावेदारों के बीच संतुलन बनाना आसान नहीं होगा। किसी एक नेता को टिकट मिलने पर दूसरे दावेदारों की नाराजगी सामने आने की आशंका भी पार्टी की चिंता बढ़ा सकती है।
जीत की संभावना के आधार पर करना होगा चयन
टिकट वितरण के दौरान कांग्रेस को क्षेत्रीय समीकरण, संगठन में सक्रियता, पिछले चुनावों का प्रदर्शन, स्थानीय स्तर पर जनाधार और प्रत्याशी की जीतने की संभावनाओं जैसे पहलुओं पर विचार करना होगा। पार्टी के सामने चुनौती केवल मजबूत उम्मीदवार चुनने की नहीं, बल्कि टिकट नहीं मिलने वाले नेताओं को भी संगठन के साथ बनाए रखने की होगी।