उत्तराखंड में वर्ष 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर भाजपा ने तैयारियां तेज कर दी हैं। लगातार तीसरी बार सत्ता हासिल करने के लक्ष्य के साथ पार्टी ने प्रदेश के करीब 3,000 कमजोर बूथों को चिह्नित किया है। इन बूथों पर संगठन को मजबूत करने और मतदाताओं के बीच अपनी पकड़ बढ़ाने के लिए विशेष रणनीति तैयार की गई है। भाजपा का मानना है कि चुनाव में जीत का रास्ता बूथ से होकर गुजरता है, लेकिन वर्ष 2022 के चुनावी नतीजों ने पार्टी को बूथ प्रबंधन की कमजोरियों पर नए सिरे से विचार करने के संकेत दिए हैं।
12,543 बूथों में से 3,000 पर विशेष फोकस
वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव के बाद भाजपा ने बूथवार समीक्षा की थी। इसमें सामने आया कि कई विधानसभा क्षेत्रों में पार्टी अधिक बूथों पर आगे रहने के बावजूद चुनाव हार गई। इन आंकड़ों ने संगठन को अपनी रणनीति में बदलाव करने के लिए प्रेरित किया।
प्रदेश में कुल 12,543 मतदेय स्थलों में से करीब 3,000 कमजोर बूथ चिह्नित किए गए हैं। इन बूथों पर संगठन की सक्रियता बढ़ाने से लेकर मतदाताओं के बीच पैठ मजबूत करने तक के लिए कार्ययोजना तैयार की गई है।
2022 के नतीजों ने दिखाई बूथ प्रबंधन की कमजोरियां
भाजपा की बूथवार समीक्षा में कई विधानसभा क्षेत्रों के आंकड़े सामने आए, जिन्होंने पार्टी की चिंता बढ़ाई।
हरिद्वार ग्रामीण में भाजपा 87 बूथों पर पहले स्थान पर रही, जबकि 61 बूथों पर दूसरे स्थान पर रही। अल्मोड़ा में पार्टी 85 बूथों पर आगे रही, लेकिन महज 127 मतों के अंतर से चुनाव हार गई।
हल्द्वानी में 105 बूथों पर बढ़त बनाने के बावजूद भाजपा प्रत्याशी को 7,814 मतों से हार का सामना करना पड़ा। भगवानपुर में पार्टी केवल 10 बूथों पर पहले स्थान पर रही, जबकि 130 बूथों पर तीसरे स्थान पर खिसक गई।
यमुनोत्री में भी भाजपा महज 12 बूथों पर पहले और 128 बूथों पर तीसरे स्थान पर रही। बदरीनाथ, पिथौरागढ़, प्रतापनगर और धारचूला में भी दूसरे स्थान पर रहने वाले बूथों की संख्या अधिक रही।
सभी 70 विधानसभा क्षेत्रों में विस्तारकों की तैनाती
भाजपा ने प्रदेश की सभी 70 विधानसभा क्षेत्रों में विस्तारकों की तैनाती कर दी है। विस्तारकों को बूथ समितियों की सक्रियता बढ़ाने और स्थानीय राजनीतिक परिस्थितियों का फीडबैक जुटाने की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
कमजोर बूथों पर बूथ अध्यक्षों और कार्यकर्ताओं की जिम्मेदारी तय की जाएगी। इसके साथ ही सरकारी योजनाओं के लाभार्थियों, युवा और महिला मतदाताओं तक पहुंच बनाने पर विशेष जोर दिया जाएगा।
तीन स्तरों पर काम करेगी भाजपा
वर्ष 2027 के चुनाव के लिए भाजपा ने बूथों को तीन श्रेणियों में बांटकर रणनीति तैयार की है।
दूसरे स्थान वाले बूथ: यहां पार्टी को पहले स्थान तक पहुंचाने का प्रयास होगा।
तीसरे स्थान वाले बूथ: यहां संगठन को मजबूत कर मुकाबले में वापसी की रणनीति बनाई जाएगी।
पहले स्थान वाले बूथ: यहां मौजूदा बढ़त को और मजबूत करने पर जोर रहेगा।
भाजपा के सामने अब चुनौती केवल बूथों पर बढ़त बनाने की नहीं, बल्कि उस बढ़त को विधानसभा सीटों पर जीत में बदलने की भी है। कमजोर बूथों पर संगठन की सक्रियता और मतदाताओं के बीच स्वीकार्यता बढ़ाने की रणनीति वर्ष 2027 के चुनाव में पार्टी के लिए अहम साबित हो सकती है।