रुद्रनाथ मंदिर के पास भूस्खलन से धर्मशाला की दीवार ढही

चतुर्थ केदार रुद्रनाथ मंदिर के समीप एक धर्मशाला के पीछे भूस्खलन होने से धर्मशाला की दीवार और एक ढाबा क्षतिग्रस्त हो गया। धर्मशाला में सो रहे ऋषिकेश के चार तीर्थयात्रियों ने भागकर अपनी जान बचाई।

रविवार रात को रुद्रनाथ क्षेत्र में हुई भारी बारिश से रात करीब सवा एक बजे पहाड़ी से भूस्खलन हो गया जिससे रुद्रनाथ मंदिर के समीप धर्मशाला की दीवार क्षतिग्रस्त हो गई। साथ ही यहां स्थित डुमक गांव के भरत सिंह सनवाल का ढाबा क्षतिग्रस्त हो गया। रुद्रनाथ के पुजारी हरीश भट्ट ने बताया कि भूस्खलन होने के बाद मलबा धर्मशाला के पीछे आ गया जिससे दीवार क्षतिग्रस्त हो गई।

इस दौरान यहां ऋषिकेश के चार तीर्थयात्री सो रहे थे, बोल्डर और मलबा गिरने की आवाज होने पर तीर्थयात्री कमरे से बाहर भाग गए जिससे उनकी जान बच गई। उन्होंने आपदा प्रबंधन विभाग को इसकी जानकारी दी। जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी नंदकिशोर जोशी ने बताया कि बरसात को देखते हुए लोगों को क्षतिग्रस्त भवनों में निवास न करने का आह्वान किया है। साथ ही गदेरे व नदियों के किनारे रह रहे लोगों को बारिश होने पर सुरक्षित स्थानों पर शरण लेने के लिए कहा है।

नृसिंह मंदिर मार्ग से वाहनों की आवाजाही बंद

नृसिंह मंदिर मार्ग धंसने से इस पर वाहनों की आवाजाही बंद कर दी गई है। सभी वाहनों की बाजार से ही आवाजाही करवाई जा रही है जिससे बाजार में जाम की स्थिति बन रही है। यात्राकाल के दौरान नगर में जाम की स्थिति से निजात दिलाने के लिए वन वे व्यवस्था लागू की जाती है। बदरीनाथ जाने वाले वाहन मारवाड़ी होटल से नृसिंह मंदिर मार्ग से गुजरते हैं, जबकि वापसी वाले वाहन मुख्य बाजार से होकर गुजरते हैं।

कुछ दिन पहले स्टेट बैंक के एटीएम के समीप सड़क का पुश्ता धंस गया था जिसके बाद प्रशासन ने इस मार्ग पर बड़े वाहनों की आवाजाही बंद कर दी थी। अब सुरक्षा के लिहाज से इसपर सभी वाहनों की आवाजाही रोक दी गई है। बदरीनाथ जाने और आने वाले सभी वाहन बाजार से ही गुजर रहे हैं। जिससे बाजार में जाम की स्थिति बन रही है। वहीं जोशीमठ थाना प्रभारी राकेश भट्ट का कहना है कि नगर में जाम की समस्या से निपटने के लिए जल्द ट्रैफिक प्लान को लेकर बैठक की जाएगी।

चमोली जिले में 35 सड़कें और 500 पैदल रास्ते क्षतिग्रस्त

विगत दिनों से लगातार हो रही बारिश से ग्रामीण क्षेत्रों में जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है। ग्रामीण क्षेत्रों को जोड़ने वाले करीब 35 मार्ग बंद पड़े हैं जबकि 500 से अधिक पैदल मार्ग क्षतिग्रस्त हो गए हैं। नंदानगर ब्लॉक के सुदूरवर्ती कनोल और बड़गुना गांव को जोड़ने वाले पैदल मार्ग पर भूस्खलन होने से ग्रामीणों को जान हथेली पर रखकर आवाजाही करनी पड़ रही है। दोनों गांवों के आसपास भी भूस्खलन हो रहा है। कनोल गांव के महेंद्र सिंह, तारा सिंह और प्रताप सिंह ने बताया कि कनोल ग्राम पंचायत कई साल से भूस्खलन का दंश झेल रही है। भूस्खलन के कारण गांव का पैदल रास्ता ध्वस्त हो गया है। ग्रामीण एक दूसरे का सहारा बनकर भूस्खलन क्षेत्र से आवाजाही करने के लिए मजबूर हैं। बच्चे भी इसी क्षतिग्रस्त रास्ते से आवाजाही कर स्कूल पहुंच रहे हैं।

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