नैनीताल। उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने नैनीताल जिले के ओखलकांडा ब्लाक में महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) योजना के तहत आठ सौ से अधिक ग्रामीणों के श्रम कार्डों का नवीनीकरण नहीं होने के खिलाफ दायर जनहित याचिका की सुनवाई करते हुए मंगलवार को प्रदेश सरकार को निर्देश दिए कि श्रम कार्ड नवीनीकरण के लिए अधिकृत बेबसाइट या पोर्टल को जल्द चालू करें।
साथ ही अदालत ने कहा कि इस मामले के दोषियों के नाम भी अदालत के सामने रखें। इस मामले को ओखलकांडा निवासी अंजू देवी की ओर से चुनौती दी गयी है और इस प्रकरण की सुनवाई मुख्य न्यायाधीश विपिन सांघी व न्यायमूर्ति राकेश थपलियाल की युगलपीठ में हुई।
याचिकाकर्ता की ओर से अदालत को बताया गया कि ओखलकांडा ब्लाक के करीब आठ सौ लोगों के श्रम कार्ड वर्ष 2017 में बनाये गये थे। जिनकी वैद्यता वर्ष 2020 में समाप्त हो गयी है। जब प्रभावितों ने हल्द्वानी स्थित श्रम कार्यालय से संपर्क किया तो पता चला कि कोरोना काल से अधिकृत बेबसाइट बंद चल रही है।
याचिकाकर्ता की ओर से यह भी कहा कि इसके चलते उन्हें सरकारी योजनाओं का लाभ नही मिल पा रहा है। आगे बताया कि जब-जब पोर्टल को खोलने के लिए उच्च अधिकारियों से संपर्क किया गया तो वेबसाइट और पोर्टल बोर्ड से बंद होने की वजह बताई गयी। इस मामले में अगली सुनवाई 27 सितंबर को होगी।