देहरादून: उत्तराखंड विद्युत नियामक आयोग ने मुख्यमंत्री सौर स्वरोजगार योजना के तहत 200 किलोवाट क्षमता के सोलर प्लांट लगाने वाले 10 उत्पादकों की याचिकाएं खारिज कर दी हैं। उत्पादकों ने 31 मार्च 2026 की समयसीमा बीतने के बाद भी 4.64 रुपये प्रति यूनिट की पुरानी दर से बिजली खरीद का लाभ देने की मांग की थी। आयोग ने स्पष्ट किया कि याचिकाकर्ता यह साबित नहीं कर पाए कि उनके सोलर प्लांट निर्धारित समयसीमा तक बनकर तैयार हो चुके थे।दरअसल, चमोली जिले के 10 सोलर विकासकर्ताओं ने विद्युत नियामक आयोग में याचिका दाखिल की थी। उनका दावा था कि निर्धारित समयसीमा तक उनके सोलर प्लांट का निर्माण पूरा हो गया था, लेकिन उत्तराखंड पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (यूपीसीएल) की ओर से 11 केवी बिजली निकासी लाइन बिछाने में देरी की गई। इसके चलते प्लांट समय पर चालू (कमीशन) नहीं हो सके।विकासकर्ताओं ने इसी आधार पर पुरानी आरक्षित दर 4.64 रुपये प्रति यूनिट का लाभ देने की मांग की थी।
दस्तावेजों से साबित नहीं कर पाए निर्माण पूरा होने का दावा
आयोग ने याचिकाओं की सुनवाई के दौरान विकासकर्ताओं की ओर से पेश किए गए दस्तावेजों की जांच की। इसमें पाया गया कि याचिकाकर्ता प्लांट निर्माण पूरा होने के दावे के समर्थन में जरूरी साक्ष्य प्रस्तुत नहीं कर सके।विकासकर्ता सोलर पैनल की डिलीवरी के चालान, केबल और स्ट्रक्चर खरीद की रसीदें तथा निर्माण के दौरान की तस्वीरें उपलब्ध नहीं करा पाए। आयोग के सामने पेश की गई तस्वीरें भी निर्धारित समयसीमा के पांच महीने बाद यानी दो सितंबर 2026 की थीं।
जरूरत से कम क्षमता के सोलर पैनल के बिल मिले
सुनवाई के दौरान एक और अहम तथ्य सामने आया। 10 सोलर प्लांट के लिए जितनी क्षमता के सोलर पैनलों की आवश्यकता थी, खरीद के बिलों में उससे काफी कम क्षमता के मॉड्यूल दर्ज थे।इन दस्तावेजों और साक्ष्यों के आधार पर आयोग ने माना कि विकासकर्ता 31 मार्च 2026 तक प्लांट तैयार होने का दावा साबित नहीं कर पाए। इसके बाद आयोग ने सभी 10 याचिकाएं खारिज कर दीं। इस फैसले से संबंधित विकासकर्ताओं को पुरानी 4.64 रुपये प्रति यूनिट की दर का लाभ नहीं मिल सकेगा।