देहरादून। दीपावली के त्योहार पर उत्तराखंड की ग्रामीण महिलाएं स्वदेशी उत्पादों के जरिए आत्मनिर्भरता की नई मिसाल पेश कर रही हैं। कहीं स्वयं सहायता समूहों की महिलाएं स्वदेशी एलईडी लड़ियां तैयार कर घरों को रोशन कर रही हैं, तो कहीं पहाड़ी मिलेट्स से बने आकर्षक गिफ्ट हैंपर लोगों की पसंद बन रहे हैं। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन से जुड़ी महिलाओं की इस पहल ने न केवल स्थानीय उत्पादों को बाजार में पहचान दिलाई है, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती दी है।
विकासनगर ब्लॉक के ग्राम सोरना डोभरी स्थित स्वाभिमान महिला क्लस्टर की महिलाएं मिलेट्स आधारित उत्पादों के गिफ्ट हैंपर तैयार कर रही हैं। इन हैंपर में हैंडमेड कुकीज, रागी हनी बिस्किट, फ्रूट एंड नट्स चॉकलेट, गुड़ मिल्क बिस्किट, रागी चॉकलेट और मंडुआ केक जैसे उत्पाद शामिल हैं। इनकी मांग देहरादून के साथ उत्तरकाशी और टिहरी गढ़वाल तक पहुंच रही है।

स्वाभिमान बेकरी यूनिट की सदस्य कल्पना बिष्ट के मुताबिक, करीब दो साल पहले ग्रामीण उद्यम वेग वृद्धि परियोजना (रीप) के सहयोग से बेकरी यूनिट की शुरुआत की गई थी। इस बार दीपावली पर कई बड़े संस्थानों से गिफ्ट हैंपर के ऑर्डर मिले। अब तक 2,000 से अधिक गिफ्ट हैंपर बेचकर 18 लाख रुपये से ज्यादा का कारोबार किया जा चुका है। इस यूनिट से गांव की आठ अन्य महिलाओं को भी रोजगार मिल रहा है।

350 महिलाएं तैयार कर रहीं स्वदेशी एलईडी लड़ियां
उधर, रायपुर ब्लॉक के सोडा सरोली ग्रोथ सेंटर में दिव्य ज्योति क्लस्टर लेवल फेडरेशन की महिलाएं मुख्यमंत्री सशक्त बहना उत्सव योजना के तहत स्वदेशी हिलान्स एलईडी लड़ियों का निर्माण कर रही हैं। क्लस्टर को कुल 1.30 लाख एलईडी लड़ियां तैयार करने का ऑर्डर मिला है। सोडा सरोली और थानों न्याय पंचायत से जुड़ी करीब 350 महिलाएं घरों पर ही इनका निर्माण कर रही हैं।
क्लस्टर की अध्यक्ष ममता कोठियाल ने बताया कि बाजार में एलईडी लड़ियों का एक पैकेट करीब 120 रुपये में बिक रहा है, जबकि इसे तैयार करने में 70 से 80 रुपये की लागत आती है। प्रत्येक महिला को 100 पैकेट तैयार करने पर करीब 700 रुपये की आय हो रही है। अब तक 1.05 लाख लड़ियों की आपूर्ति पूरी की जा चुकी है, जबकि शेष 25 हजार लड़ियों का निर्माण जारी है।
लखपति दीदी बनने की दिशा में बढ़ रहीं महिलाएं
सहायक परियोजना निदेशक अनीता पंवार ने बताया कि दोनों क्लस्टर की महिलाएं दीपावली के अवसर पर पूरे उत्साह से आजीविका संवर्धन के कार्यों में जुटी हैं। स्वदेशी एलईडी लड़ियों से लेकर पहाड़ी मिलेट्स से बने खाद्य उत्पादों तक, महिलाओं के उत्पादों को बाजार में अच्छी मांग मिल रही है। इससे उन्हें रोजगार और स्वरोजगार के नए अवसर मिल रहे हैं।
दीपावली पर महिलाओं की यह पहल ‘वोकल फॉर लोकल’ अभियान को भी मजबूती दे रही है। साथ ही स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा देने और ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक सकारात्मक उदाहरण पेश कर रही है।