ऑनलाइन ट्रेडिंग के नाम पर करोड़ों की ठगी, STF ने दो आरोपियों को किया गिरफ्तार; विदेश से चल रहा था नेटवर्क

उत्तराखंड में ऑनलाइन ट्रेडिंग और निवेश के नाम पर करोड़ों रुपये की धोखाधड़ी करने वाले नेटवर्क के खिलाफ स्पेशल टास्क फोर्स (STF) ने बड़ी कार्रवाई की है। एसटीएफ ने मामले में नवीन सिंह नेगी और कविता परमार को गिरफ्तार किया है। आरोप है कि दोनों अधिक मुनाफे और विदेश यात्राओं का लालच देकर लोगों को निवेश के लिए प्रेरित करते थे। जांच में विदेश में बैठे मुख्य आरोपी लविश चौधरी का नाम भी सामने आया है, जिस पर कंपनियों के माध्यम से ठगी का नेटवर्क संचालित करने का आरोप है।

 

मुख्यमंत्री के निर्देश पर गठित हुई SIT

मुख्यमंत्री के निर्देश पर पुलिस महानिदेशक दीपम सेठ ने मामले की जांच के लिए एसटीएफ के अधीन विशेष अन्वेषण दल (SIT) का गठन किया था। आईजी नीलेश आनंद भरणे और एसएसपी एसटीएफ के निर्देशन में प्रदेश के विभिन्न जिलों में दर्ज मुकदमों की एकीकृत जांच की जा रही है। इस नेटवर्क के खिलाफ प्रदेश में करीब 10 मुकदमे दर्ज होने की जानकारी सामने आई है।

 

2022 से नेटवर्क से जुड़ा था नवीन सिंह नेगी

जांच में सामने आया कि गिरफ्तार आरोपी नवीन सिंह नेगी वर्ष 2022 से एक कंपनी से जुड़ा था। बाद में वह लविश चौधरी द्वारा संचालित कंपनियों के माध्यम से लोगों को निवेश के लिए प्रेरित करने लगा। एसटीएफ के मुताबिक, संबंधित कंपनियां आरबीआई और सेबी में पंजीकृत नहीं थीं। कंपनी बंद होने और उसके खिलाफ मुकदमे दर्ज होने के बावजूद नवीन ने नई कंपनी का प्रचार शुरू कर दिया था। वह जूम मीटिंग के जरिए लोगों को दोबारा ऑनलाइन बिजनेस से जोड़ने का प्रयास कर रहा था। इसके बाद साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन देहरादून में मुकदमा दर्ज किया गया।

 

10 से 15 हजार लोगों को नेटवर्क से जोड़ने का आरोप

दूसरी गिरफ्तार आरोपी कविता परमार भी वर्ष 2022 से कंपनी से जुड़ी थी। पूछताछ में सामने आया कि उसने खुद और अपने परिजनों की आईडी बनाकर निवेश किया था। साथ ही रेफरल आईडी के जरिए बड़ी संख्या में लोगों को नेटवर्क से जोड़ा। एसटीएफ के अनुसार, उसकी रोबो आईडी से करीब 10 से 15 हजार लोग जुड़े हुए थे। वह कंपनी में सीनियर ईगल एग्जीक्यूटिव के पद तक पहुंच गई थी।

 

आरोप है कि कविता को कंपनी से हर महीने करीब एक हजार डॉलर का लाभ मिलता था। वर्ष 2023 से 2026 के बीच वह कंपनी के सेमिनार में शामिल होने के लिए मलेशिया, थाईलैंड, दुबई और वियतनाम की करीब 12 से 13 बार यात्रा कर चुकी थी। इन यात्राओं का आने-जाने, रहने और खाने का खर्च कंपनी की ओर से उठाया जाता था।

 

जूम मीटिंग में जुड़ते थे एक हजार लोग

एसटीएफ की जांच में पता चला कि कविता देहरादून समेत उत्तराखंड के अलग-अलग क्षेत्रों में कंपनी का प्रचार करती थी। जूम मीटिंग और व्हाट्सएप ग्रुप के माध्यम से लोगों को निवेश के लिए प्रेरित किया जाता था। ऑनलाइन बैठकों में एक समय पर करीब एक हजार लोग जुड़ते थे।

 

पूछताछ में यह भी सामने आया कि निवेशकों की ओर से कंपनी के बैंक खातों में जमा कराई गई रकम के बदले उनके ऑनलाइन खातों में डॉलर के रूप में आंकड़े दिखाए जाते थे। आरोपी के अनुसार, ये आंकड़े वास्तविक धनराशि नहीं थे।

 

30 हजार करोड़ से अधिक की संपत्ति सीज होने की जानकारी

आईजी एसटीएफ नीलेश आनंद भरणे के मुताबिक, आरोपी निवेश का झांसा देकर ऑनलाइन साइबर ठगी करते थे। इसके लिए मार्केटिंग की बड़ी चेन तैयार की गई थी। उन्होंने इसे मल्टीलेवल इन्वेस्टमेंट के नाम पर की गई बड़ी ठगी बताते हुए कहा कि अब तक इस नेटवर्क से जुड़े मामलों में अलग-अलग राज्यों में 30 हजार करोड़ रुपये से अधिक की संपत्ति सीज की जा चुकी है।

 

दो मोबाइल फोन बरामद, विदेश में बैठे मुख्य आरोपी की तलाश

एसटीएफ ने आरोपियों के कब्जे से दो मोबाइल फोन बरामद किए हैं। इनमें ऑनलाइन ट्रांजेक्शन, बैंकिंग विवरण, व्हाट्सएप चैट, ट्रेडिंग खातों और क्रिप्टोकरेंसी से जुड़े अहम साक्ष्य मिलने की संभावना है।

 

फिलहाल एसटीएफ निवेशकों से जुटाई गई रकम के वास्तविक स्रोत और गंतव्य की जांच कर रही है। इसके साथ ही बैंक खातों, नकद लेन-देन, क्रिप्टोकरेंसी के जरिए हुए ट्रांजेक्शन और विदेश में बैठे मुख्य आरोपी लविश चौधरी समेत अन्य सहयोगियों की भूमिका भी खंगाली जा रही है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *