नैनीताल। उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने राज्य विधानसभा से हटाये गये छह तदर्थ कर्मचारियों की याचिका पर सुनवाई की लेकिन उन्हें फिलहाल कोई राहत नहीं दी है। इस मामले में विधानसभा सचिव से 14 अक्टूबर तक स्थिति स्पष्ट करने को कहा है।
हटाये गये कर्मचारियों कुलदीप सिंह रौथाण, सकुनदीप सिंह, कुंवर सिंह राणा, देव दत्त, बलवंत सिंह जोशाल व महावीर सिंह बुटोला की ओर से इस मामले को पृथक-पृथक रूप से याचिका दायर कर चुनौती दी गयी है। मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति मनोज कुमार तिवारी की एकलपीठ में हुई।
याचिकाकर्ताओं की ओर से कहा गया कि उन्हें गलत ढंग से हटाया गया है। उनके खिलाफ किसी भी प्रकार की कोई शिकायत या अनियमितता का आरोप नहीं है। न ही सरकार ने उन्हें हटाने से पहले सुनवाई का कोई मौका दिया है।
याचिकाकर्ताओं की ओर से 28 सितम्बर के निष्कासन पत्र को आधार बनाते हुए जनहित शब्द पर आपत्ति दर्ज करते हुए कहा गया कि जनहित में किसी को भी सेवा से हटाया नहीं जा सकता है। उन्हें स्वीकृत व रिक्त पदों के सापेक्ष सेवा में रखा गया है। याचिकाकर्ताओं की ओर से 14 दिसंबर के आदेश पर रोक लगाने की मांग की गयी।
दूसरी ओर सरकार की ओर से कहा गया कि सभी को कामचलाऊ व्यवस्था के तहत नियुक्त किया गया था। मात्र एक प्रार्थना पत्र के आधार पर उन्हें सेवा पर रखा गया है। अदालत ने याचिकाकर्ताओं की रोक लगाने संबंधी दलील को फिलहाल नहीं माना और विधानसभा सचिव को सभी प्रकरणों में स्थिति स्पष्ट करने को कहा है।
साथ ही सभी मामलों को पूर्व में दायर 14 मामलों के साथ जोड़ने के निर्देश दे दिये। इस प्रकार कुल 20 मामले उच्च न्यायालय पहुुंच गये हैं। अब सभी मामलों में 14 अक्टूबर को सुनवाई होगी।